देहरादून, 9 जून 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में मतदाता सूची की खामियां दूर करने के लिए निर्वाचन आयोग ने सख्त रवैया अपना लिया है। सोमवार से प्रदेशभर में शुरू हुए ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) अभियान के तहत अगर किसी मतदाता का नाम 2003 की मूल सूची से थोड़ा भी अलग पाया गया, तो उसे सीधा नोटिस भेजा जाएगा। नोटिस का जवाब न देने या सही दस्तावेज पेश न कर पाने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया जाएगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि इस बार नाम या उम्र में सुधार की प्रक्रिया आसान नहीं होगी। बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को मौके पर नाम सुधारने का अधिकार नहीं दिया गया है। अगर डेटाबेस में कोई भी विसंगति मिलती है, तो निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) की तरफ से मतदाता को नोटिस जारी होगा। इसके बाद व्यक्ति को खुद एसडीएम कार्यालय जाकर दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रखना होगा।
इन स्थितियों में आयोग जारी करेगा नोटिस:

- 2003 और वर्तमान सूची में मतदाता या परिजनों के नाम की स्पेलिंग में अंतर होना।
- पुराने नाम में नया शब्द जुड़ना (जैसे- शिव रौतेला की जगह अब शिव शंकर रौतेला लिखना)।
- एक ही व्यक्ति (मकान मालिक या अभिभावक) के नाम पर छह अलग-अलग मतदाताओं का संबद्ध होना।
- पिता और संतान की उम्र में 15 वर्ष या उससे कम, अथवा 50 वर्ष से अधिक का अंतर होना।
- दादा और पोते की उम्र में 40 वर्ष से कम का अंतर होना।
- दो भाइयों या भाई-बहनों की उम्र में 9 महीने से कम का अंतर पाया जाना।
अभियान के पहले दिन प्रदेशभर में बीएलओ ने घर-घर जाकर गणना प्रपत्र बांटे। सोमवार शाम चार बजे तक 2,55,269 फार्म का वितरण किया गया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम, सचिव निर्वाचन दिलीप जावलकर और अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने भी अपना गणना फार्म भरकर बीएलओ को सौंपा।
डॉ. पुरुषोत्तम ने मतदाताओं से अपील की है कि वे बीएलओ को अपना नया पासपोर्ट साइज फोटो उपलब्ध कराएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि 8 जून से 7 जुलाई तक चलने वाले इस डोर-टू-डोर सर्वे में फिलहाल कोई अन्य दस्तावेज जमा नहीं करना है।
आशा कार्यकर्ताओं का बहिष्कार और तकनीकी दिक्कतें
एक तरफ प्रशासन अभियान को सफल बनाने में जुटा है, वहीं जमीनी स्तर पर कई चुनौतियां सामने आ रही हैं। देहरादून में स्वास्थ्य विभाग की 1400 आशा कार्यकर्ताओं ने इस सत्यापन और राशन कार्ड सर्वे का बहिष्कार कर दिया है।
आशा स्वास्थ्य कार्यकत्री यूनियन की अध्यक्ष शिवा दूबे ने बताया कि उन पर पहले ही डेंगू सर्वे और 28 जून से शुरू हो रहे पोलियो अभियान की जिम्मेदारी है। यूनियन का आरोप है कि पिछले डेंगू सर्वे का तीन हजार रुपये बकाया भी अब तक नहीं मिला है, ऐसे में अतिरिक्त कार्य करना संभव नहीं है।
इसके अलावा तकनीकी दिक्कतें भी अभियान की रफ्तार को प्रभावित कर रही हैं। हरिद्वार के कुछ वार्डों में मतदाताओं की संख्या के मुकाबले विसंगतियों का प्रतिशत ज्यादा होने से बीएलओ असमंजस में हैं। वहीं, पौड़ी जैसे पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में खराब नेटवर्क के कारण ऑनलाइन काम धीमी गति से हो रहा है। कई जगह मतदाताओं के पास फोटो या जरूरी जानकारी न होने से भी बीएलओ को अतिरिक्त समय लग रहा है।









