नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री लाइफलाइन ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को युद्ध के मैदान में बदल दिया है। पूर्व विदेश मंत्री और सांसद शशि थरूर ने साफ कर दिया है कि अगर भारत इस जलमार्ग को खुलवाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सैन्य आह्वान का हिस्सा बनता है, तो इसे सीधे तौर पर ‘एक्ट ऑफ वॉर’ (युद्ध की कार्रवाई) माना जाएगा।
थरूर ने तर्क दिया कि भारत की ईरान के साथ युद्ध में कोई दिलचस्पी नहीं है और यही कारण है कि दुनिया के अधिकांश देशों ने ट्रंप के इस प्रस्ताव से दूरी बना रखी है। उन्होंने रेखांकित किया कि होर्मुज को सुरक्षित करने के नाम पर सैन्य हस्तक्षेप करना क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा सकता है।
भारत की 3.2 लाख टन LPG फंसी
इस कूटनीतिक रस्साकशी के बीच भारत के लिए जमीन पर स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, होर्मुज मार्ग बाधित होने से भारत की लगभग 3.2 लाख टन एलपीजी की आपूर्ति समुद्र में फंसी हुई है। वर्तमान में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज (Indian-flagged vessels) इस क्षेत्र में फंसे हैं, जो कच्चे तेल और गैस की महत्वपूर्ण खेप लेकर आ रहे थे।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, भारत अपनी कुल एलपीजी खपत का 60 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें से 90 प्रतिशत हिस्सा इसी होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इस नाकेबंदी ने घरेलू बाजार में घबराहट पैदा कर दी है, जिससे 13 मार्च को बुकिंग का आंकड़ा रिकॉर्ड 87.7 लाख सिलेंडर तक पहुंच गया था।
ट्रंप की नाटो को फटकार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मिशन में सहयोग न करने पर अपने नाटो सहयोगियों, विशेषकर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की कड़ी आलोचना की है। ट्रंप ने इसे ‘वन-वे स्ट्रीट’ करार देते हुए कहा कि जो देश खाड़ी के तेल पर निर्भर हैं, उन्हें इस रास्ते की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठानी चाहिए। हालांकि, अब तक कोई भी प्रमुख शक्ति सीधे तौर पर इस सैन्य मोर्चे पर अमेरिका के साथ खड़ी नहीं हुई है।
भारत सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए घरेलू उत्पादन में 40 प्रतिशत की वृद्धि की है। पेट्रोलियम सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, हालांकि स्थिति अभी भी चिंताजनक है, लेकिन किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर के पास स्टॉक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। फिलहाल कमर्शियल उपभोक्ताओं को उनकी जरूरत का केवल 20 प्रतिशत हिस्सा ही दिया जा रहा है ताकि घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति बनी रहे।









