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Jageshwar Dham Controversy : उत्तराखंड का पांचवा धाम ‘अपवित्र’? मंदिर के गर्भगृह में असलहा ले जाने पर मचा बवाल

उत्तराखंड के जागेश्वर धाम के गर्भगृह में बरेली के जिलाधिकारी के गनर द्वारा हथियार ले जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। मंदिर के पुजारियों ने इसे परंपरा का उल्लंघन बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई है, जिसके बाद जिलाधिकारी ने इस घटना पर खेद प्रकट किया है।

Jageshwar Dham Controversy : उत्तराखंड का पांचवा धाम 'अपवित्र'? मंदिर के गर्भगृह में असलहा ले जाने पर मचा बवाल

HIGHLIGHTS

  • बरेली डीएम के गनर के पास गर्भगृह के भीतर प्रतिबंधित कार्बाइन देखी गई।
  • पुजारियों का दावा- आज तक प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री के सुरक्षाकर्मी भी गर्भगृह में नहीं गए।
  • एएसआई ने मंदिर के बाहर चेतावनी बोर्ड लगाकर हथियारों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित किया।

अल्मोड़ा, 23 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित जागेश्वर धाम (Jageshwar Dham Controversy) की मर्यादा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के जिलाधिकारी (DM) अविनाश सिंह के भ्रमण के दौरान उनके सुरक्षाकर्मी (गनर) के प्रतिबंधित कार्बाइन लेकर मंदिर के गर्भगृह में दाखिल होने की घटना सामने आई है। इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब गर्भगृह के भीतर हथियारबंद गनर की तस्वीरें सार्वजनिक हुईं।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित इस प्राचीन मंदिर परिसर में सुरक्षाकर्मियों का असलहा लेकर मुख्य गर्भगृह में प्रवेश करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। मंदिर के पुजारियों और स्थानीय लोगों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह न केवल मंदिर की धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध है, बल्कि सुरक्षा नियमों का भी खुला उल्लंघन है।

पुजारियों ने जताया कड़ा विरोध

मंदिर के पुजारी नवीन चंद्र भट्ट, मनोज भट्ट और मुकेश भट्ट सहित अन्य ने घटना पर रोष प्रकट करते हुए कहा कि जागेश्वर धाम में आस्था की अपनी परंपराएं हैं। पुजारियों के अनुसार, जब देश के प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री यहां दर्शन के लिए आते हैं, तो उनके गनर भी बाहर ही रुकते हैं। ऐसे में एक प्रशासनिक अधिकारी के सुरक्षाकर्मी का हथियार सहित बाबा के गर्भगृह में पहुंचना श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है।

डीएम ने दी सफाई और जताया अफसोस

मामला गरमाने के बाद बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह का पक्ष भी सामने आया है। उन्होंने घटनाक्रम पर खेद जताते हुए इसे ‘अनजाने में हुई चूक’ करार दिया है। डीएम के अनुसार, गनर को नियमों की जानकारी नहीं रही होगी, जिस कारण यह स्थिति पैदा हुई। हालांकि, स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि मंदिर में मोबाइल से फोटो लेने और रील्स बनाने के साथ-साथ हथियार लेकर प्रवेश करने पर वहां मौजूद कर्मचारियों ने रोक क्यों नहीं लगाई।

एएसआई ने उठाया सख्त कदम

इस विवाद के सामने आने के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सहायक वरिष्ठ संरक्षक नीरज मैठाणी ने मामले की पुष्टि की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जागेश्वर मंदिर के भीतर किसी भी प्रकार का हथियार ले जाना वर्जित है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मंदिर के प्रवेश द्वार पर तत्काल प्रभाव से चेतावनी बोर्ड लगा दिए गए हैं।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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