मेरठ, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (UP ATS) ने मेरठ और आसपास के जिलों में सक्रिय एक खौफनाक आतंकी नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। सीमा पार पाकिस्तान से संचालित यह मॉड्यूल सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए ‘हिंदू’ पहचान और कोड नेम का सहारा ले रहा था।
पकड़े गए मुख्य आरोपी शाकिब से हुई सघन पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पाकिस्तानी हैंडलर्स ने शाकिब को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि गजवा-ए-हिंद के एजेंडे पर काम करते हुए नेटवर्क का विस्तार किया जाए। जांच में पता चला कि इस साजिश के तहत शाकिब ने विकास और लोकेश नाम के दो हिंदू युवाओं को पैसों का लालच देकर अपने साथ मिलाया था।
पहचान छिपाने के लिए लोकेश को ‘सलीम’ और विकास को ‘जाहिद’ का कोड नेम दिया गया था। शाकिब ने लोकेश उर्फ सलीम का इस्तेमाल उन संवेदनशील धार्मिक स्थलों की रेकी के लिए किया, जहां किसी अन्य समुदाय के व्यक्ति का जाना संदिग्ध लग सकता था। हिंदू पहचान होने के कारण लोकेश बिना किसी रुकावट के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की टोह लेता रहा।
पाकिस्तानी आका गूगल लोकेशन साझा करते थे, जिसके आधार पर शाकिब और उसके गुर्गे संबंधित ठिकानों पर जाकर वीडियो रिकॉर्डिंग करते थे। इन वीडियो को एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए वापस सरहद पार भेजा जाता था। इस जासूसी के बदले आरोपियों को विदेशी स्रोतों से बड़ी रकम का भुगतान किया जा रहा था।
इस मॉड्यूल का दूसरा सिरा दुबई से जुड़ा पाया गया है। दुबई में बैठा आकिब नामक व्यक्ति शाकिब और पाकिस्तानी हैंडलर्स के बीच संपर्क की अहम कड़ी था। आकिब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पर AK-47 जैसे हथियारों के वीडियो साझा कर युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का काम कर रहा था।
एडीजी (कानून एवं व्यवस्था) अमिताभ यश के मुताबिक, आकिब के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। यूपी एटीएस इसे ‘हाइब्रिड टेररिज्म’ का हिस्सा मान रही है, जहां अपराधी अपनी असली धार्मिक और सामाजिक पहचान छिपाकर वार करते हैं। हाल ही में एटीएस ने बीड़ीएस छात्र हारिस अली को भी पकड़ा था, जो पाकिस्तान के निर्देश पर आईएसआईएस की विचारधारा फैला रहा था।
सुरक्षा एजेंसियां अब शाकिब के मोबाइल से मिले डेटा और बैंक खातों की जांच कर रही हैं। मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फैले इस नेटवर्क के अन्य संभावित संदिग्धों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।










