नई दिल्ली, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। भारत ने घरेलू सुरक्षा और सीमा पार डेटा चोरी की चिंताओं को देखते हुए चीनी सर्विलांस तकनीक के खिलाफ एक निर्णायक मोर्चा खोल दिया है। सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि अब देश में केवल वही इंटरनेट-बेस्ड CCTV कैमरे बेचे जा सकेंगे जो सख्त सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करेंगे।
यह कदम सीधे तौर पर चीन में बने कैमरों की ओर इशारा करता है, जो लंबे समय से भारतीय बाजार में अपनी कम कीमतों के कारण हावी रहे हैं। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, 1 अप्रैल, 2026 के बाद से बिना वैध प्रमाणन के किसी भी चीनी मूल के कैमरे की बिक्री भारत में संभव नहीं होगी।
हालांकि सरकार ने तकनीकी रूप से इसे ‘सर्टिफिकेशन अनिवार्य’ करना कहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका प्रभाव चीनी हार्डवेयर को भारतीय इकोसिस्टम से बाहर करने जैसा ही है।
चीनी कैमरों पर यह सख्ती केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका ने साल 2022 में ही फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) के जरिए हिकविज़न (Hikvision) और डहुआ (Dahua) जैसे बड़े ब्रांड्स को प्रतिबंधित कर दिया था। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इन डिवाइस के जरिए संवेदनशील डेटा सीधे विदेशी सरकारी सर्वरों तक पहुंच सकता है।
इसी राह पर चलते हुए यूनाइटेड किंगडम ने अपने सरकारी कार्यालयों और सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील इमारतों से इन कैमरों को उखाड़ फेंकने का आदेश दिया है।
जासूसी का डर केवल काल्पनिक नहीं है बल्कि तकनीकी जटिलताओं पर आधारित है। आधुनिक स्मार्ट CCTV कैमरे वीडियो फुटेज को सीधे क्लाउड सर्वर पर स्टोर करते हैं। रक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि कई चीनी कैमरों में ‘बैकडोर एक्सेस’ (गुप्त प्रवेश बिंदु) पाए गए हैं।
इसके माध्यम से कोई भी बाहरी हैकर या संबंधित देश की एजेंसी बिना यूजर की अनुमति के लाइव फीड तक पहुंच सकती है। ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने भी इसी खतरे को देखते हुए अपने रक्षा प्रतिष्ठानों से हजारों चीनी कैमरे हटा दिए हैं।
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि ये कैमरे सैन्य ठिकानों, पावर ग्रिड और सरकारी मंत्रालयों जैसे क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए किसी भी साइबर हमले से ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं। चूंकि ये डिवाइस इंटरनेट से चौबीसों घंटे जुड़े रहते हैं, इसलिए इन्हें हैक करना और भी आसान हो जाता है। जियो-पॉलिटिकल तनाव के बीच भारत अपनी आंतरिक गतिविधियों का एक्सेस चीन जैसे पड़ोसी देशों के सर्वर पर नहीं रहने देना चाहता।
इस प्रतिबंध का सीधा लाभ घरेलू और वैश्विक विश्वसनीय ब्रांड्स को मिलने की उम्मीद है। बाजार में अब स्थानीय निर्माताओं और CP Plus या जापानी व अमेरिकी कंपनियों की मांग बढ़ने वाली है।
हालांकि, आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि जिन लोगों के घरों या दफ्तरों में पहले से चीनी कैमरे लगे हुए हैं, उन्हें तत्काल हटाने का दबाव नहीं है। वे डिवाइस पुराने नियमों के तहत काम करते रहेंगे, लेकिन भविष्य में नई खरीदारी के दौरान ग्राहकों को सर्टिफाइड सुरक्षित डिवाइस ही चुनने होंगे।









