उत्तर प्रदेश के धनघटा थाना क्षेत्र के कटार जोत गांव में रिश्तों का एक ऐसा ताना-बाना सामने आया है, जिसने सामाजिक मर्यादा और मानवीय संवेदनाओं के बीच एक नई बहस छेड़ दी है.
यहां एक शख्स ने अपनी पत्नी के विवाहेतर संबंधों का विरोध करने या हिंसा का रास्ता चुनने के बजाय, उसे उसके प्रेमी के हवाले कर दिया. पति ने न केवल इस रिश्ते को स्वीकार किया, बल्कि खुद मंदिर में मौजूद रहकर अपनी पत्नी का हाथ उसके प्रेमी के हाथ में थाम दिया.
कटार जोत गांव के रहने वाले बबलू की शादी साल 2017 में गोरखपुर की राधिका के साथ हुई थी. आठ साल के इस सफर में उनके दो बच्चे भी हुए, जिनमें सात साल का बेटा आर्यन और दो साल की मासूम बेटी शिवानी शामिल है. बबलू अपनी आजीविका के लिए अक्सर घर से बाहर रहता था, इसी दौरान राधिका का झुकाव गांव के ही एक अन्य युवक की ओर हो गया.
यह प्रेम संबंध जब सार्वजनिक हुआ और बबलू को इसकी भनक लगी, तो उसने विवाद के बजाय बातचीत का रास्ता चुना.
बबलू ने राधिका को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब उसने स्पष्ट कर दिया कि वह अपने प्रेमी के बिना नहीं रह सकती, तो बबलू ने बड़ा फैसला लिया. उसने गांव वालों और पंचायत के सामने राधिका को अपनी पसंद चुनने की आजादी दी.
राधिका ने अपने बच्चों और आठ साल के घर को छोड़ प्रेमी के साथ जाने का फैसला किया. इसके बाद बकायदा कोर्ट से नोटरी तैयार कराई गई और मंदिर में जयमाला की रस्म अदा कर दोनों को विदा किया गया.
समाज में अक्सर ऐसे त्रिकोणीय प्रेम संबंधों का अंत जघन्य अपराध या हत्या के रूप में देखने को मिलता है, लेकिन बबलू का यह कदम एक अलग मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल उन दो मासूम बच्चों के भविष्य पर है, जिनसे उनकी मां का साया छीन लिया गया है. बबलू ने अब अपने दोनों बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी अकेले उठाने का संकल्प लिया है.










