देहरादून, 26 जून, 2026 (दून हॉराइज़न)।
Uttarakhand Weather Alert : उत्तराखंड के पिथौरागढ़, बागेश्वर, नैनीताल और चंपावत जिले में 29 जून से लेकर दो जुलाई 2026 तक मूसलाधार बारिश होने जा रही है। देहरादून मौसम विज्ञान केंद्र ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इन सभी क्षेत्रों में येलो अलर्ट की घोषणा कर दी है।
मौसम वैज्ञानिक रोहित थपलियाल ने आधिकारिक बुलेटिन जारी करते हुए बताया कि कुमाऊं के अधिकांश हिस्सों में 28 जून 2026 से ही बादलों की गड़गड़ाहट के साथ सिस्टम बेहद सक्रिय हो जाएगा। गढ़वाल के कुछ चुनिंदा इलाकों में भी इसी समय से तेज बौछारें पड़ना शुरू हो जाएंगी।

पहाड़ी रास्तों पर सफर करने वाले मुसाफिरों और संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों के पास रहने वाले स्थानीय निवासियों को अत्यधिक सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। तीव्र वेग वाली हवाएं और लगातार पानी गिरने से चट्टानों के खिसकने का खतरा बढ़ जाता है।
देहरादून मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि 29 जून से एक जुलाई 2026 के बीच पूरे प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। पर्वतीय जिलों में इस दौरान अचानक जलस्तर बढ़ने की आशंका गहरा गई है।
पक्के मकानों के भीतर रहने और आकाशीय बिजली चमकने के दौरान खिड़की-दरवाजे पूरी तरह बंद रखने की सख्त हिदायत जारी की गई है। बिजली का संचालन करने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, लोहे के खंभों और ऊंचे पेड़ों से दूरी बनाए रखना इस मौसम में बेहद जरूरी है।
छोटे नदी-नालों के किनारे बसी बस्तियों और निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को प्रशासन ने सुरक्षित ठिकानों पर नजर रखने को कहा है। पहाड़ों में अचानक आने वाले मलबे और पानी के तेज बहाव से बस्तियों को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
राज्य के मैदानी जिलों में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश दर्ज की जाएगी। मैदानी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी जलभराव वाले रास्तों पर गाड़ी न दौड़ाने और संभलकर चलने को कहा गया है।
शुरुआती चरण में 27 और 28 जून 2026 को उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने का अनुमान लगाया गया है। इस दौरान बादलों की तीव्र गर्जना के साथ बिजली गिरने की घटनाएं सामने आ सकती हैं।

अगले दो दिनों के भीतर पर्वतीय और कुछ मैदानी इलाकों में प्री-मॉनसून जैसी हल्की फुहारें गिरेंगी। 28 जून की रात के बाद से ही असली रफ्तार दिखेगी जब बारिश का मुख्य सिस्टम पूरे राज्य को अपनी जद में ले लेगा।










