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मसूरी की सबसे ऊंची चोटी पर विराजमान हैं श्रीकृष्ण के बड़े भाई, यहां के पत्थर भी सुनाते हैं रहस्य

मसूरी के पश्चिमी छोर पर स्थित भद्रराज मंदिर भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम को समर्पित एक प्राचीन सिद्धपीठ है। 7,500 फीट की ऊंचाई पर बसा यह मंदिर अपनी आध्यात्मिक शांति और रोमांचक ट्रेकिंग रूट के लिए देश-दुनिया में मशहूर है।

Published On: April 4, 2026 7:34 AM
Bhadraj Temple Mussoorie

HIGHLIGHTS

  • द्वापर युग का इतिहास: महाभारत युद्ध के बाद भगवान बलराम ने इसी पहाड़ी पर की थी तपस्या।
  • अनोखी परंपरा: यहां भगवान का अभिषेक केवल ताजे दूध और मक्खन से किया जाता है।
  • पर्यटन का केंद्र: ट्रेकर्स के बीच 'मिल्कमैन ट्रेल' के नाम से प्रसिद्ध है यहां का रास्ता।

धर्म डेस्क, 04 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। Bhadraj Temple Mussoorie : पहाड़ों की रानी मसूरी के शोर-शराबे से दूर, पश्चिमी छोर पर स्थित भद्रराज मंदिर आस्था का वो केंद्र है जिसे स्थानीय लोग ‘छोटा बद्रीनाथ’ मानते हैं।

यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इतिहास और प्रकृति का एक बेजोड़ मेल है। घने ओक और देवदार के जंगलों के बीच बसी यह जगह भगवान बलभद्र (बलराम) को समर्पित है।

मान्यता है कि महाभारत के विनाशकारी युद्ध के बाद जब भगवान बलराम शांति की खोज में निकले, तो उन्होंने इसी शांत पहाड़ी को अपनी तपस्या के लिए चुना।

स्थानीय चरवाहों की सेवा से प्रसन्न होकर उन्होंने यहीं ‘शिला’ रूप में बसने का वरदान दिया था। आज भी यह मंदिर जौनसार-बावर और दूधली गांव के ग्रामीणों की अगाध श्रद्धा का केंद्र है।

दूध-मक्खन का अभिषेक और ‘मिल्कमैन ट्रेल’

इस मंदिर की सबसे खास बात इसकी पूजा पद्धति है। भद्रराज मंदिर में भगवान बलराम की मूर्ति को केवल दूध से स्नान कराया जाता है। यहां भक्त फल-फूल के बजाय घी, मक्खन और दूध का भोग लगाते हैं।

यही कारण है कि इस रास्ते को ‘मिल्कमैन ट्रेल’ कहा जाता है, क्योंकि पुराने समय में दूधली गांव के दूधिया इसी रास्ते से मसूरी दूध पहुंचाने जाते थे।

ट्रेकर्स के लिए नई सुविधाएं

इस साल मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं में इजाफा किया है। लाइब्रेरी चौक से लगभग 14 किलोमीटर दूर स्थित इस चोटी तक पहुँचने के लिए अब रास्ते पहले से बेहतर चिह्नित हैं।

क्लाउड्स एंड से शुरू होने वाला 7-8 किलोमीटर का मुख्य ट्रेक अब शुरुआती ट्रेकर्स के लिए भी सुगम बनाया गया है, हालांकि आखिरी 1.5 किलोमीटर की चढ़ाई अभी भी पथरीली और चुनौतीपूर्ण है।

यहां से दिखता है हिमालय का विराट रूप

समुद्र तल से 2,200 मीटर की ऊंचाई पर खड़ा यह मंदिर 360-डिग्री व्यू प्रदान करता है। उत्तर में जहां बंदरपूंछ और स्वर्गारोहिणी की बर्फीली चोटियां चमकती हैं, वहीं दक्षिण में दून घाटी का मनमोहक नजारा दिखता है।

अगस्त के महीने (15-17 अगस्त) में यहां लगने वाला वार्षिक भद्रराज मेला स्थानीय संस्कृति को करीब से देखने का सबसे अच्छा मौका होता है।

ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए यह एक दिन का परफेक्ट डेस्टिनेशन है। क्लाउड्स एंड से सुबह जल्दी निकलकर शाम तक वापस लौटा जा सकता है।

रास्ते में पड़ने वाला दूधली गांव पहाड़ी जीवन की सादगी से रूबरू कराता है।


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Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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