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उत्तराखंड में फर्जी कोटे से बने डॉक्टरों पर कसा शिकंजा, SIT की 3 राज्यों में ताबड़तोड़ दबिश

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Thu, 24 Sep 2026 12:11 PM IST

उत्तराखंड में स्वतंत्रता सेनानी कोटे के फर्जी प्रमाण पत्र से एमबीबीएस में दाखिले के रैकेट पर एसआईटी का शिकंजा कस गया है। सरकार ने 2005 से अब तक हुए सभी दाखिलों की जांच के आदेश दिए हैं।

Uttarakhand MBBS Fake Certificate Scam

मुख्य बातें

  • 2005 से अब तक स्वतंत्रता सेनानी कोटे से बने सभी डॉक्टरों की जांच होगी।
  • SIT ने दिल्ली, मेरठ और मुजफ्फरनगर में ताबड़तोड़ छापेमारी की।
  • मुजफ्फरनगर के पिता-पुत्री हिरासत में, तहसील स्तर के गठजोड़ की गहन पड़ताल।
  • 60 लाख रुपये के लेन-देन में से 10 लाख की बरामदगी जल्द संभव।
  • रूपेश पंडित की निशानदेही पर 4 नए आरोपियों की गिरफ्तारी की तैयारी।

दून हॉराइज़न, देहरादून (24 सितम्बर) : स्वतंत्रता संग्राम सेनानी (Freedom Fighter Quota) के जाली दस्तावेजों के सहारे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटें हथियाने वाले सिंडिकेट पर शिकंजा पूरी तरह कस चुका है। राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब तक इस विशेष आरक्षण के तहत दाखिला पा चुके सभी डॉक्टरों के क्रेडेंशियल्स की व्यापक स्क्रूटनी शुरू करने का फरमान जारी कर दिया है।

धांधली की जड़ें सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं हैं। इसका दायरा देहरादून की तहसील व्यवस्था से लेकर पड़ोसी राज्यों के शिक्षा माफिया तक फैला हुआ है।

तीन राज्यों में दबिश, दून लाई गई मुजफ्फरनगर की छात्रा

विशेष जांच दल (SIT) की अलग-अलग टीमों ने दिल्ली, मेरठ और मुजफ्फरनगर के कई ठिकानों पर एक साथ रेड मारी। मुजफ्फरनगर से उस छात्रा और उसके पिता को हिरासत में लेकर देहरादून लाया गया है, जिसने जाली कागजात लगाकर राजकीय मेडिकल कॉलेज की सीट हासिल की थी।

एसआईटी प्रभारी जया बलोनी की अगुवाई में दोनों से घंटों कड़ी पूछताछ की गई। पूछताछ का मुख्य केंद्र यह है कि देहरादून कलेक्ट्रेट और संबंधित तहसील के किस बाबू अथवा प्रशासनिक अफसर की मिलीभगत से यह फर्जी प्रमाण पत्र तैयार हुआ। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, गिरोह का कथित मास्टरमाइंड बिहार निवासी रूपेश पंडित पहले ही सलाखों के पीछे है।

उसने पूछताछ में नेटवर्क से जुड़े चार सक्रिय सदस्यों के नाम कबूल किए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर कम से कम दो से चार नई गिरफ्तारियां अमल में लाई जाएंगी। साथ ही, 60 लाख रुपये की वसूली गई कुल रकम में से लगभग 10 लाख रुपये की रिकवरी प्रक्रिया पूरी होने के करीब है।

डिजिटल सबूत मिटाने के लिए इंटरनेट कॉलिंग और फोन बदलने का खेल

गिरोह के सदस्यों को जैसे ही भनक लगी कि मुकदमा दर्ज हो चुका है, उन्होंने अपने डिजिटल पदचिह्न (Digital Footprints) नष्ट करने के लिए शातिराना तरीके अपनाए। गिरोह सामान्य सेलुलर नेटवर्क के बजाय केवल व्हाट्सएप और सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स पर कॉलिंग कर रहा था।

छात्रों और उनके अभिभावकों से सौदेबाजी के सारे ऑडियो कॉल और चैट लॉग्स डिलीट कर दिए गए। इतना ही नहीं, कुछ आरोपियों ने पकड़े जाने के डर से अपने स्मार्टफोन तक ठिकाने लगा दिए। हालांकि, देहरादून पुलिस की साइबर फॉरेंसिक टीम आधुनिक रिकवरी टूल्स और टावर लोकेशन डंप के जरिए मिटाए गए डेटा को फिर से जुटाने में लगी है। फॉरेंसिक साक्ष्य मिलते ही आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य मिटाने की सुसंगत कानूनी धाराएं भी बढ़ाई जाएंगी।

2005 से अब तक के सभी दाखिले तलब, डिग्रियों पर मंडराया संकट

चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल के सख्त रुख के बाद चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय हरकत में आ गया है। विभागीय सचिव को निर्देश दिए गए हैं कि जब से प्रदेश में राजकीय मेडिकल कॉलेजों की स्थापना हुई है, तब से लेकर अब तक इस क्षैतिज आरक्षण से बने हर चिकित्सक की फाइल दोबारा खोली जाए।

उत्तराखंड में स्वतंत्रता सेनानी कोटे के तहत 2 प्रतिशत हॉरिजॉन्टल रिजर्वेशन (Horizontal Reservation) का वैधानिक प्रावधान है। इसके दायरे में सेनानी के पुत्र, पुत्री, पौत्र-पौत्री और नाती-नातिन यानी तीन पीढ़ियां आती हैं। राज्य में वर्ष 2005 में हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के साथ सरकारी स्तर पर एमबीबीएस की पढ़ाई का विस्तार शुरू हुआ था। इसके बाद 2008 में श्रीनगर गढ़वाल, फिर दून मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा और हरिद्वार मेडिकल कॉलेज शुरू हुए, जबकि सीमांत पिथौरागढ़ कॉलेज में भी प्रक्रिया जारी है।

जांच के दायरे में करीब दो दशकों के दौरान दाखिला लेने वाले तमाम अभ्यर्थी आ चुके हैं। शासन स्तर पर यह स्पष्ट कर दिया गया है कि सत्यापन में दस्तावेज गलत पाए जाने पर न केवल एमबीबीएस की डिग्री और मेडिकल काउंसिल का रजिस्ट्रेशन निरस्त होगा, बल्कि बतौर सरकारी चिकित्सक ली गई सैलरी की रिकवरी और आपराधिक मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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