चमोली, 26 जून 2026 (दून हॉराइज़न)।
Chamoli landslide : गुरुवार रात ठीक 12 बजे नारायणबगड़ बाजार के ठीक ऊपर स्थित पहाड़ी दरक गई। गड़गड़ाहट के साथ आए मलबे और भारी पानी के सैलाब ने गहरी नींद में सोए स्थानीय लोगों की सांसें अटका दीं। चारों तरफ चीख-पुकार मच गई।
ग्वालदम हाईवे सुबह छह बजे तक पूरी तरह मलबे के ढेर में तब्दील रहा। ग्रिफ के जवानों ने रात ढाई बजे से मोर्चा संभालकर मलबा हटाया और सुबह जाकर सड़क साफ कराई। सामाजिक कार्यकर्ता जयबीर कंडारी गुड्डू ने बताया कि मलबे में स्थानीय व्यापारियों की दुकानें, इंटर कॉलेज और स्थानीय अस्पताल पूरी तरह पट चुके हैं। अस्पताल परिसर में खड़ी एंबुलेंस, कई कारें, स्कूटी और मोटर साइकिलें मलबे के नीचे दबी हुई हैं।
पहाड़ी पर ड्रेनेज के लिए नाला न होना इस भयंकर जलभराव की मुख्य वजह बना हुआ है। रात के वक्त पिंडर नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया था, हालांकि सुबह इसमें आंशिक कमी दर्ज की गई। चमोली के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने पुष्टि की है कि हाईवे चालू कर दिया गया है। गनीमत रही कि हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ।
उत्तराखंड में हर साल मानसून के सीजन में 1199 सड़कें सीधे तौर पर बह जाती हैं। लगातार होने वाले भूस्खलन से नेशनल हाईवे, राज्यमार्ग और जिला मार्ग बुरी तरह छिन्न-भिन्न हो जाते हैं। लोक निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने यमुना कॉलोनी में बुलाई आपात बैठक में अधिकारियों से सीधे एक्शन प्लान तलब किया है। संवेदनशील पहाड़ों को काटकर बनाई गई ये सड़कें हर साल यात्रियों की जान जोखिम में डालती हैं।
लोनिवि ने अब तक 3968 पैच वर्क के काम पूरे करने का दावा किया है। सतपाल महाराज ने कड़े निर्देश दिए हैं कि सड़कें बंद होते ही बंद रास्तों की सूचना सीधे यात्रियों के मोबाइल पर मैसेज के जरिए भेजी जाए। वैकल्पिक रूटों को तुरंत चालू हालत में रखा जाए।
सिंचाई विभाग ने राज्यभर में बाढ़ और भारी जलभराव से निपटने के लिए 304 संवेदनशील हॉटस्पॉट चिन्हित किए हैं। नदियों के बहाव को नियंत्रित करने के लिए चैनेलाइजेशन का काम तेज कर दिया गया है। मॉनिटरिंग को मजबूत करने के लिए वायरलैस स्टेशनों को अलर्ट पर रखा गया है। पूरे सूबे में सुरक्षा के लिहाज से 113 बाढ़ चौकियां स्थापित की जा चुकी हैं।
दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा फिलहाल सूरत, इंदौर, मंडला, डाल्टनगंज और मोतिहारी के रास्ते आगे सरक रही है। देहरादून मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. सीएस तोमर के मुताबिक अगले तीन से चार दिनों के भीतर मानसून उत्तराखंड के कुछ इलाकों में एंट्री ले सकता है। मैदानी इलाकों में रहने वाले लोग फिलहाल भयंकर उमस और तीखी धूप से बेहाल हैं।
गुरुवार को राजधानी देहरादून का अधिकतम तापमान सामान्य से चार डिग्री ऊपर जाकर 36.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। पंतनगर में पारा 39.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया जिससे मैदानी बेल्ट में लू जैसे हालात बने रहे। पर्वतीय जिलों में आकाशीय बिजली चमकने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने का येलो अलर्ट जारी किया गया है। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है।











