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बूंद-बूंद पानी को तरसेगा पाकिस्तान, भारत ने साफ कहा- खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Ansh Goyal Updated Thu, 01 Oct 2026 01:55 PM IST

सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty) के निलंबन पर पाकिस्तान फिर बिलबिलाया है। नई दिल्ली ने साफ चेताया कि सीमा पार आतंकी कारतूसों और नदी के पानी का एक साथ बहना नामुमकिन है।

Indus Waters Treaty dispute

मुख्य बातें

  • पाक सूचना मंत्री तरार ने जल संधि को कानूनी रूप से बाध्यकारी बताया।
  • पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने समझौता रोका था।
  • 26 निर्दोषों की जान जाने के बाद नई दिल्ली ने कड़ा रुख अपनाया।
  • हेग स्थित तथाकथित मध्यस्थता अदालत की वैधता को भारत ने सिरे से नकारा।
  • विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तानी प्रचार की धज्जियां उड़ाईं।

दून हॉराइज़न, नई दिल्ली (1 अक्टूबर) : नई दिल्ली की सख्त कूटनीतिक और सामरिक घेराबंदी के आगे अब इस्लामाबाद के तेवर पानी मांगते नजर आ रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण हमले के बाद केंद्र सरकार ने जब से ऐतिहासिक सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) की फाइल को अनिश्चितकाल के लिए ठंडे बस्ते में डाला है, पड़ोसी मुल्क वैश्विक मंचों पर लगातार दुहाई दे रहा है।

बुधवार को पाक के संघीय सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने एक बार फिर राग अलापते हुए इसे एकतरफा फैसला करार दिया। हालांकि, साउथ ब्लॉक की तरफ से यह पैगाम पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि जब तक सीमा पार की आतंकी नर्सरियां धू-धू कर जलती नहीं, तब तक भारत के हिस्से से दरिया का एक कतरा भी बहाने की इजाजत नहीं मिलेगी।

कानूनी बाध्यता का रोना और 24 करोड़ जनता की दुहाई

इस्लामाबाद में आयोजित एक जलसे में पाकिस्तानी सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने तर्क दिया कि विश्व बैंक की मध्यस्थता वाली यह संधि अपरिवर्तनीय है। उन्होंने दावा किया कि किसी भी देश को द्विपक्षीय मसौदे से मनमाने ढंग से हाथ खींचने का अधिकार नहीं है। तरार ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि नई दिल्ली के इस कदम के अंतरराष्ट्रीय नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं।

लगे हाथ 24 करोड़ आवाम के बुनियादी हक की बात करते हुए उन्होंने भारत पर पानी को सामरिक औजार बनाने का आरोप भी मढ़ दिया। लेकिन असल पेंच यह है कि दशकों तक भारत की उदारता का नाजायज फायदा उठाने वाला पाकिस्तान अब जमीनी सच स्वीकार करने को तैयार नहीं दिख रहा।

पहलगाम हमले का खूनी हिसाब और ‘ऑपरेशन सिंदूर’

यह कड़वाहट अचानक पैदा नहीं हुई। कश्मीर की बैसरन घाटी में जब पाकिस्तानी समर्थित आतंकवादियों ने 26 निहत्थे नागरिकों का कत्लेआम किया, तब सीमा के इस पार सहनशीलता का बांध टूट गया। भारतीय सेना ने सीमा पार ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत हमलावर अड्डों पर मिसाइलों और सटीक हमलों से 100 से अधिक आतंकियों को ढेर कर दिया। उसी वक्त प्रधानमंत्री स्तर पर स्पष्ट नीतिगत फैसला हुआ कि खून और पानी की धाराएं साथ-साथ नहीं बह सकतीं।

नतीजतन, पूर्वी नदियों (रावी, व्यास और सतलुज) के साथ-साथ पश्चिमी दरियाओं (सिंधु, झेलम और चेनाब) पर प्रस्तावित जल प्रवाह के नियमित तकनीकी विनिमय को फौरन रोक दिया गया।

1960 में कराची में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान के बीच दस्तखत किए गए इस समझौते के तहत रावी, ब्यास और सतलुज का पानी भारत के अनन्य नियंत्रण में आया था, जबकि पश्चिमी नदियों का बहाव पाकिस्तान को सौंपा गया था। हालांकि भारत को उन पर गैर-उपभोग्य जलविद्युत परियोजनाएं (Run-of-the-river projects) बनाने का अधिकार था, जिसे लेकर पाकिस्तान हमेशा टांग अड़ाता रहा।

तथाकथित मध्यस्थता अदालत का ढोंग बेनकाब

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहानुभूति बटोरने की खातिर शहबाज शरीफ सरकार ने हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता अदालत (Permanent Court of Arbitration) के नाम पर एकतरफा दस्तावेज लहराए थे। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस चालबाजी की हवा निकालते हुए कहा कि किसी अवैध ढांचे के फैसले को भारत पर थोपा नहीं जा सकता।

जायसवाल ने स्पष्ट किया कि तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना पड़ोसी तंत्र की पुरानी फितरत बन चुका है। भारत ने सुरक्षा परिषद को भेजे गए पाकिस्तानी पत्रों को भी खारिज करते हुए दोहराया है कि आतंकवाद का समर्थन और सद्भावना संधियां दोनों एक पटरी पर कभी नहीं चल सकते।

Ansh Goyal

अंश गोयल 'दून हॉराइज़न' में अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ (International Desk) की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वैश्विक राजनीति, युद्ध के हालात, कूटनीति (Diplomacy) और ग्लोबल इकॉनमी पर उनकी गहरी पकड़ है। अंश का मुख्य फोकस अमेरिका, रूस, मध्य पूर्व और पड़ोसी देशों की हलचल का भारतीय दृष्टिकोण से सटीक विश्लेषण करना है। विदेशी मंचों पर भारत के बढ़ते दबदबे और वैश्विक नीतियों का आम आदमी पर पड़ने वाले प्रभाव को वे बेहद सरल हिंदी में समझाते हैं। उनकी डीप-रिसर्च वाली रिपोर्टिंग पाठकों को दुनिया भर की विश्वसनीय खबरें प्रदान करती है।

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