देहरादून। पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध की तपिश अब देवभूमि के किचन तक पहुंच गई है, जिसके चलते प्रदेश में रसोई गैस किल्लत (LPG Shortage) की गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए देहरादून स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) में विशेषज्ञों और आला अधिकारियों की तत्काल तैनाती के निर्देश दिए हैं।
यह विशेष टीम प्रदेश भर में खाद्य पदार्थों और आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखेगी। शासन का मुख्य उद्देश्य जमाखोरी को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध के अंतरराष्ट्रीय संकट का असर आम नागरिक की थाली पर न पड़े।
प्रमुख शहरों में स्टॉक खत्म, पर्यटन कारोबार पर संकट
देहरादून, मसूरी और नैनीताल जैसे पर्यटन केंद्रों पर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों का स्टॉक लगभग समाप्त हो चुका है। होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों के सामने अपने प्रतिष्ठान बंद करने की नौबत आ गई है। आगामी पर्यटन सीजन से ठीक पहले आई इस किल्लत ने सरकार की पेशानी पर बल डाल दिए हैं, क्योंकि इससे राज्य की आर्थिकी प्रभावित होने का डर है।
स्थिति को देखते हुए धामी सरकार ने गैस वितरण के लिए एक ‘प्रायोरिटी लिस्ट’ जारी की है। इसके तहत ऋषिकेश एम्स समेत सभी बड़े अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और स्कूलों को पहली प्राथमिकता पर सिलेंडर दिए जा रहे हैं। घरेलू उपभोक्ताओं को परेशानी न हो, इसके लिए कमर्शियल सप्लाई पर कुछ सख्त पाबंदियां भी लागू की गई हैं।
वैकल्पिक ईंधन के तौर पर लकड़ी का सहारा

संकट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वन मंत्री सुबोध उनियाल ने वन विभाग को मुस्तैद रहने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि यदि गैस का संकट और अधिक गहराता है, तो व्यावसायिक गतिविधियों को चालू रखने के लिए वैकल्पिक ईंधन के रूप में डिपो से लकड़ी उपलब्ध कराई जाए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार मौजूद है और सरकार हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार है। आपातकालीन केंद्र में तैनात विशेषज्ञ अब रोजाना डेटा विश्लेषण कर सीधा मुख्यमंत्री कार्यालय को रिपोर्ट भेजेंगे।









