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बदल गई ओडिशा की आरक्षण व्यवस्था, जानें अब आपके वर्ग को मिलेंगी कितनी सीटें

ओडिशा की भाजपा सरकार ने राज्य के मेडिकल, इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थानों में अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की सीमा में भारी बढ़ोतरी कर दी है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की कैबिनेट ने सामाजिक न्याय का हवाला देते हुए SEBC वर्ग को पहली बार तकनीकी शिक्षा के दायरे में आरक्षण प्रदान किया है।

Published On: April 5, 2026 1:00 PM
बदल गई ओडिशा की आरक्षण व्यवस्था, जानें अब आपके वर्ग को मिलेंगी कितनी सीटें

HIGHLIGHTS

  • ST कोटा 12% से बढ़ाकर 22.50% और SC कोटा 8% से बढ़ाकर 16.25% किया गया।
  • तकनीकी शिक्षा में SEBC (पिछड़ा वर्ग) को पहली बार मिला 11.25% आरक्षण।
  • मेडिकल की 2,421 और इंजीनियरिंग की 44,579 सीटों पर सीधा असर पड़ेगा।

भुवनेश्वर, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। ओडिशा की मोहन चरण माझी सरकार ने शनिवार देर रात एक कैबिनेट बैठक में राज्य की दशकों पुरानी आरक्षण व्यवस्था को जड़ से बदल दिया है। सरकार ने राज्य के प्रतिष्ठित मेडिकल, इंजीनियरिंग और उच्च तकनीकी संस्थानों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग (SEBC) के लिए सीटों के कोटे में भारी इजाफा करने का फैसला लिया है।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए साफ किया कि यह कदम इन समुदायों की आबादी के अनुपात में उन्हें अधिकार देने और वास्तविक सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में उठाया गया है। खास बात यह है कि तकनीकी शिक्षा के इतिहास में पहली बार राज्य के पिछड़ा वर्ग (SEBC) के छात्रों के लिए आरक्षण का रास्ता साफ हुआ है।

कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए नए नियमों के तहत अब अनुसूचित जनजाति (ST) का आरक्षण 12% से बढ़कर सीधा 22.50% हो गया है। वहीं अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों को मिलने वाला कोटा भी 8% से बढ़ाकर 16.25% कर दिया गया है। राज्य की बड़ी आबादी वाले SEBC वर्ग के लिए 11.25% सीटें रिजर्व की गई हैं, जो अब तक शून्य थीं। दिलचस्प तथ्य यह है कि सरकार ने इन सभी बदलावों को इस तरह से सेट किया है कि कुल आरक्षण 50% की कानूनी लक्ष्मण रेखा को पार न करे।

इस नीतिगत बदलाव का सबसे बड़ा और सीधा प्रभाव राज्य के मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों की सीटों पर दिखेगा। ओडिशा में वर्तमान में यूजी और पीजी मिलाकर कुल 2,421 मेडिकल सीटें हैं। नई व्यवस्था के तहत एसटी छात्रों की सीटें 290 से बढ़कर 545 और एससी छात्रों की सीटें 193 से बढ़कर 393 हो जाएंगी, जबकि SEBC के लिए 272 सीटें सुरक्षित रहेंगी।

इंजीनियरिंग के क्षेत्र में, जहां राज्य में कुल 44,579 सीटें उपलब्ध हैं, वहां भी आंकड़ों में बड़ा उछाल आया है। एसटी समुदाय को अब 5,349 की जगह 10,030 सीटें मिलेंगी। एससी समुदाय का हिस्सा 3,566 से बढ़कर 7,244 सीटों पर पहुंच गया है, वहीं SEBC के खाते में अब 5,015 सीटें जाएंगी।

यह नई आरक्षण नीति केवल मेडिकल और इंजीनियरिंग तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि यह नियम राज्य के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों, उनसे संबद्ध कॉलेजों, आईटीआई (ITIs) और पॉलिटेक्निक संस्थानों पर भी लागू होगा। इसके दायरे में मेडिसिन, सर्जरी, डेंटल, नर्सिंग, फार्मेसी, आर्किटेक्चर, मैनेजमेंट और कंप्यूटर एप्लीकेशन (MCA) जैसे कोर्स शामिल हैं। इसके अलावा, पशु चिकित्सा, आयुर्वेद, होम्योपैथी और कृषि विज्ञान के पाठ्यक्रमों में भी यही कोटा लागू रहेगा।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पिछली बीजू जनता दल (BJD) सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि दशकों तक दलितों और आदिवासियों को उनकी आबादी के मुकाबले काफी कम प्रतिनिधित्व दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों की उदासीनता के कारण इन समुदायों के युवाओं का विकास रुका हुआ था।

राज्य के राजनीतिक जानकारों का मानना है कि SEBC को पहली बार तकनीकी आरक्षण देकर भाजपा ने राज्य के एक विशाल वोट बैंक को सीधे अपनी ओर खींचने का प्रयास किया है, जो आने वाले चुनावों में गेमचेंजर साबित हो सकता है।


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Amit Gawri

अमित गावरी 'दून हॉराइज़न' में राष्ट्रीय समाचार लेखक के रूप में देश भर की ब्रेकिंग न्यूज़ और महत्वपूर्ण घटनाओं को प्रमुखता से कवर करते हैं। चुनाव, सरकारी योजनाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर उनकी खास विशेषज्ञता है। अमित हमेशा तथ्यों की गहराई में जाकर रिपोर्टिंग करते हैं, ताकि पाठकों को किसी भी खबर का हर पहलू स्पष्ट रूप से समझ आ सके। क्लिकबेट से दूर रहकर, वे अपनी खबरों में सटीकता और विश्वसनीयता (Trust) बनाए रखते हैं। उनका जर्नलिस्टिक अप्रोच हमेशा जनसरोकार और सटीक सूचना देने पर ही केंद्रित रहता है।

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