Gold Silver Price Today : आने वाले त्योहारी सीजन की तैयारी कर रहे लोगों की जेब पर इस हफ्ते सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों का सीधा असर पड़ा है। बाजार में कीमती धातुओं के भाव तेजी से ऊपर चढ़े हैं।
अगर आप भी गहने या सिक्के खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो बाजार जाने से पहले नए भाव और बिलिंग का सही गणित समझ लेना जरूरी है।
एक हफ्ते में कितना महंगा हुआ सोना-चांदी?
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, बीते एक हफ्ते में कीमतों में बड़ा बदलाव आया है:
24 कैरेट सोना (999 शुद्धता): 14 अगस्त को ₹1,52,363 प्रति 10 ग्राम था, जो 21 अगस्त की शाम तक बढ़कर ₹1,60,620 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यानी एक हफ्ते में ₹8,257 की बढ़त दर्ज हुई।
22 कैरेट सोना (916 शुद्धता): गहनों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला 22 कैरेट सोना ₹1,39,565 से बढ़कर ₹1,47,128 प्रति 10 ग्राम हो गया है।
18 कैरेट सोना (750 शुद्धता): इसका भाव ₹1,14,272 से चढ़कर ₹1,20,465 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है।
चांदी (999 शुद्धता): चांदी की कीमत ₹2,33,842 से बढ़कर ₹2,46,630 प्रति किलो हो गई है, यानी हफ्ते भर में ₹12,788 प्रति किलो का उछाल आया है।
दुकान के बिल और IBJA रेट में क्यों होता है अंतर?
अक्सर लोग जब ज्वैलरी शॉप पर जाते हैं, तो उन्हें बताया गया रेट IBJA की दरों से अधिक मिलता है। इसका कारण समझना आसान है:
IBJA द्वारा जारी किए जाने वाले भाव राष्ट्रीय स्तर के बेंचमार्क होते हैं। इन बेस रेट्स में 3% GST और ज्वैलरी बनाने का मेकिंग चार्ज शामिल नहीं होता।
स्थानीय स्तर पर ढुलाई खर्च और स्थानीय टैक्स के कारण शहरों के हिसाब से अंतिम बिल में अंतर आ जाता है।
कीमतों में तेजी की मुख्य वजहें
बाजार के जानकारों के अनुसार, यह बढ़त केवल घरेलू मांग की वजह से नहीं है। वैश्विक स्तर पर डॉलर के उतार-चढ़ाव, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आर्थिक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने-चांदी की मांग बढ़ने से कीमतों को लगातार समर्थन मिल रहा है।
खरीदारी करने वाले क्या रणनीति अपनाएं?
अगर आपको शादी-ब्याह या त्योहार के लिए आभूषण खरीदने ही हैं, तो सारा पैसा एक बार में लगाने के बजाय जरूरत के हिसाब से टुकड़ों (SIP स्टाइल) में खरीदारी करना ज्यादा सुरक्षित रहता है।
वहीं, अगर आप सिर्फ निवेश के नजरिए से खरीदारी सोच रहे हैं, तो केवल मौजूदा तेजी देखकर जल्दबाजी में फैसला न लें। बाजार के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर अपने बजट के भीतर ही निवेश करें।















