वाशिंगटन/तेहरान, 03 अगस्त, 2026 (दून हॉराइज़न)।
Trump Iran War Diplomacy : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ एक व्यापक और बेहद गंभीर सैन्य कार्रवाई को फिलहाल स्थगित करने की घोषणा कर दी है। वाशिंगटन ने इस निर्णय को मध्य पूर्व क्षेत्र में शांति बहाल करने और तनाव को कम करने की दिशा में उठाया गया कूटनीतिक कदम बताया है।
ईरान की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद तल्ख और तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के अर्ध-सरकारी मीडिया संस्थानों ने वाशिंगटन के इस रुख को अमेरिका की रणनीतिक विफलता और कमजोरी के रूप में रेखांकित किया है।
ईरानी समाचार एजेंसी फार्स ने अपनी ताजा रिपोर्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति के इस अचानक बदले रुख पर सीधा तंज कसते हुए टिप्पणी की कि परिस्थितियों के दबाव के आगे वाशिंगटन का सारा दम निकल गया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका इस समय बड़े पैमाने पर सैन्य संघर्ष झेलने की स्थिति में नहीं था, जिसके चलते उसे कूटनीति की शरण लेनी पड़ी।
डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दिए अपने आधिकारिक बयान में यह स्पष्ट किया कि ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई की रूपरेखा पूरी तरह तैयार कर ली गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर यह सैन्य हमला होता, तो यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे विशाल और विनाशकारी सैन्य अभियान साबित हो सकता था।
अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार, यह फैसला उन्होंने अपने खाड़ी सहयोगियों के सीधे अनुरोध के बाद लिया है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे प्रमुख क्षेत्रीय देशों ने वाशिंगटन से संपर्क कर युद्ध के स्थान पर सीधी वार्ता का मार्ग चुनने का आग्रह किया था।

ट्रंप ने बताया कि उन्होंने इस नाजुक स्थिति पर सऊदी अरब के शीर्ष नेतृत्व से विस्तृत बातचीत की थी। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की सर्वसम्मत राय थी कि यदि यह संघर्ष छिड़ता है, तो इसके गंभीर और अप्रत्याशित मानवीय व आर्थिक परिणाम पूरे खाड़ी क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लेंगे।
अमेरिकी प्रशासन ने तर्क दिया है कि इस समय सैन्य हमलों को रोकने का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच परमाणु मुद्दों पर ठप पड़ी बातचीत को पुनः पटरी पर लाना है। वाशिंगटन का दावा है कि कूटनीतिक रास्ते खोलकर वह क्षेत्रीय स्थिरता को स्थायी रूप देने की कोशिश कर रहा है।
तेहरान ने अमेरिका के इन तमाम कूटनीतिक दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकारी मीडिया और आधिकारिक बयानों के जरिए ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसने अमेरिका से हमले रोकने या किसी समझौते के लिए कोई याचना या पहल नहीं की थी।
ईरानी रक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिकारों ने स्पष्ट किया है कि वे अमेरिकी घोषणाओं पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं कर सकते। अतीत में भी अमेरिका द्वारा सैन्य कार्रवाई रोकने के दावों के बाद अचानक परिस्थितियां बिगड़ने के कई उदाहरण मौजूद हैं।
तेहरान ने अपनी सभी थल, नभ और जल सीमाओं पर सैन्य तैयारियों को पूरी तरह मुस्तैद रखा है। ईरानी सशस्त्र बलों को किसी भी संभावित आपात स्थिति या अचानक होने वाले अमेरिकी-इज़राइली दुस्साहस का माकूल जवाब देने के लिए हाई अलर्ट पर रखा गया है।












