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पैसों की तंगी से नहीं रुकेगा मासूमों का इलाज, देहरादून जिला प्रशासन कराएगा बड़े अस्पतालों में सर्जरी

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Sat, 26 Sep 2026 03:49 PM IST

देहरादून में रेयर डिजीज से जूझ रहे 10 बच्चों के महंगे इलाज के लिए जिला प्रशासन ने 9.60 लाख रुपये जारी किए हैं। आरबीएसके के दायरे से बाहर आए इन मासूमों का इलाज अब नहीं रुकेगा।

DM Dehradun Financial Aid

मुख्य बातें

  • देहरादून जनपद में दुर्लभ बीमारियों से ग्रसित कुल 32 बच्चे चिन्हित।
  • आरबीएसके योजना से बाहर रहे 10 बच्चों के लिए 9.60 लाख रुपये जारी।
  • प्रेमनगर, डोईवाला, रायपुर, जोगीवाला समेत कई इलाकों के मासूमों की होगी सर्जरी।
  • पैसों की अतिरिक्त जरूरत पड़ने पर राइफल क्लब फंड से मिलेगी मदद।
  • रेफरल व कागजी कार्रवाई तय समय में निपटाने के सख्त आदेश।

दून हॉराइज़न, देहरादून (26 सितंबर) : जनपद में गंभीर और दुर्लभ बीमारियों (Rare Diseases) से जूझ रहे उन गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर है, जो भारी-भरकम अस्पताल खर्च उठाने में बेबस थे। जिला प्रशासन ने योजना के नियमों में अटके 10 मासूमों के इलाज के लिए सीएसआर मद से 9.60 लाख रुपये की आर्थिक मदद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को हस्तांतरित कर दी है।

32 बच्चे चिन्हित, 10 को खास प्रशासनिक मदद

भारत सरकार के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत देहरादून में अब तक कुल 32 बच्चों को गंभीर बीमारियों के साथ सूचीबद्ध किया गया। इनमें से 22 बच्चों का उपचार तो इस केंद्रीय योजना के स्थापित प्रोटोकॉल के तहत शुरू हो चुका था।

पेंच तब फंसा जब 10 बच्चे आरबीएसके के तय तकनीकी व प्रशासनिक मानदंडों में फिट नहीं बैठ पाए। योजना की तकनीकी सीमाओं के चलते इन बच्चों के जीवन रक्षक उपचार पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे थे। प्रशासन ने हाथ पर हाथ धरे बैठने के बजाय सीएसआर (Corporate Social Responsibility) फंड का रास्ता निकाला और तत्काल 9.60 लाख रुपये की राशि स्वीकृत कर स्वास्थ्य विभाग को सौंप दी।

इन इलाकों के बच्चों को मिलेगी नई जिंदगी

इलाज पाने वालों में प्रेमनगर के 10 वर्षीय उमेश, बैराज क्षेत्र की 13 वर्षीय आयशा, डोईवाला की 9 वर्षीय वंशिका, रायपुर के 2 वर्षीय अक्ष और मेहूवाला के 3 वर्षीय आरिस शामिल हैं। मांडूवाला के 15 वर्षीय बाबू व प्रदीप, इसी इलाके के 20 वर्षीय रंजीत, डोईवाला के 5 वर्षीय शमशाद तथा जोगीवाला निवासी 5 वर्षीय दिव्यांश को भी इस सूची में रखा गया है।

इनमें से अधिकांश बच्चों को जटिल सर्जरी के साथ-साथ लंबे समय तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की सख्त निगरानी की दरकार है। चूंकि दुर्लभ बीमारियों का इलाज प्रदेश के छोटे केंद्रों में संभव नहीं होता, इसलिए इन सभी मामलों को दिल्ली एम्स और पीजीआई चंडीगढ़ जैसे देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थानों में रेफर किया जा रहा है।

राइफल क्लब फंड से भी मिलेगी अतिरिक्त मदद

प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कागजी अड़चनों या वित्तीय सीमाओं के चलते किसी भी बच्चे की सांसों पर संकट नहीं आने दिया जाएगा। यदि 9.60 लाख रुपये और आरबीएसके के तय पैकेज के बाद भी दवाओं या इम्प्लांट्स के लिए अतिरिक्त बजट की जरूरत पड़ी, तो उसकी भरपाई सीधे देहरादून जिला राइफल क्लब फंड से की जाएगी। अमूमन यह फंड जिला स्तर पर प्रशासनिक विवेकाधिकार में रहता है, जिसे मानवीय आधार पर आपात चिकित्सा जरूरतों के लिए इस्तेमाल करने की नजीर देहरादून में पहले भी देखी गई है।

दस्तावेजी प्रक्रिया में लेटलतीफी को लेकर स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग को कड़े दिशा-निर्देश दिए गए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी और बाल विकास विभाग को आपसी तालमेल बनाकर हर बच्चे के मेडिकल अपडेट्स की साप्ताहिक ट्रैकिंग करने को कहा गया है।

अभियान यहीं नहीं थमेगा, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के जरिए ग्रामीण व मलिन बस्तियों में स्क्रीनिंग जारी रहेगी ताकि कोई भी पीड़ित बच्चा छूटने न पाए।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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