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भारतीय मुसलमान देश के लिए जीता और मरता है, हम पहले भारतीय हैं फिर मुसलमान : शादाब शम्स

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स ने पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर वहां के शीर्ष नेतृत्व द्वारा भारतीय मुसलमानों पर दिए गए बयानों की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय मुसलमान अपनी सांस्कृतिक पहचान से जुड़े हैं और 1947 में ही देश के उलेमा व बड़े संस्थानों ने पाकिस्तान की मजहबी विभाजनकारी सोच को खारिज कर दिया था।

Shadab Shams slams Pakistan Independence Day remarks, warns against speaking for Indian Muslims

HIGHLIGHTS

  • पाकिस्तानी नेतृत्व के बयानों की शादाब शम्स ने की घोर निंदा
  • भारतीय मुसलमान पहले भारतीय हैं और बाद में मुसलमान
  • 1947 में देवबंद जैसे संस्थानों ने पाकिस्तान को नकारा
  • भारत में संविधान सर्वोपरि, सभी नागरिकों को समान अधिकार

दून हॉराइज़न, देहरादून (17 अगस्त 2026): पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर वहां के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति द्वारा भारतीय मुसलमानों को लेकर दिए गए बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने इन बयानों को पूरी तरह शर्मनाक बताते हुए साफ शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान भारत के मुसलमानों का ठेकेदार बनने की कोशिश बिल्कुल बंद करे।

पाकिस्तान खुद को सऊदी अरब के साथ जोड़कर भारतीय मुसलमानों का स्वघोषित संरक्षक दिखाने की नाकाम कोशिश कर रहा है। भारत के मुसलमानों ने कभी भी पाकिस्तान को गंभीरता से नहीं लिया। जिस देश की अपनी कोई सांस्कृतिक पहचान और बुनियादी वजूद नहीं है, उसे भारत या यहां के अल्पसंख्यकों को सीख देने का कोई हक नहीं है।

भारत का मुसलमान अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से गहराई से जुड़ा हुआ है। हम पहले भारतीय हैं और उसके बाद मुसलमान। पाकिस्तान धर्म और नफरत की बुनियाद पर खड़ा किया गया एक मुल्क है।

साल 1947 के बंटवारे के दौरान ही इस देश के उलेमा और प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरुओं ने पाकिस्तान के विचार को पूरी तरह नकार दिया था। दारुल उलूम देवबंद जैसे बड़े मजहबी और ऐतिहासिक संस्थानों ने उस वक्त पाकिस्तान के साथ जाने से साफ इनकार कर दिया था। भारत के आम मुसलमानों ने उसी दौर में कट्टरता पर टिकी उस विभाजनकारी मानसिकता को खारिज कर दिया था।

पाकिस्तानी राष्ट्रपति के उस बयान पर भी कड़ा प्रहार किया गया जिसमें उन्होंने अपने देश में 4 प्रतिशत हिंदुओं को बर्दाश्त (टॉलेरेट) करने का दावा किया था। भारत में किसी को किसी की दया पर ‘टॉलेरेट’ नहीं किया जाता। यहां देश का मजबूत संविधान लागू है, जो हर नागरिक को बराबर की ताकत देता है।

यह मुल्क जितना हिंदू भाइयों का है, उतना ही अधिकार इस देश के मुसलमानों का भी है। पाकिस्तान के हुक्मरानों की घटिया मानसिकता भारत की लोकतांत्रिक जमीन पर काम नहीं करती। भारतीय मुसलमान इसी मिट्टी के लिए जीता है और इसी तिरंगे के लिए अपनी जान कुर्बान करता है।

पाकिस्तानी हुक्मरान अपनी नापाक सोच और गलतफहमी को अपनी जेब में रखें और अपनी सीमाओं में रहना सीखें। जिस नफरत भरी सोच पर पाकिस्तान चल रहा है, आने वाले समय में उस मुल्क का भविष्य बेहद अंधकारमय होने वाला है।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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