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Land Fraud in Uttarakhand : उत्तराखंड में भू-माफियाओं पर बड़ी चोट, गढ़वाल कमिश्नर ने 24 मामलों में दिए FIR के आदेश

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Sat, 02 May 2026 08:05 PM IST

गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की बैठक में 125 मामलों की समीक्षा करते हुए 24 गंभीर प्रकरणों में तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। जांच में बिना जमीन के रजिस्ट्री और खसरा नंबर बदलकर धोखाधड़ी करने जैसे चौंकाने वाले खेल सामने आए हैं।

Land Fraud in Uttarakhand : उत्तराखंड में भू-माफियाओं पर बड़ी चोट, गढ़वाल कमिश्नर ने 24 मामलों में दिए FIR के आदेश

मुख्य बातें

  • 125 मामलों की सुनवाई में 45 का निस्तारण, 24 पर पुलिस केस दर्ज करने के आदेश।
  • देहरादून से सबसे अधिक 74 लैंड फ्रॉड की शिकायतें समिति के सामने आईं।
  • खसरा हेरफेर और तारबाड़ कर अवैध कब्जे जैसे मामलों पर आयुक्त ने जताई कड़ी नाराजगी।

देहरादून, 02 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में जमीन की खरीद-फरोख्त में हो रही धोखाधड़ी और भू-माफियाओं के सिंडिकेट पर प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने शनिवार को लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की उच्चस्तरीय बैठक में 125 मामलों की गहन सुनवाई की। इस दौरान आयुक्त ने स्पष्ट रूप से 24 गंभीर धोखाधड़ी के मामलों में पुलिस को तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

बिना जमीन के रजिस्ट्री और खसरा नंबर का खेल

सर्वे चौक स्थित कैंप कार्यालय में हुई इस बैठक में कमिश्नर ने जांच के दौरान सामने आए तथ्यों पर हैरानी जताई। आयुक्त के अनुसार, जांच में ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ जमीन अस्तित्व में न होने के बावजूद उसकी रजिस्ट्री कर दी गई। कई प्रकरणों में दो बीघा जमीन को चार बीघा बताकर बेचा गया, तो कहीं खसरा नंबरों में हेरफेर कर निवेशकों को दूसरी जमीन थमा दी गई।

इन 24 एफआईआर योग्य मामलों में उदय सिंह, सुचेता सेमवाल, राजीव जायलवाल, गुलाब सिंह, किरन बागड़ी, अजय कुमार, संजीव गर्ग, मिथलेश सिंघल और जगदंबा रावत सहित कई अन्य से संबंधित शिकायतें शामिल हैं। इनमें से 13 मामले सीधे तौर पर जमीन को खुर्द-बुर्द करने और अवैध कब्जे से जुड़े हैं।

देहरादून से आईं सबसे ज्यादा शिकायतें

बैठक में लंबित 20 और 105 नए प्रार्थना पत्रों पर चर्चा हुई। क्षेत्रीय विवरण के अनुसार, लैंड फ्रॉड के सर्वाधिक 74 मामले देहरादून जनपद से आए हैं। इसके अलावा हरिद्वार के 15, पौड़ी के 13, टिहरी के 02 और चमोली का 01 प्रकरण शामिल रहा। गढ़वाल आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जिन मामलों में संयुक्त निरीक्षण की आवश्यकता है, उन्हें इसी सप्ताह पूरा कर रिपोर्ट सौंपी जाए।

45 मामलों का हुआ निस्तारण

कार्रवाई के साथ-साथ समिति ने 45 प्रकरणों का निपटारा भी किया। आयुक्त ने बताया कि कुछ मामलों में प्रशासनिक मध्यस्थता के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया और लेन-देन की धनराशि वापस करा दी गई। हालांकि, जो मामले पहले से सिविल न्यायालय में लंबित हैं या बेनामा निरस्तीकरण से संबंधित हैं, उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के लिए छोड़ दिया गया है।

अधिकारियों को 15 दिन का अल्टीमेटम

आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने बड़े भू-क्षेत्रों से जुड़े विवादों में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने संबंधित तहसीलदारों और एसडीएम को निर्देश दिए कि जिन मामलों में अवैध निर्माण सिद्ध हो चुका है, वहां 15 दिनों के भीतर ध्वस्तीकरण या प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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