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Devprayag Road Protest : आजादी के 79 साल बाद भी सड़क को तरस रहे देवप्रयाग के गांव, गुस्से में निकाला विशाल मशाल जुलूस

टिहरी गढ़वाल के देवप्रयाग विधानसभा अंतर्गत धार पंयाकोटी-कुनियाड़-रतकली क्षेत्र में सड़क निर्माण न होने से नाराज ग्रामीणों ने उग्र मशाल जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया है. ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग और शासन-प्रशासन पर केवल खोखले सर्वे करने का आरोप लगाते हुए आगामी चुनावों के पूर्ण बहिष्कार का अल्टीमेटम दिया है.

Devprayag Road Protest : आजादी के 79 साल बाद भी सड़क को तरस रहे देवप्रयाग के गांव, गुस्से में निकाला विशाल मशाल जुलूस

HIGHLIGHTS

  • आजादी के 79 साल बाद भी ग्रामीण सड़क संपर्क से पूरी तरह वंचित हैं.
  • पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने वर्ष 2017-18 में की थी सड़क घोषणा.
  • देवप्रयाग कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्तम सिंह असवाल के नेतृत्व में निकला मशाल जुलूस.
  • ग्रामीणों ने आगामी चुनावों में मतदान के पूर्ण बहिष्कार की सीधी चेतावनी दी.

देवप्रयाग, 26 जून 2026 (दून हॉराइज़न)।

Devprayag Road Protest : टिहरी गढ़वाल जिले के देवप्रयाग विधानसभा अंतर्गत आने वाले धार पंयाकोटी-कुनियाड़-रतकली क्षेत्र के लोगों के सब्र का बांध अब पूरी तरह टूट चुका है. सड़क की मांग को लेकर वर्षों से परेशान ग्रामीणों ने गुरुवार की रात को जिला कांग्रेस कमेटी देवप्रयाग के जिलाध्यक्ष और वर्तमान जिला पंचायत सदस्य उत्तम सिंह असवाल की अगुवाई में एक विशाल मशाल जुलूस निकाला. इस दौरान उग्र ग्रामीणों ने सरकार और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

आजादी के 79 बरस बीत जाने के बाद भी यह पूरा इलाका एक अदद पक्की सड़क के लिए तरस रहा है. बार-बार होने वाले विभागीय सर्वे और नेताओं के खोखले आश्वासनों से तंग आकर अब लोगों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है. प्रदर्शनकारियों का साफ आरोप है कि मूलभूत सुविधाओं के अभाव में क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह खाली हो चुका है और बचे-कुचे लोग रोज घुट-घुट कर जीने को मजबूर हैं.

पूर्व सीएम की घोषणा पर सात साल से कुंडली मारे बैठा तंत्र

धार पंयाकोटी-कुनियाड़-रतकली मोटर मार्ग को लेकर सियासत और प्रशासनिक लापरवाही का लंबा इतिहास रहा है. साल 2017-18 में उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस सड़क के निर्माण की बाकायदा आधिकारिक घोषणा की थी. इस बात को पूरे सात साल बीत चुके हैं लेकिन धरातल पर एक ईंट तक नहीं रखी गई है.

क्षेत्रीय विधायक विनोद कंडारी लगातार यह दावे ठोक रहे हैं कि सड़क का निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा. कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्तम सिंह असवाल ने विधायक की कार्यप्रणाली पर सीधे तीखे सवाल दागे हैं. असवाल का कहना है कि विधायक जनता के बीच जाकर जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की बात कह रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि आज भी लोनिवि और पीएमजीएसवाई की टीमें मौके पर सिर्फ सर्वे ही कर रही हैं. जब सर्वे का काम ही पूरा नहीं हुआ है तो टेंडर जारी होने का झूठ क्यों परोसा जा रहा है. जनता को अब हवाई घोषणाएं नहीं बल्कि मौके पर काम चाहिए.

पलायन से खाली हुए गांव, गंभीर मरीजों को कंधे पर ढोने की मजबूरी

सड़क संपर्क न होने का खामियाजा इस पूरे इलाके की डेमोग्राफी भुगत रही है. चिकित्सा और आपातकालीन परिस्थितियों में ग्रामीणों की मुसीबतें चरम पर पहुंच जाती हैं. किसी भी ग्रामीण के बीमार होने या गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने के लिए आज भी डोली या कंधे का सहारा लेना पड़ता है. समय पर इलाज न मिलने से कई बार स्थितियां जानलेवा हो जाती हैं.

विभागीय आंकड़ों की बाजीगरी भी ग्रामीणों को चिढ़ा रही है. लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा इस मार्ग पर तीन किलोमीटर का सर्वे किया गया है. वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) की टीम ने सात किलोमीटर हिस्से का सर्वे कागजों पर मुकम्मल दिखाया है.

कुल दस किलोमीटर के इस पैच पर दोनों ही विभाग सालों से फाइलों को इधर से उधर घुमाने से आगे नहीं बढ़ पाए हैं. बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर के इसी अभाव के चलते युवा पीढ़ी तेजी से शहरों का रुख कर रही है और कई पुश्तैनी गांव पूरी तरह खंडहर में तब्दील होने की कगार पर पहुंच गए हैं.

मशाल जुलूस के दौरान स्थानीय ग्रामीणों का नेतृत्व कर रहे महिपाल सिंह पंवार और पुरुषोत्तम उनियाल ने सरकार को अंतिम चेतावनी दी है. सालों से केवल फाइलों की आवाजाही और पैमाइश देखकर थक चुके ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि इस बार भी उनके साथ धोखा हुआ तो वे चुप नहीं बैठेंगे.

धार पंयाकोटी, कुनियाड़ और रतकली के समस्त ग्रामीणों ने एक सुर में ऐलान किया है कि अगर धरातल पर जल्द काम शुरू नहीं होता है, तो वे आने वाले तमाम चुनावों में वोट नहीं डालेंगे और पोलिंग बूथों पर सन्नाटा पसरा रहेगा.

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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