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Uttarakhand Monsoon : चारधाम यात्रा पर ब्रेक! सिरोबगड़ में लैंडस्लाइड से बदरीनाथ हाईवे बंद, 10 KM तक लगा भारी जाम

ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिरोबगड़ में भारी भूस्खलन के कारण शुक्रवार रात से यातायात ठप है और सड़क के दोनों ओर 10 किलोमीटर लंबा जाम लग गया है। मौसम विभाग ने उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में 15 जुलाई 2026 तक भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।

Uttarakhand Monsoon : चारधाम यात्रा पर ब्रेक! सिरोबगड़ में लैंडस्लाइड से बदरीनाथ हाईवे बंद, 10 KM तक लगा भारी जाम

HIGHLIGHTS

  • बदरीनाथ हाईवे सिरोबगड़ में शुक्रवार रात दो बजे से बंद है।
  • हाईवे बंद होने से दोनों तरफ 10 किलोमीटर लंबा जाम लगा।
  • थराली-डूंगरी मार्ग बाधित होने से 16 गांवों का संपर्क कटा।
  • मौसम विभाग ने 15 जुलाई 2026 तक अलर्ट जारी किया।

रुद्रप्रयाग, 11 जुलाई, 2026 (दून हॉराइज़न)।

Uttarakhand Monsoon : ऋषिकेश–बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर श्रीनगर और रुद्रप्रयाग के बीच स्थित सिरोबगड़–खांकरा लैंडस्लाइड जोन में भारी भूस्खलन हुआ है। शुक्रवार रात करीब दो बजे से नेशनल हाईवे पूरी तरह बंद पड़ा है। उत्तराखंड की जीवनरेखा माना जाने वाला यह हिस्सा तीन दशक से खतरनाक बना हुआ है। स्थायी समाधान न होने से इस मानसून में भी चारधाम यात्रा संकट में पड़ गई है।

मौसम विभाग ने 15 जुलाई 2026 तक पूरे उत्तराखंड में भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। सिरोबगड़ में पहाड़ी से लगातार मलबा और बड़े बोल्डर गिर रहे हैं। हाईवे खोलने के काम में लगी मशीनें और कर्मचारी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। मिनी गोवा बीच से लेकर खांकरा तक का पूरा इलाका भूस्खलन की चपेट में आ चुका है।

सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस प्रशासन ने कई जगहों पर वाहनों को रोक दिया है। हाईवे के दोनों तरफ 10 किलोमीटर लंबा जाम लग गया है। हजारों श्रद्धालु, पर्यटक और स्थानीय लोग रात से सड़कों पर फंसे हैं। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले भारी वाहन भी फंसे पड़े हैं।

छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को बारिश और ठंड के बीच गाड़ियों में रात काटनी पड़ी। प्रशासन ने छोटे वाहनों को वैकल्पिक छांतीखाल मोटर मार्ग से श्रीनगर की तरफ डायवर्ट करना शुरू किया है। भारी वाहनों के पास हाईवे पर खड़े रहने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

ट्रैफिक पुलिस रुद्रप्रयाग के टीएसआई कैलाश शर्मा ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि मशीनें लगातार मलबा हटा रही हैं लेकिन ऊपर से लगातार पत्थर गिर रहे हैं। सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ही यातायात बहाल किया जाएगा।

स्थानीय पूर्व प्रधान नरेंद्र ममगाईं ने व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। सिरोबगड़ लैंडस्लाइड जोन पिछले 30 वर्षों से बदरीनाथ हाईवे का सबसे संवेदनशील हिस्सा है। कोई ठोस वैज्ञानिक उपचार आज तक नहीं हुआ। हर बरसात में यही बदतर दृश्य दोहराया जाता है। यात्रा ठप होती है और लोग परेशान होते हैं।

थराली क्षेत्र में देर रात हुई तेज बारिश से थराली-देवाल मोटर मार्ग घाघली गदेरे के पास भारी मलबे की चपेट में आ गया। सड़क पर मलबा जमा होने से वाहनों के पहिये थम गए। संबंधित विभाग ने जेसीबी मशीन लगाकर कुछ समय बाद इस मार्ग को साफ कराकर यातायात चालू कराया।

थराली-कुराड़-प्राथा मोटर मार्ग भी घाघली गदेरे में आए मलबे के कारण पूरी तरह बंद है। स्थानीय ग्रामीणों का रोजमर्रा के कामों के लिए तहसील मुख्यालय आना-जाना बंद हो चुका है। राड़ीबगड़ गांव के लोग घाघली गदेरे के तेज बहाव और लगातार बढ़ते मलबे से दहशत में हैं।

ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। समय रहते गदेरे के किनारे सुरक्षा दीवार बन जाती तो यह नौबत नहीं आती। लोग रात-रात भर जागकर डर के साए में काट रहे हैं। प्रशासन से तुरंत स्थायी सुरक्षा कार्य शुरू करने की मांग की गई है।

थराली विधानसभा क्षेत्र के नारायणबगड़ बाजार के पास कर्णप्रयाग-ग्वालदम राष्ट्रीय राजमार्ग भी भूस्खलन से प्रभावित हुआ। सुबह के समय सिर्फ छोटे वाहनों को निकाला जा सका। बीआरओ की टीम ने मौके पर पहुंचकर मलबा साफ किया तब जाकर बड़े वाहनों की आवाजाही शुरू हो पाई।

थराली-डूंगरी मोटर मार्ग पर पहाड़ी से लगातार विशाल बोल्डर गिर रहे हैं। पीएमजीएसवाई के अधीन आने वाली यह सड़क हर साल बरसात में बंद हो जाती है। सोल घाटी के 16 गांवों का संपर्क तहसील मुख्यालय से पूरी तरह कट गया है। ग्रामीणों को कई किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ रहा है।

प्रशासन ने मानसून से पहले इन 16 गांवों में तीन महीने का राशन एडवांस में स्टोर कर दिया था। सड़कों का स्थायी उपचार न होने से ग्रामीण हर साल इस व्यवस्था से जूझते हैं। प्रशासन ने एडवाइजरी जारी कर लोगों को नदी-नालों और संवेदनशील पहाड़ी रास्तों से दूर रहने की हिदायत दी है।

उत्तराखंड मौसम विज्ञान केंद्र ने 15 जुलाई 2026 तक का विस्तृत बुलेटिन जारी किया है। अगले पांच दिनों तक राज्य के अलग-अलग हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश का येलो अलर्ट है। आज 11 जुलाई को देहरादून, पिथौरागढ़, उधम सिंह नगर, चंपावत, नैनीताल और बागेश्वर जिलों में भारी बारिश की चेतावनी है। अन्य पहाड़ी जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ेंगी।

रविवार 12 जुलाई को राज्य के बागेश्वर, चमोली, रुद्रप्रयाग, नैनीताल और चंपावत जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश का अनुमान लगाया गया है। हरिद्वार और उधम सिंह नगर जिलों में बिजली चमकने और आकाशीय गर्जना की चेतावनी दी गई है। पर्वतीय इलाकों में बारिश के तीव्र दौर चलेंगे।

सोमवार 13 जुलाई को बागेश्वर, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में भारी बारिश का संकट रहेगा। बाकी पर्वतीय जिलों में बारिश की रफ्तार तेज रहेगी। हरिद्वार और उधम सिंह नगर जिलों में सोमवार को बारिश नहीं होगी लेकिन घने बादल छाए रहेंगे और बिजली चमकेगी।

मंगलवार 14 जुलाई और बुधवार 15 जुलाई को मौसम का मिजाज पूरे राज्य में एक जैसा रहेगा। उत्तराखंड के सभी जिलों में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जाएगी। भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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