Mutual Fund SIP : भविष्य की वित्तीय सुरक्षा, बच्चों की उच्च शिक्षा या रिटायरमेंट प्लान के लिए हर महीने भारी-भरकम राशि जमा करना ही एकमात्र रास्ता नहीं है। सही समय पर छोटी रकम से शुरू की गई बचत भी लंबी अवधि में बड़ा कॉर्पस तैयार कर सकती है।
दिन का 100 रुपये बचाना आम तौर पर एक कप चाय, नाश्ते या छोटे-मोटे दैनिक खर्चों के बराबर होता है। अगर इसी 100 रुपये की रोजाना बचत को संभालकर हर महीने 3,000 रुपये के रूप में किसी इक्विटी म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए लगाया जाए, तो 25 साल के कार्यकाल में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड बन सकता है।
निवेशक जब 25 साल तक लगातार 3,000 रुपये प्रतिमाह का निवेश जारी रखता है, तो पूरे कार्यकाल में उसकी जेब से कुल 9 लाख रुपये ही जमा होते हैं।

यदि इस निवेश पर औसतन 15 प्रतिशत का सालाना चक्रवृद्धि (कंपाउंडिंग) रिटर्न हासिल होता है, तो 25 साल पूरे होने पर यह राशि लगभग 1.14 करोड़ रुपये का विशाल फंड बन जाती है।
यह पूरी प्रक्रिया चक्रवृद्धि ब्याज यानी कंपाउंडिंग के सिद्धांत पर काम करती है। कंपाउंडिंग में निवेशक को सिर्फ उसके द्वारा जमा किए गए मूलधन पर ही फायदा नहीं मिलता, बल्कि हर साल अर्जित होने वाले रिटर्न पर भी आगे रिटर्न बनता चला जाता है।
कम उम्र में निवेश की शुरुआत करना बड़े फंड निर्माण की सबसे पहली शर्त मानी जाती है। जो व्यक्ति जितनी जल्दी बचत शुरू करता है, उसके पैसे को बाजार में बने रहने और कंपाउंडिंग का लाभ उठाने के लिए उतना ही अधिक समय मिल जाता है।
बाजार विशेषज्ञों और वित्तीय विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि अधिक पैसा लगाने की तुलना में जल्दी निवेश शुरू करना कहीं ज्यादा फायदेमंद साबित होता है। 25 से 30 साल की लंबी अवधि के दौरान बाजार के उतार-चढ़ाव स्वतः व्यवस्थित हो जाते हैं और औसत रिटर्न बेहतर निकलकर आता है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार से जुड़े तमाम निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन होते हैं। इसमें किसी भी तरह के निश्चित रिटर्न की गारंटी नहीं होती है, वास्तविक रिटर्न तत्कालीन बाजार की परिस्थितियों और फंड के प्रदर्शन पर पूरी तरह निर्भर करता है।











