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दुबई में गुरु नानक दरबार गुरुद्वारा अनिश्चितकाल के लिए बंद, जानें प्रशासन ने क्यों लिया यह फैसला

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Ansh Goyal Updated Sat, 04 Apr 2026 09:48 PM IST

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को देखते हुए दुबई सरकार ने जेबेल अली स्थित गुरु नानक दरबार गुरुद्वारे को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया है। यह कदम संभावित मिसाइल हमलों और रणनीतिक सुरक्षा जोखिमों से आम जनता को बचाने के लिए उठाया गया है।

दुबई में गुरु नानक दरबार गुरुद्वारा अनिश्चितकाल के लिए बंद, जानें प्रशासन ने क्यों लिया यह फैसला

मुख्य बातें

  • दुबई की कम्युनिटी डेवलपमेंट अथॉरिटी (CDA) ने तत्काल प्रभाव से सभी धार्मिक सेवाओं पर लगाई रोक।
  • जेबेल अली पोर्ट की संवेदनशीलता और मिसाइल मलबे के खतरे के कारण लिया गया बड़ा फैसला।
  • गुरुद्वारा कमेटी के चेयरमैन सुरेंदर सिंह कंधारी ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई धार्मिक नहीं, बल्कि सुरक्षा आधारित है।

दुबई, 04 अप्रैल 2026 (आरएनएस)। पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों के बीच दुबई प्रशासन ने जेबेल अली स्थित ऐतिहासिक गुरु नानक दरबार गुरुद्वारे को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का आधिकारिक फरमान जारी कर दिया है। ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष की आंच अब खाड़ी के सुरक्षित समझे जाने वाले इलाकों तक पहुंचती दिख रही है, जिसके मद्देनजर यह सख्त फैसला लिया गया है।

गुरुद्वारा कमेटी के चेयरमैन सुरेंदर सिंह कंधारी ने इस खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि दुबई पुलिस की ओर से उन्हें परिसर को पूरी तरह बंद करने के स्पष्ट निर्देश मिले हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस कदम का किसी भी तरह के धार्मिक भेदभाव से कोई लेना-देना नहीं है। मौजूदा हालात में आम लोगों और श्रद्धालुओं की जान की हिफाजत करना ही सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।

दुबई की कम्युनिटी डेवलपमेंट अथॉरिटी (CDA) ने इस संबंध में एक औपचारिक पत्र जारी किया है, जिसमें युद्ध के विस्तार की आशंकाओं का हवाला दिया गया है। गौरतलब है कि जेबेल अली इलाका रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ विश्व प्रसिद्ध जेबेल अली पोर्ट स्थित है। सैन्य जानकारों के अनुसार, किसी भी हवाई हमले या मिसाइल इंटरसेप्शन (हवा में मिसाइल गिराने) की स्थिति में आसमान से गिरने वाला मलबा इस क्षेत्र में भारी तबाही मचा सकता है।

ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच त्रिकोणीय तनाव ने पूरे मध्य पूर्व को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है। दुबई प्रशासन का मानना है कि गुरुद्वारे जैसे भीड़भाड़ वाले स्थान पर इस समय लोगों का जुटना जोखिम भरा हो सकता है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा एजेंसियां किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर हैं और यह कदम केवल एहतियात के तौर पर उठाया गया है।

गुरुद्वारा प्रबंधन ने भी एक तत्काल नोटिस जारी कर श्रद्धालुओं को सूचित कर दिया है कि अगले आदेश तक वहां कोई भी धार्मिक गतिविधि या दर्शन नहीं होंगे। यह गुरुद्वारा न केवल सिखों बल्कि अन्य समुदायों के लिए भी श्रद्धा का केंद्र रहा है, लेकिन मौजूदा जियोपॉलिटिकल हालात ने प्रशासन को यह अप्रिय लेकिन जरूरी निर्णय लेने पर मजबूर कर दिया है।

Ansh Goyal

अंश गोयल 'दून हॉराइज़न' में अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ (International Desk) की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वैश्विक राजनीति, युद्ध के हालात, कूटनीति (Diplomacy) और ग्लोबल इकॉनमी पर उनकी गहरी पकड़ है। अंश का मुख्य फोकस अमेरिका, रूस, मध्य पूर्व और पड़ोसी देशों की हलचल का भारतीय दृष्टिकोण से सटीक विश्लेषण करना है। विदेशी मंचों पर भारत के बढ़ते दबदबे और वैश्विक नीतियों का आम आदमी पर पड़ने वाले प्रभाव को वे बेहद सरल हिंदी में समझाते हैं। उनकी डीप-रिसर्च वाली रिपोर्टिंग पाठकों को दुनिया भर की विश्वसनीय खबरें प्रदान करती है।

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