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PoK Election Violence : PoK विधानसभा चुनाव में भारी हिंसा, कोटली में मतदान करना पड़ा रद्द

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के दौरान बड़े पैमाने पर चुनावी हिंसा और पत्थरबाजी देखने को मिली है। मुज़फ़्फ़राबाद में भड़की हिंसा और सुरक्षा बलों की गोलीबारी के बाद स्थिति बिगड़ने पर कोटली में मतदान पूरी तरह से रद्द कर दिया गया।

Published On: August 3, 2026 3:04 PM
PoK Election Violence : PoK विधानसभा चुनाव में भारी हिंसा, कोटली में मतदान करना पड़ा रद्द

HIGHLIGHTS

  • PoK में 2 अगस्त को चुनाव के दौरान जमकर हिंसा हुई
  • कोटली में पोलिंग टीम और सामग्री न पहुंचने से वोटिंग रद्द
  • मुज़फ़्फ़राबाद में सुरक्षाबलों की फायरिंग से 3 लोगों की मौत
  • पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने चुनाव में धांधली के आरोप लगाए

मुज़फ़्फ़राबाद, 03 अगस्त, 2026 (दून हॉराइज़न)।

PoK Election Violence : पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में 2 अगस्त को आयोजित विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के दौरान सुरक्षा के तमाम दावों की धज्जियां उड़ गईं। मुज़फ़्फ़राबाद सहित कई इलाकों में पोलिंग के दौरान बड़े पैमाने पर बवाल, पथराव और आगजनी दर्ज की गई है। उपद्रव के कारण इलाके में सामान्य जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया।

मुज़फ़्फ़राबाद में भड़की हिंसक झड़पों और मुख्य रास्तों पर की गई नाकेबंदी के कारण कोटली जिले में चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह ठप्प पड़ गई। स्थिति इतनी खराब हो चुकी थी कि मतदान अधिकारी और चुनाव सामग्री समय पर कोटली केंद्रों तक पहुंच ही नहीं सके। प्रशासनिक विफलता और बिगड़े माहौल को देखते हुए अधिकारियों को कोटली में मतदान प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करने का फैसला लेना पड़ा।

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी नेतृत्व ने आरोप लगाया है कि इस चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली को अंजाम दिया गया है। सरकारी तंत्र के बल पर वोटिंग के नतीजों को प्रभावित करने की कोशिशें की जा रही हैं।

शनिवार को मुज़फ़्फ़राबाद की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच सीधी भिड़ंत देखने को मिली। देखते ही देखते पूरा इलाका युद्धक्षेत्र में तब्दील हो गया। सड़कों पर जगह-जगह पत्थर बिखरे पड़े थे और कई जले हुए वाहन धुएं का गुबार छोड़ रहे थे।

तनावपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए इलाके में भारी संख्या में अतिरिक्त पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। स्थानीय नागरिक खुले तौर पर इस चुनावी प्रक्रिया का बहिष्कार करने की अपील कर रहे हैं। मुज़फ़्फ़राबाद में सुरक्षाबलों द्वारा की गई सीधी गोलीबारी के बाद स्थानीय आबादी का गुस्सा चरम पर पहुंच गया है।

ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, कई प्रत्यक्षदर्शियों ने सुरक्षाकर्मियों को निहत्थे नागरिकों पर सीधी गोलियां बरसाते देखा। इस अंधाधुंध फायरिंग में करीब 7 से 8 नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए। गोलीबारी की इस घटना में 3 लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

हिंसा के खौफनाक मंज़र को देखकर बड़ी संख्या में मतदाताओं ने पोलिंग बूथ पर जाने से साफ इनकार कर दिया। पहली बार अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने जा रहे एक युवा ने बताया कि सड़कों पर जारी खून-खराबे और गोलियों की आवाजें सुनकर उसने वोट न डालने का फैसला किया है।

एक चश्मदीद ने घटना का ब्योरा देते हुए बताया कि 35 साल का एक व्यक्ति अपने घर के भीतर बैठकर नाश्ता कर रहा था, तभी अचानक बाहर से आई एक गोली सीधे उसके सीने में जा लगी। गोली लगने के बाद वह शख्स लगभग 45 मिनट तक तड़पता रहा, लेकिन नाकेबंदी के कारण उसे समय पर इलाज नहीं मिल सका और उसने दम तोड़ दिया।

इस घटना के बाद आक्रोशित भीड़ ने सड़कों पर उतरकर शासन के खिलाफ उग्र नारेबाजी की। गुस्साए लोगों ने ‘हम अपने युवाओं की कुर्बानी देंगे, हम क्रांति लाएंगे’ के नारे लगाते हुए पूरी व्यवस्था को चुनौती दी। आम जनता में इस समय सुरक्षाबलों की इस मनमानी कार्रवाई को लेकर भारी गुस्सा व्याप्त है।

भारत सरकार ने PoK में निहत्थे नागरिकों पर की गई इस दमनकारी कार्रवाई की सख्त शब्दों में निंदा की है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बयान जारी करते हुए कहा कि पाकिस्तान बेवजह मासूम नागरिकों की जान लेने पर उतारू है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए कब्जे वाले क्षेत्र में लोगों के मानवाधिकारों का लगातार हनन कर रहा है।

Ansh Goyal

अंश गोयल 'दून हॉराइज़न' में अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ (International Desk) की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वैश्विक राजनीति, युद्ध के हालात, कूटनीति (Diplomacy) और ग्लोबल इकॉनमी पर उनकी गहरी पकड़ है। अंश का मुख्य फोकस अमेरिका, रूस, मध्य पूर्व और पड़ोसी देशों की हलचल का भारतीय दृष्टिकोण से सटीक विश्लेषण करना है। विदेशी मंचों पर भारत के बढ़ते दबदबे और वैश्विक नीतियों का आम आदमी पर पड़ने वाले प्रभाव को वे बेहद सरल हिंदी में समझाते हैं। उनकी डीप-रिसर्च वाली रिपोर्टिंग पाठकों को दुनिया भर की विश्वसनीय खबरें प्रदान करती है।

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