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पेड़ से लटकाने की धमकी मिली तो सीधे पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने मामले में लिया यह फैसला।

यूपी और बिहार के एक प्रेमी जोड़े ने सोशल मीडिया रील्स से प्रभावित होकर सुरक्षा के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिन्हें अदालत ने उचित प्रक्रिया के तहत हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया है। ऑनर किलिंग के डर से भागे इस जोड़े को दिल्ली पुलिस द्वारा कथित तौर पर हिरासत में लेने की कोशिश के बाद वकीलों ने शीर्ष अदालत में पेश किया था।

पेड़ से लटकाने की धमकी मिली तो सीधे पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने मामले में लिया यह फैसला।

HIGHLIGHTS

  • सोशल मीडिया पर 'सुप्रीम कोर्ट में शादी और सीजेआई से मुलाकात' की रील देखकर दिल्ली पहुंचा था जोड़ा।
  • लड़की बिहार और लड़का उत्तर प्रदेश का निवासी है, जिन्हें परिजनों से जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं।
  • सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने अनुच्छेद 226 के तहत सुरक्षा के लिए संबंधित हाई कोर्ट जाने की सलाह दी।

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली भ्रामक सूचनाएं और ‘रील्स’ किस कदर युवाओं को जमीनी हकीकत से दूर कर रही हैं, इसका एक हैरान करने वाला मामला देश की सबसे बड़ी अदालत में सामने आया है। उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले एक प्रेमी जोड़े ने ऑनर किलिंग के डर से भागकर सीधे सुप्रीम कोर्ट की शरण ली, क्योंकि उन्होंने एक रील में देखा था कि यहां शादियां कराई जाती हैं और सीजेआई के घर पर सुरक्षा मिलती है।

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच के सामने वकील हरविंदर चौधरी ने इस मामले को रखा। वकील को यह जोड़ा सुप्रीम कोर्ट की पार्किंग में बदहवास हालत में मिला था। सुनवाई के दौरान पता चला कि लड़की बिहार की है और लड़का यूपी का, जिन्हें उनके परिवारों से लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं।

अदालत को बताया गया कि लड़की के परिजनों ने उसे मारकर पेड़ से लटका देने की धमकी दी थी। सुरक्षा की तलाश में जब यह जोड़ा दिल्ली के तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचा, तो वहां मदद के बजाय पुलिस ने कथित तौर पर उन्हें हिरासत में लेने का प्रयास किया। वकील हरविंदर चौधरी ने कोर्ट में नाराजगी जताते हुए कहा कि पुलिस का रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना था और उन्हें खुद को हिरासत में देने की पेशकश करनी पड़ी ताकि लड़की को अकेला न छोड़ा जाए।

बेंच ने जब जोड़े के दिल्ली आने का कारण पूछा, तो वकील ने ‘सोशल मीडिया रील्स’ के प्रभाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को लग रहा है कि सुप्रीम कोर्ट सीधे तौर पर शादियां कराता है। इस पर सीजेआई ने हैरानी जताते हुए इसे एक अजीब प्रवृत्ति करार दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा और राहत के लिए कानून की एक तय प्रक्रिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मामले में त्वरित राहत देने से इनकार कर दिया है। बेंच ने जोड़े को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत संबंधित हाई कोर्ट में याचिका दायर करने का निर्देश दिया है। अदालत ने साफ किया कि इस तरह के मामलों में पहले उच्च न्यायालय का रुख करना अनिवार्य है।


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Shailendra Pokhriyal

शैलेन्द्र पोखरियाल 'दून हॉराइज़न' में वरिष्ठ राष्ट्रीय संवाददाता के तौर पर देश की सियासत और प्रमुख राष्ट्रीय घटनाओं को कवर करते हैं। केंद्र सरकार की नीतियों, संसद के सत्रों और बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर उनकी गहरी पकड़ है। शैलेन्द्र का उद्देश्य राजनीतिक बयानों और सरकारी फैसलों के पीछे की असली सच्चाई को निष्पक्ष रूप से पाठकों के सामने रखना है। उनका लंबा पत्रकारीय अनुभव उन्हें जटिल राष्ट्रीय मुद्दों का आसान हिंदी में विश्लेषण करने में मदद करता है। वे पूरी तरह से शोध-आधारित (Fact-checked) और जनहित से जुड़ी बेबाक पत्रकारिता करने के लिए जाने जाते हैं।

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