झालावाड़। भारतीय रेलवे के नेटवर्क में कई ऐसे स्टेशन हैं जो अपनी खूबसूरती के लिए जाने जाते हैं, लेकिन झालावाड़ जिले में स्थित भवानी मंडी रेलवे स्टेशन (Bhawani Mandi Railway Station) अपनी भौगोलिक पेचीदगियों के लिए दुनिया भर में मशहूर है।
दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर स्थित यह स्टेशन उत्तर और मध्य भारत को जोड़ने वाली एक ऐसी कड़ी है, जहां ट्रेन का इंजन राजस्थान की सीमा में खड़ा होता है तो गार्ड का डिब्बा मध्य प्रदेश की सरहद में रहता है।
इस स्टेशन की सबसे दिलचस्प बात इसका टिकट काउंटर है। यहां रेल टिकट खरीदने के लिए लंबी कतार राजस्थान के हिस्से में लगती है, लेकिन टिकट देने वाला कर्मचारी मध्य प्रदेश की भौगोलिक सीमा के भीतर बैठता है।
स्टेशन के एक छोर पर राजस्थान का बोर्ड लगा है, तो दूसरे छोर पर मध्य प्रदेश का। यात्रियों के लिए यह अनुभव किसी रोमांच से कम नहीं होता कि वे एक ही प्लेटफॉर्म पर टहलते हुए दो राज्यों की यात्रा कर लेते हैं।
सिर्फ रेलवे स्टेशन ही नहीं, बल्कि यहां के रिहायशी इलाके भी इसी तरह बंटे हुए हैं। भवानी मंडी कस्बे के कई घरों के मुख्य दरवाजे राजस्थान की ओर खुलते हैं, जबकि पिछला दरवाजा मध्य प्रदेश के भैंसोदा मंडी की ओर निकलता है।
स्थानीय बाजारों में दोनों राज्यों की मुद्रा और संस्कृति का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है। लोग एक राज्य में खरीदारी करते हैं और चंद कदम चलकर दूसरे राज्य में अपने घर पहुंच जाते हैं।
हालांकि, यह भौगोलिक विशिष्टता कानून व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती पेश करती है। दो राज्यों की सीमा होने के कारण यह इलाका तस्करों और अपराधियों के लिए पनाहगाह बना रहता है।
अक्सर अपराधी एक राज्य में वारदात कर दूसरे राज्य की सीमा में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे अधिकार क्षेत्र को लेकर राजस्थान और मध्य प्रदेश की पुलिस के बीच अक्सर खींचतान की स्थिति बनी रहती है।
भवानी मंडी की इसी विचित्रता पर साल 2017 में ‘भवानी मंडी टेशन’ नाम से एक फिल्म भी बन चुकी है। सईद फैजान हुसैन के निर्देशन में बनी इस फिल्म में मशहूर अभिनेता जयदीप अहलावत ने मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म में स्टेशन की इसी जटिलता और इसके कारण पैदा होने वाले हास्य और अपराध के पहलुओं को बखूबी दर्शाया गया था।











