देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी में सड़कों की खुदाई के बाद उन्हें अधूरा छोड़ने वाली निर्माण एजेंसियों पर अब प्रशासन का चाबुक चलना तय है। सचिव लोक निर्माण विभाग पंकज पाण्डेय और जिलाधिकारी सविन बंसल ने गुरुवार तड़के 6 बजे से शहर के विभिन्न हिस्सों में रोड कटिंग और रेस्टोरेशन कार्यों का व्यापक निरीक्षण किया।
इस दौरान बिंदाल पुल, आईएसबीटी और राजपुर रोड जैसे व्यस्त इलाकों में मलबे के कारण बाधित यातायात को देख सचिव ने सख्त नाराजगी जाहिर की।
मुख्यमंत्री के निर्देशों का हवाला देते हुए सचिव पंकज पाण्डेय ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों के नाम पर जनता को असुविधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण में पाया गया कि कई स्थानों पर खुदाई के बाद मलबे का निस्तारण नहीं किया गया था, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रोड कटिंग की अनुमति देते समय तय की गई शर्तों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित हो और कार्य पूरा होते ही गुणवत्तापूर्ण पैच वर्क किया जाए।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने के लिए नए नियमों की घोषणा की है। अब किसी भी कार्यदायी संस्था को एक समय में केवल 2 या 3 स्थानों पर ही खुदाई की अनुमति दी जाएगी। इन कार्यों को 15 से 21 दिन के भीतर अनिवार्य रूप से पूर्ण कर रेस्टोरेशन करना होगा।
इसके लिए एजेंसियों से बाकायदा शपथ पत्र लिए गए हैं और समयसीमा टूटने पर उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन की क्विक रिस्पांस टीम (QRT) को इन कार्यों की निरंतर निगरानी के आदेश दिए गए हैं।
निरीक्षण का दायरा दिलाराम चौक से लेकर शिमला बाईपास और रिस्पना पुल से लेकर दून यूनिवर्सिटी क्षेत्र तक रहा। शासन का यह कड़ा रुख आगामी मानसून सीजन से पहले शहर की मुख्य सड़कों को दुरुस्त करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इस दौरान नगर मजिस्ट्रेट प्रत्युष सिंह और लोनिवि के वरिष्ठ अभियंता भी मौजूद रहे।









