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Dhami Cabinet Decision : मदरसों पर धामी सरकार का बड़ा एक्शन! खत्म किया अरेबिया मदरसों का अनुदान

उत्तराखंड सरकार ने धामी कैबिनेट की बैठक में अरेबिया मदरसों को मिलने वाले सरकारी अनुदान को पूरी तरह से समाप्त करने का निर्णय लिया है। प्रदेश में नया अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम लागू होने के बाद अब सभी 452 मदरसों को संचालन के लिए अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से नई मान्यता लेनी अनिवार्य होगी।

Dhami Cabinet Decision : मदरसों पर धामी सरकार का बड़ा एक्शन! खत्म किया अरेबिया मदरसों का अनुदान

HIGHLIGHTS

  • धामी कैबिनेट ने मदरसा अनुदान समाप्त करने पर मुहर लगाई।
  • वित्तीय वर्ष 2027-28 से बजट मानक मद बंद होगा।
  • 1 जुलाई 2026 से नया अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम लागू।
  • प्रदेश के 452 मदरसों के 50 हजार छात्र प्रभावित होंगे।

देहरादून, 11 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।

Dhami Cabinet Decision : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में अरेबिया मदरसों के अनुदान को पूरी तरह से खत्म करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई है। कैबिनेट ने राज्य में मदरसा शिक्षा के बुनियादी ढांचे को बदलने के लिए कुल 10 महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी है।

उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम और गैर-सरकारी अरबी-फारसी मदरसा मान्यता नियम की अवधि 30 जून 2026 को समाप्त हो चुकी है। राज्य सरकार ने इसके तुरंत बाद 1 जुलाई 2026 से पूरे प्रदेश में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम को प्रभावी रूप से लागू कर दिया है।

नियमों में हुए इस बदलाव के कारण राज्य सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष 2027-28 से अरेबिया मदरसों को दी जाने वाली अनुदान योजना के बजट मानक मद को पूरी तरह समाप्त करने का वैधानिक निर्णय लिया है।

उत्तराखंड में वर्तमान समय में मदरसा बोर्ड से पंजीकृत लगभग 452 मदरसे संचालित किए जा रहे हैं। अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम लागू होने के बाद इन सभी संचालित संस्थाओं को उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से नए सिरे से मान्यता प्राप्त करनी होगी। बिना मान्यता के किसी भी मदरसे का संचालन नहीं किया जा सकेगा।

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इन 452 मदरसों में से 400 मदरसे ऐसे हैं जहां कक्षा 1 से लेकर 8वीं तक की पढ़ाई होती है। शेष 52 मदरसों में कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं तक की उच्च शिक्षा संचालित की जा रही है। इन शिक्षण संस्थाओं में वर्तमान में कुल 50 हजार बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

नए कानून के तहत सभी पंजीकृत मदरसों में अब दोहरी पाली यानी दो शिफ्टों में अनिवार्य रूप से पढ़ाई कराई जाएगी। सुबह की पहली पाली में छात्रों को हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और कंप्यूटर जैसे आधुनिक विषयों का अध्ययन करना अनिवार्य होगा।

दोपहर बाद की शाम की पाली में छात्रों को पारंपरिक धार्मिक शिक्षा दी जाएगी। इसके साथ ही पाठ्यक्रम में भारतीय संविधान, मानवाधिकार, राष्ट्रीय एकता और नैतिक मूल्यों के पाठ को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है।

अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम की इस नई व्यवस्था के तहत जो भी मदरसे राज्य शिक्षा विभाग के कड़े मानकों पर पूरी तरह खरे उतरेंगे, वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को राज्य शिक्षा बोर्ड का आधिकारिक प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।

सूबे के 452 पंजीकृत मदरसों में से अब तक 158 मदरसों ने नई व्यवस्था के तहत मान्यता प्राप्त करने के लिए विभाग में अपने आवेदन जमा कर दिए हैं। 1 जुलाई को प्राधिकरण की ओर से 9 अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाओं को नई मान्यता जारी भी की जा चुकी है।

मान्यता प्राप्त करने वाली इन 9 संस्थाओं में 7 मदरसे, सिख समुदाय का 1 स्कूल और जैन समुदाय का 1 स्कूल शामिल है। सरकार ने राज्य के सभी छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षिक संस्थानों की मान्यता के लिए अब एक समान केंद्रीकृत व्यवस्था लागू कर दी है।

शिक्षा विभाग के तय मानकों के आधार पर विभाग की विशेष टीमें इन सभी आवेदित मदरसों का स्थलीय निरीक्षण यानी फिजिकल वेरिफिकेशन करेंगी।

जांच के दौरान जो भी मदरसे सरकारी मानकों को पूरा करते हुए पाए जाएंगे, केवल उन्हीं को आगे संचालन के लिए मान्यता पत्र दिया जाएगा। मानकों में कमियां पाए जाने वाले मदरसों को ढांचागत व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के लिए विभाग की तरफ से एक निश्चित समय सीमा दी जाएगी।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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