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Uttarakhand Assembly Election 2027 : भाजपा विधायकों का टिकट बचाने का आखिरी मौका, आलाकमान ने तय की डेडलाइन

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भाजपा आलाकमान ने अपने विधायकों को प्रदर्शन सुधारने के लिए 31 अक्टूबर तक का समय दिया है। पार्टी नवंबर और दिसंबर में दो नए सर्वे कराएगी, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर ही आगामी चुनाव में टिकटों का फैसला होगा।

Uttarakhand Assembly Election 2027 : भाजपा विधायकों को टिकट बचाने का आखिरी मौका, आलाकमान ने तय की डेडलाइन

HIGHLIGHTS

  • भाजपा आलाकमान ने सभी मौजूदा विधायकों को 31 अक्टूबर तक अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहने और लंबित विकास कार्य पूरे करने की डेडलाइन दी है।
  • आंतरिक सर्वे में 12 से अधिक विधायकों के खिलाफ एंटी-इंकंबेंसी (जन आक्रोश) की बात सामने आने के बाद पार्टी ने यह सुधारात्मक कदम उठाया है।
  • सरकार ने विकास कार्यों को गति देने के लिए महज 25 दिनों में 7300.28 करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
  • वर्ष 2022 में कम अंतर से जीती गई सीटों और कांग्रेस के मजबूत गढ़ मानी जाने वाली सीटों के लिए पार्टी अलग से विशेष रणनीति बना रही है।

देहरादून, 17 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के केंद्रीय नेतृत्व ने अपनी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। पार्टी ने अपने सभी मौजूदा विधायकों को जमीन पर प्रदर्शन सुधारने और जनता के बीच पैठ मजबूत करने का एक आखिरी मौका दिया है।

आलाकमान की ओर से सभी विधायकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे 31 अक्टूबर तक लगातार अपने-अपने क्षेत्रों में बने रहें और मुख्यमंत्री की घोषणाओं सहित सभी लंबित विकास कार्यों को धरातल पर उतारना सुनिश्चित करें।

पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों ने पुष्टि की है कि भाजपा नेतृत्व आगामी नवंबर और दिसंबर महीने में दो नए स्वतंत्र सर्वे कराने जा रहा है। इन सर्वे से मिलने वाली ग्राउंड रिपोर्ट ही आगामी चुनाव में टिकट वितरण का अंतिम और मुख्य आधार बनेगी। हालांकि, संगठनात्मक स्तर पर पार्टी फिलहाल किसी भी सिटिंग विधायक का टिकट काटने की जल्दबाजी में नहीं है, लेकिन चुनावी समर में अंतिम चयन केवल ‘जिताऊ क्षमता’ (विनेबिलिटी) के पैमाने पर ही तय किया जाएगा।

सर्वे में 12 विधायकों के खिलाफ एंटी इंकंबेंसी के संकेत

पार्टी की ओर से अब तक विभिन्न स्तरों पर कराए गए तीन आंतरिक मूल्यांकनों में भाजपा की स्थिति मजबूत दिखाई दी है, लेकिन स्थानीय स्तर पर कुछ विधायकों के प्रति जनता में नाराजगी की बात भी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 12 से अधिक विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में एंटी-इंकंबेंसी का असर देखा गया है। इसी कमजोरी को दूर करने के लिए हाईकमान ने विधायकों को मंत्रियों और मुख्यमंत्री कार्यालय से लगातार संपर्क बनाए रखने को कहा है, ताकि जनहित की योजनाओं को प्रशासनिक स्तर पर कोई रुकावट न आए।

कांग्रेस के गढ़ और कमजोर सीटों के लिए विशेष चक्रव्यूह

इस बार भाजपा का विशेष ध्यान उन सीटों पर है जहां साल 2022 के चुनाव में जीत का अंतर बेहद कम था, या जो पारंपरिक रूप से कांग्रेस का मजबूत गढ़ रही हैं।

कम मार्जिन वाली सीटें: श्रीनगर, टिहरी, गदरपुर और नरेंद्रनगर जैसी विधानसभा सीटों पर पिछले चुनाव में भाजपा की जीत का अंतर महज 587 से लेकर 1798 वोटों के बीच सिमट गया था।

चुनौतीपूर्ण सीटें: चकराता, धारचूला, भगवानपुर और पिरान कलियर जैसी सीटों पर भाजपा को अब तक सफलता नहीं मिल सकी है। इन क्षेत्रों के लिए संगठन को विशेष रणनीतिक कार्ययोजना पर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकारी घोषणाओं और जीओ (GO) पर बढ़ा फोकस

विधायकों की मांग और चुनावी प्राथमिकताओं को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी सरकार के स्तर से विकास योजनाओं को तेजी से हरी झंडी दे रहे हैं।

पिछले साढ़े चार वर्षों में की गई कुल 4,323 घोषणाओं में से 2,444 सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं के शासनादेश (GO) जारी किए जा चुके हैं। अधिकारियों को बाकी बचे हुए प्रस्तावों के जीओ आगामी 15 जून तक हर हाल में जारी करने की समयसीमा दी गई है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने इस संबंध में बताया कि पार्टी का एकमात्र लक्ष्य आगामी विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज करना है। इसी उद्देश्य से हर विधानसभा क्षेत्र की कड़ाई से मॉनिटरिंग की जा रही है और पूर्व में मिले सर्वे इनपुट के आधार पर विधायकों को जनता के बीच सक्रियता बढ़ाने की हिदायत दी जा चुकी है।

केंद्रीय दिशा-निर्देशों के बाद से ही देहरादून के बजटीय गलियारों से दूरी बनाकर तमाम मंत्री और विधायक अपने क्षेत्रों में कैंप कर रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री के कुमाऊं और गढ़वाल के लगातार हो रहे दौरों से पार्टी इस माहौल को भुनाने की कोशिश में है।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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