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लोकभवन घेराव से देहरादून की सड़कें जाम, पूर्व सीएम रावत समेत बड़े नेताओं पर केस दर्ज

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Fri, 16 Oct 2026 06:30 PM IST

देहरादून में लोकभवन के घेराव पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल समेत 30 नेताओं पर बीएनएस की दो धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।

Uttarakhand Congress Protest

मुख्य बातें

  • लोकभवन कूच मामले में पूर्व सीएम हरीश रावत समेत 30 कांग्रेसी नामजद।
  • कैंट कोतवाली में 30 नामजद और 15 अज्ञात प्रदर्शनकारियों पर केस दर्ज।
  • सरकारी काम में बाधा डालने पर बीएनएस धारा 132 और 223 लगी।

देहरादून (16 अक्टूबर) : अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर टकराव चरम पर पहुंच गया है। देहरादून के घंटाघर से जिला प्रशासन तक तय कैंडल मार्च का रूट बदलकर सीधे सत्ता के केंद्र लोकभवन का रुख करने वाले कांग्रेसियों पर पुलिस ने बड़ा कानूनी एक्शन लिया है।

कैंट कोतवाली पुलिस ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह और पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत समेत 30 नामजद नेताओं और 15 अज्ञात कार्यकर्ताओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की दो गंभीर धाराओं में आपराधिक मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने तय रूट तोड़कर सरकारी कार्य में बाधा डाली और सुरक्षा घेरा लांघने की कोशिश की।

लोकभवन कूच पर हरीश रावत समेत 30 नेता नामजद

देहरादून के थाना कैंट प्रभारी निरीक्षक संतोष सिंह कुंवर की तहरीर पर यह मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस को घंटाघर से जिला प्रशासन परिसर तक शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकालकर ज्ञापन सौंपने की अनुमति दी गई थी। इसके उलट, कांग्रेस नेता भारी भीड़ के साथ सीधे राजभवन और मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने वाले संवेदनशील मार्ग पर स्थित लोकभवन गेट के सामने पहुंच गए।

मौके पर तैनात पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और यातायात सुचारू रहने देने की हिदायत दी, लेकिन आरोप है कि नेताओं और कार्यकर्ताओं ने निर्देशों को दरकिनार करते हुए पुलिस बैरियर पार करने का प्रयास किया। स्थिति बेकाबू होते देख प्रशासन को फौरन अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा और कड़ी मशक्कत के बाद भीड़ को हटाया गया।

अंकिता हत्याकांड में कथित वीआईपी पर गरमाई सियासत

विवाद की असली वजह अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़ी वो सियासी चिंगारी है, जो कथित वीआईपी के नाम पर लगातार सुलग रही है। कांग्रेस का आरोप है कि हत्याकांड में शामिल कथित वीआईपी को संरक्षण दिया जा रहा है और संवैधानिक पद से नवाजा गया है। इसी के विरोध में पार्टी ने पूरे प्रदेश में मोर्चा खोला है।

वहीं पुलिस का कहना है कि विरोध दर्ज कराने के नाम पर सार्वजनिक सड़कों को बंधक बनाना और सुरक्षा घेरा तोड़ना सीधे तौर पर गैरकानूनी है। दर्ज एफआईआर में मुख्य रूप से हरीश रावत, गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत के अलावा महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला, मुख्य प्रवक्ता गरिमा दसौनी और पूर्व विधायक राजकुमार समेत 30 नेताओं को नामजद आरोपी बनाया गया है, जबकि 10 से 15 अज्ञात कार्यकर्ता भी जांच के दायरे में हैं।

बीएनएस धाराओं में पुलिस की सख्त कानूनी कार्रवाई

देहरादून के एसपी सिटी शेखर सुयाल ने पुष्टि की है कि लोक व्यवस्था भंग करने और सुरक्षा बलों के काम में रुकावट डालने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 132 (सरकारी सेवक को उसके कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए हमला या बल प्रयोग) और धारा 223 (लोक सेवक के वैध आदेश की अवज्ञा) के तहत मामला दर्ज हुआ है।

मामले की विवेचना उपनिरीक्षक कैलाश चंद्र भट्ट को सौंपी गई है। पुलिस घटना स्थल की वीडियो फुटेज, ड्रोन कैमरों की रिकॉर्डिंग और बैरिकेड्स पर धक्का-मुक्की करने वाले चेहरों की पहचान में जुटी है। इस एफआईआर के बाद राजधानी देहरादून में सियासी तापमान बढ़ गया है और कांग्रेस ने इसे सरकार की दमनकारी नीति बताते हुए कानूनी व जमीनी लड़ाई जारी रखने का दावा किया है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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