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Suzuki ADAS Technology : सुजुकी का बड़ा ऐलान, अब सस्ती कारों में भी मिलेंगे ADAS जैसे जरूरी सेफ्टी फीचर्स

सुजुकी अपनी छोटी और बजट-फ्रेंडली कारों में भी ऑटोनॉमस इमरजेंसी ब्रेकिंग और लेन कीप जैसे जरूरी ADAS सेफ्टी फीचर्स लाने की योजना बना रही है। कंपनी का मकसद भारत की ट्रैफिक स्थितियों के मुताबिक बिना जेब पर ज्यादा बोझ डाले आम ड्राइवरों तक हाईटेक सुरक्षा पहुंचाना है।

Published On: October 1, 2026 6:41 PM
Suzuki ADAS Technology

HIGHLIGHTS

  • सुजुकी अपनी पूरी कार रेंज में ADAS तकनीक पेश करने की तैयारी कर रही है।
  • फ्रंट रडार हटाकर सिर्फ हाई-रिजॉल्यूशन कैमरा और AI चिप्स पर सिस्टम टिकेगा।
  • भारत में 2024 के दौरान हुए 1.77 लाख सड़क हादसों का दिया हवाला।
  • ऑटोनॉमस इमरजेंसी ब्रेकिंग और लेन डिपार्चर प्रिवेंशन जैसे फीचर स्टैंडर्ड बनाने पर जोर।
  • पैसेंजर व्हीकल बाजार में सुजुकी की 40.6% हिस्सेदारी के चलते बड़ा असर दिखेगा।

Suzuki ADAS Technology : सड़क पर कार चलाते वक्त अचानक सामने कोई आ जाए या झपकी लगने से गाड़ी लेन से बाहर निकलने लगे, तो एक छोटा सा सेंसर या अलर्ट जान बचा सकता है। अब तक ऐसे एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) केवल 15–20 लाख रुपये से ऊपर की प्रीमियम कारों में ही आम थे।

सुजुकी अब इस तस्वीर को बदलने की तैयारी में है। कंपनी का लक्ष्य है कि बिना गाड़ी की कीमत बहुत ज्यादा बढ़ाए, रोजमर्रा की छोटी और किफायती कारों में भी बुनियादी ADAS सेफ्टी टूल्स को स्टैंडर्ड फीचर के तौर पर शामिल किया जाए।

भारतीय सड़कों की जरूरत और सुजुकी की रणनीति

सुजुकी ने अपनी हालिया टेक्नोलॉजी ब्रीफिंग में साफ किया कि केवल महंगी गाड़ियों में आधुनिक सुरक्षा देकर सड़कों को सुरक्षित नहीं बनाया जा सकता। भारत में पैसेंजर व्हीकल बाजार का 40 फीसदी से ज्यादा हिस्सा सुजुकी के पास है, इसलिए कंपनी की जिम्मेदारी और असर दोनों यहां सबसे ज्यादा हैं।

देश में हर साल सड़क हादसों में बड़ी संख्या में लोग जान गंवाते हैं। ऐसे में अगर सबसे ज्यादा बिकने वाली एंट्री और मिड-लेवल कारों में जीवन रक्षक फीचर्स लग जाएं, तो हादसों की संख्या पर सीधा असर पड़ेगा।

कौन से फीचर्स होंगे सबसे पहले शामिल?

सुजुकी हर तरह के गैर-जरूरी तामझाम की जगह उन टूल्स पर ध्यान दे रही है जो दुर्घटना रोकने में तुरंत काम आते हैं:

ऑटोनॉमस इमरजेंसी ब्रेकिंग (AEB): अगर कार के सामने कोई वाहन, पैदल यात्री या रुकावट आ जाती है और ड्राइवर समय पर ब्रेक नहीं लगा पाता, तो सिस्टम खुद ब्रेक लगाकर गाड़ी की रफ्तार थाम लेता है।

लेन डिपार्चर प्रिवेंशन: लंबी दूरी या थकान के दौरान अगर कार अनजाने में अपनी लेन से बाहर भटकने लगे, तो स्टीयरिंग हल्का सा कंट्रोल लेकर गाड़ी को सही दिशा में बनाए रखता है।

ड्राइवर और केबिन मॉनिटरिंग: एक ही स्मार्ट कैमरे की मदद से ड्राइवर के ध्यान भटकने या झपकी आने की स्थिति को ट्रैक करना।

क्रूज कंट्रोल जैसे सुविधा से जुड़े टूल्स वैकल्पिक रखे जा सकते हैं, ताकि गाड़ी की मूल कीमत आम बजट से बाहर न जाए।

कार की कीमत कैसे रहेगी नियंत्रण में?

ADAS तकनीक के महंगा होने की मुख्य वजह फ्रंट रडार और कई अलग-अलग सेंसर्स का इस्तेमाल है। सुजुकी इस सिस्टम को सस्ता बनाने के लिए नया तरीका निकाल रही है।

कंपनी महंगे रडार सिस्टम की जगह हाई-रिजॉल्यूशन कैमरा और तेज गति से काम करने वाली एआई प्रोसेसिंग चिप्स का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है।

इसके साथ ही, ड्राइवर मॉनिटरिंग और सड़क की निगरानी का काम एक ही इंटीग्रेटेड यूनिट से कराया जाएगा। जब हार्डवेयर के अलग-अलग पुर्जे कम होंगे, तो लागत अपने आप घट जाएगी।

आम खरीदार को कब तक मिलेगा इसका फायदा?

कंपनी ने अभी किसी तय मॉडल या लॉन्च की तारीख का औपचारिक ऐलान नहीं किया है। हालांकि, जिस दिशा में काम चल रहा है, उससे साफ है कि आने वाले समय में मारुति सुजुकी के लोकप्रिय मॉडल्स में यह सुरक्षा पैकेज धीरे-धीरे देखने को मिल सकता है।

भारतीय ट्रैफिक के लिहाज से ट्यून होने के बाद यह तकनीक आम कार खरीदारों के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच साबित होगी।

Yash Ojha

ऑटोमोबाइल सेक्टर की गहरी समझ रखने वाले यश ओझा 'दून हॉराइज़न' के वरिष्ठ ऑटो एक्सपर्ट हैं। नई लॉन्चिंग से लेकर ऑटो पॉलिसी के बदलावों तक, यश हर खबर का बारीकी से विश्लेषण करते हैं। उनका लेखन केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वे गाड़ी की परफॉरमेंस को सड़क की असल परिस्थितियों और आम आदमी की जेब के हिसाब से परखते हैं। रिसर्च और असल टेस्ट-ड्राइव के प्रति उनका समर्पण उन्हें पाठकों के बीच एक भरोसेमंद नाम बनाता है।

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