Swine Flu Symptoms : मौसम में आ रहे उतार-चढ़ाव के बीच अस्पतालों की ओपीडी में सर्दी, जुकाम और तेज बुखार से पीड़ित मरीजों की तादाद लगातार बढ़ रही है। सामान्य तौर पर लोग इसे केवल मौसमी बदलाव की मार मानकर घर पर ही आराम करने लगते हैं, लेकिन चिकित्सकों के मुताबिक हर वायरल फीवर साधारण नहीं होता।
अगर बदन दर्द, गले में तेज चुभन और सिरदर्द कई दिनों तक बना रहे, तो यह स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 वायरस (H1N1 Virus) की शुरुआती दस्तक हो सकती है। ऐसी स्थिति में बेवजह घबराने के बजाय समय पर चिकित्सकीय जांच और सही निगरानी जरूरी है।
सामान्य मौसमी बुखार और स्वाइन फ्लू का अंतर

मौसमी फ्लू में आमतौर पर हल्का बुखार, नाक बहना और हल्की थकान होती है, जो तीन-चार दिनों में अपने आप ठीक होने लगती है। इसके विपरीत, स्वाइन फ्लू का हमला अचानक और काफी तेज होता है।
मरीज को अचानक 101 से 103 डिग्री तक तेज बुखार चढ़ सकता है, जिसके साथ मांसपेशियों में असहनीय दर्द और सीने में जकड़न महसूस होती है।
अगर बुखार के साथ सांस लेने में तकलीफ हो रही हो या खांसी लगातार बढ़ रही हो, तो इसे कतई नजरअंदाज न करें।
यह स्थिति फेफड़ों में संक्रमण फैलने की ओर इशारा करती है, जहां आरटी-पीसीआर (RT-PCR) या स्वाइन फ्लू पैनल टेस्ट के जरिए ही वायरस की सटीक पुष्टि संभव है।
हाई-रिस्क ग्रुप के लिए ज्यादा सावधानी क्यों जरूरी?
संक्रमण किसी को भी अपनी चपेट में ले सकता है, मगर कुछ खास वर्ग के मरीजों में यह वायरस तेजी से गंभीर रूप ले लेता है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों, 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से डायबिटीज, अस्थमा या किडनी रोग से जूझ रहे लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता सीमित होती है।
चिकित्सकों के मुताबिक, इस वर्ग के मरीजों में लक्षण दिखते ही पहले 48 घंटों के भीतर डॉक्टर से संपर्क साधना चाहिए।
समय पर इलाज मिलने से मरीज को अस्पताल में भर्ती होने या ऑक्सीजन सपोर्ट की नौबत से बचाया जा सकता है। कमजोर इम्युनिटी वाले मरीजों के संपर्क में आने से बचें।
खुद डॉक्टर बनने की भूल पड़ सकती है भारी
अक्सर देखा जाता है कि लोग बुखार आते ही नजदीकी मेडिकल स्टोर से बिना सोचे-समझे पैरासिटामोल के साथ एंटीबायोटिक दवाएं खरीदकर खाने लगते हैं।
स्वाइन फ्लू एक वायरल संक्रमण है, जिस पर एंटीबायोटिक गोलियां बिल्कुल बेअसर साबित होती हैं। बेवजह एंटीबायोटिक खाने से शरीर में दवाओं के प्रति प्रतिरोध (एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस) बढ़ जाता है।
केवल अधिकृत चिकित्सक ही यह तय कर सकते हैं कि मरीज को ओसेल्टामिविर (Oseltamivir) जैसी विशिष्ट एंटीवायरल दवा की जरूरत है या नहीं।
घर पर आइसोलेशन और संक्रमण रोकने के बुनियादी नियम
यदि किसी को फ्लू के लक्षण हैं, तो सबसे पहले खुद को परिवार के बाकी सदस्यों से अलग कमरे में सीमित कर लें। खूब सारा गुनगुना पानी, सूप और नींबू पानी जैसे तरल पदार्थ लेते रहें ताकि डिहाइड्रेशन न हो।
खांसते या छींकते समय हमेशा डिस्पोजेबल टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे ढक्कनदार डस्टबिन में ही फेंकें।

बाहर जाना अपरिहार्य हो तो ट्रिपल लेयर सर्जिकल मास्क पहनें और हाथों को 20 सेकंड तक साबुन-पानी से धोते रहें।












