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उत्तराखंड के बैंकों में पड़े 550 करोड़ रुपये लावारिस, वारिसों की तलाश में जुटा प्रशासन

उत्तराखंड के बैंकों में 550 करोड़ रुपये की अनक्लेम्ड डिपॉजिट फंसी है। देहरादून जिले में सबसे ज्यादा 256 करोड़ रुपये जमा हैं। जानिए आरबीआई के उद्गम पोर्टल से अपना फंसा पैसा वापस पाने का पूरा तरीका।

Published On: September 7, 2026 6:01 PM
Uttarakhand unclaimed bank deposits

HIGHLIGHTS

  • उत्तराखंड के बैंकों में कुल 550 करोड़ रुपये लावारिस पड़े हैं।
  • अकेले देहरादून जिले में सबसे ज्यादा 256.33 करोड़ रुपये अनक्लेम्ड हैं।
  • अभियान चलाने के बावजूद अब तक महज 22 करोड़ रुपये ही लौटाए जा सके।
  • बीमा, म्यूचुअल फंड और शेयरों में भी 50 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं।
  • आरबीआई के उद्गम पोर्टल पर केवाईसी दस्तावेजों के जरिए क्लेम किया जा सकता है।

दून हॉराइज़न, देहरादून (7 सितंबर): उत्तराखंड भर के विभिन्न बैंकों में आम जनता की गाढ़ी कमाई के करीब 550 करोड़ रुपये बिना किसी दावेदार के पड़े हुए हैं। राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (SLBC) की हालिया समीक्षा में यह बात सामने आई है कि बैंकों के निरंतर प्रयासों के बावजूद खाताधारक या उनके कानूनी वारिस इस भारी-भरकम राशि को निकालने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।

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पिछले एक साल से चलाए जा रहे विशेष जागरूकता अभियानों के बावजूद अब तक महज 22 करोड़ रुपये ही वास्तविक वारिसों को सौंपे जा सके हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि 500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अभी भी बैंकों और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास अपने असली हकदारों का इंतजार कर रही है।

देहरादून में सबसे ज्यादा लावारिस पूंजी, पहाड़ी जिलों का भी बुरा हाल

जिलों की पड़ताल करें तो स्थिति काफी चौंकाने वाली दिखती है। राजधानी देहरादून इस सूची में सबसे आगे है, जहां करीब साढ़े चार लाख निष्क्रिय बैंक खातों में कुल 256.33 करोड़ रुपये जमा हैं। मैदानी क्षेत्र हरिद्वार में 88.13 करोड़ रुपये लावारिस पड़े हैं। वहीं पर्वतीय जिलों में पौड़ी 52.32 करोड़ और सीमांत पिथौरागढ़ 30.54 करोड़ रुपये के साथ शीर्ष पर हैं।

अन्य जिलों की बात करें तो नैनीताल में 26.53 करोड़, टिहरी में 25.83 करोड़, चमोली में 15.01 करोड़ और उत्तरकाशी में 13.11 करोड़ रुपये दर्ज हैं। इसके अलावा ऊधमसिंह नगर में 11.98 करोड़, बागेश्वर में 11.07 करोड़, चंपावत में 9.41 करोड़ और रुद्रप्रयाग में 8.66 करोड़ रुपये फंसे हैं। अल्मोड़ा में सबसे कम 1.08 करोड़ रुपये की अनक्लेम्ड राशि (Unclaimed Deposit) दर्ज की गई है। बैंकों के अलावा तकरीबन 50 करोड़ रुपये की रकम भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC), शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में भी बिना किसी दावेदार के फंसी है।

आखिर क्यों लावारिस हो जाती है यह रकम?

लीड बैंक अधिकारी संजय भाटिया के मुताबिक, जब किसी खाते में लगातार 10 साल तक कोई वित्तीय लेनदेन नहीं होता, तो बैंक उसे ‘अनक्लेम्ड डिपॉजिट’ मानकर यह रकम आरबीआई के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस (DEA) फंड में ट्रांसफर कर देते हैं। अमूमन खाताधारक की असमय मृत्यु होने, परिवार को खाते की जानकारी न होने, स्थायी पता बदलने या पुराने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बंद होने के चलते ऐसी स्थिति बनती है।

कई मामलों में बुजुर्ग पेंशनरों के निधन के बाद उनके वारिस कानूनी औपचारिकताओं की जटिलता के डर से दावा पेश नहीं करते। बैंक अब खाता खोलते वक्त दर्ज पते पर पत्राचार कर परिजनों को खोजने की कोशिश कर रहे हैं।

उद्गम पोर्टल से ऐसे निकालें फंसा हुआ पैसा

अगर आपको अंदेशा है कि आपके परिवार के किसी सदस्य का पैसा किसी खाते में छूट गया है, तो इसके लिए बैंकों की शाखाओं के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। केंद्रीय बैंक ने इसके लिए केंद्रीकृत वेब पोर्टल उद्गम (UDGAM Portal) शुरू किया है। इस पोर्टल पर कोई भी नागरिक अपना मोबाइल नंबर और नाम दर्ज कर पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र या जन्मतिथि के जरिए एक साथ कई बैंकों में दर्ज अनक्लेम्ड राशि की पड़ताल कर सकता है।

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यदि पोर्टल पर आपके या आपके पूर्वजों के नाम से कोई जमा राशि दिखती है, तो मूल पहचान पत्र (KYC Details) और यदि खाताधारक दिवंगत हो चुके हैं तो उनका मृत्यु प्रमाण पत्र व विधिक उत्तराधिकार प्रमाणपत्र लेकर संबंधित बैंक की किसी भी शाखा में दावा फॉर्म जमा करें। बैंक स्तर पर कागजातों की जांच पूरी होते ही ब्याज सहित पूरी रकम सीधे आपके चालू या बचत खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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