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पलायन रोकने का नया प्लान, स्थानीय युवाओं को प्लंबर-इलेक्ट्रिशियन बनने की ट्रेनिंग देगी सरकार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 'श्रमिक सेवा' मोबाइल ऐप लॉन्च कर श्रमिकों के लिए सरकारी सुविधाओं को डिजिटल बनाया है। साथ ही, डीबीटी के माध्यम से 8005 श्रमिकों के खातों में सीधे 17.25 करोड़ रुपये की धनराशि हस्तांतरित की गई।

पलायन रोकने का नया प्लान: स्थानीय युवाओं को प्लंबर-इलेक्ट्रिशियन बनने की ट्रेनिंग देगी सरकार

HIGHLIGHTS

  • पारदर्शिता पर जोर: ऑफलाइन अनुदान वितरण पूरी तरह बंद, अब सारा पैसा सीधे खातों (DBT) में जाएगा।
  • स्किल डेवलपमेंट: पलायन रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर प्लंबर, मिस्त्री और कारपेंटर जैसे कार्यों का प्रशिक्षण।
  • विदेश में रोजगार: बोर्ड अब भारत सरकार की एजेंसियों के जरिए श्रमिकों को विदेश में नौकरी दिलाने में मदद करेगा।

देहरादून, 10 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को राज्य के श्रमिकों के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘श्रमिक सेवा’ मोबाइल ऐप का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के माध्यम से 8005 पंजीकृत श्रमिकों के बैंक खातों में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के जरिए 17.25 करोड़ रुपये की सहायता राशि भी भेजी।

6 महीने में 47 करोड़ का वितरण

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए ऑफलाइन अनुदान वितरण की व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। अब सभी लाभार्थियों को ऑनलाइन निस्तारण के बाद सीधे उनके खातों में पैसा दिया जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह महीनों में बोर्ड ने कुल 19,833 लाभार्थियों को 47.14 करोड़ रुपये की राशि वितरित की है।

पलायन रोकने के लिए कौशल प्रशिक्षण

पर्वतीय क्षेत्रों से होने वाले पलायन पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रमिकों और उनके आश्रितों को स्थानीय जरूरतों के हिसाब से प्रशिक्षित किया जाए। उन्होंने कहा कि युवाओं को प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, मिस्त्री और कारपेंटर जैसे ट्रेड में विशेषज्ञ बनाया जाए ताकि वे अपने ही क्षेत्र में रोजगार पा सकें। इसके अलावा, आगामी सत्र से श्रमिकों के बच्चों को योग और वेलनेस क्षेत्र में निशुल्क प्रशिक्षण देने की योजना पर भी मुहर लगाई गई है।

विदेशों में नौकरी के खुलेंगे द्वार

मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्देश देते हुए कहा कि निर्माण श्रमिकों और उनके आश्रितों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण देकर विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएं। इसके लिए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में पंजीकृत एजेंसियों के साथ समन्वय करने को कहा गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि श्रमिकों का स्वास्थ्य परीक्षण उनके कार्यस्थल पर ही किया जाए ताकि उनकी दिहाड़ी खराब न हो।

डिजिटल निगरानी और सेस संग्रह

श्रमायुक्त पीसी दुम्का ने बताया कि ‘UKLCCMS’ पोर्टल पर अब तक 16,000 से अधिक संस्थानों का पंजीकरण हो चुका है। बोर्ड के पास वर्तमान में सेस (Cess) के रूप में 324 करोड़ रुपये की राशि जमा है, जिसका उपयोग केवल श्रमिक कल्याण के लिए किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि सामग्री वितरण में धांधली रोकने के लिए अब जियो-टैगिंग और लाइव फोटो की अनिवार्य व्यवस्था की जा रही है।

लाभार्थी और बजट विवरण 

उत्तरखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की पारदर्शी कार्यप्रणाली के चलते श्रमिकों के कल्याण हेतु बजट का सीधा लाभ उन तक पहुँच रहा है। इसी क्रम में, आज आयोजित कार्यक्रम में 8,005 श्रमिकों को मुख्यधारा से जोड़ते हुए कुल 17.25 करोड़ रुपये की धनराशि सीधे उनके खातों में हस्तांतरित की गई। अगर पिछले छह महीनों के आंकड़ों पर गौर करें, तो बोर्ड अब तक कुल 47.14 करोड़ रुपये की सहायता राशि वितरित कर चुका है।

वित्तीय सुदृढ़ता के मामले में बोर्ड के पास वर्तमान में 324 करोड़ रुपये का कुल सेस (Cess) उपलब्ध है, जो भविष्य की कल्याणकारी योजनाओं के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, बोर्ड की डिजिटल पहुँच का विस्तार भी तेजी से हो रहा है, जिसके तहत अब तक पोर्टल पर 16,000 से अधिक संस्थान पंजीकृत किए जा चुके हैं, जिससे श्रमिकों के पंजीकरण और लाभ वितरण की प्रक्रिया और अधिक सुगम हो गई है।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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