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पहाड़ों की ढलान पर अब नहीं थमेंगी सांसें, रुद्रप्रयाग में गर्भवती महिलाओं के लिए शुरू हुई फ्री हेली सेवा

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में दुर्गम क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पहुंचाने के लिए निशुल्क हेलीकॉप्टर सेवा का विधिवत आगाह किया गया है। सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना और हाई-रिस्क प्रेगनेंसी में त्वरित इलाज सुनिश्चित करना है।

पहाड़ों की ढलान पर अब नहीं थमेंगी सांसें, रुद्रप्रयाग में गर्भवती महिलाओं के लिए शुरू हुई फ्री हेली सेवा

HIGHLIGHTS

  • रुद्रप्रयाग जिले के जखोली से पहली गर्भवती महिला को हेलीकॉप्टर के जरिए जिला अस्पताल शिफ्ट किया गया।
  • स्वास्थ्य और नागरिक उड्डयन विभाग के साझा प्रयास से यह सेवा पूरी तरह से मुफ्त प्रदान की जा रही है।
  • सरकार की योजना राज्य के अन्य बेहद दुर्गम और सड़क विहीन क्षेत्रों में भी इस एयर एम्बुलेंस सेवा का विस्तार करने की है।

रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को लेकर बरसों से चली आ रही चुनौती को खत्म करने के लिए धामी सरकार ने एक निर्णायक कदम उठाया है। बुधवार को रुद्रप्रयाग जिले में गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष हेलीकॉप्टर सेवा का शुभारंभ किया गया। इस सेवा के चालू होते ही पहले दिन जखोली के सुदूर इलाके की रहने वाली उदिना को एयरलिफ्ट कर जिला अस्पताल पहुंचाया गया।

जखोली जैसे दुर्गम क्षेत्रों में सड़क मार्ग से अस्पताल पहुंचना न केवल समय लेने वाला होता है, बल्कि गर्भवती महिलाओं के लिए जोखिम भरा भी रहता है। उदिना को सुरक्षित प्रसव और विशेषज्ञ चिकित्सा देखरेख की तत्काल आवश्यकता थी, जिसे देखते हुए प्रशासन ने बिना देरी किए हेलीकॉप्टर की व्यवस्था की। समय पर अस्पताल पहुंचने और उचित मेडिकल अटेंशन मिलने से अब पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है।

प्रदेश के स्वास्थ्य और नागरिक उड्डयन विभाग के आपसी तालमेल से शुरू की गई यह एयर एम्बुलेंस सेवा मरीजों के लिए पूरी तरह निशुल्क है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने स्पष्ट किया कि यह सेवा विशेष रूप से उन गांवों के लिए वरदान साबित होगी जहां सड़क संपर्क या तो है ही नहीं या फिर बेहद खराब स्थिति में है। आपातकालीन परिस्थितियों में यह ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर इलाज दिलाने में गेम-चेंजर साबित होगी।

राज्य के स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे के मुताबिक, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के स्पष्ट निर्देश हैं कि राज्य का भौगोलिक ढांचा किसी की जान पर भारी नहीं पड़ना चाहिए। यह पहल विशेष रूप से ‘हाई-रिस्क’ प्रेगनेंसी वाले मामलों के लिए शुरू की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में तकनीक और प्रशासनिक सुधारों के जरिए इस सेवा को और अधिक प्रभावी बनाया जाए ताकि कोई भी महिला इलाज के अभाव में दम न तोड़े।

पहाड़ों में बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे की कमी को देखते हुए यह कदम मातृ एवं शिशु मृत्यु दर (MMR/IMR) में बड़ी गिरावट ला सकता है। गौरतलब है कि उत्तराखंड के दूरस्थ गांवों में आज भी डोली या पालकी के सहारे मरीजों को सड़क तक लाया जाता है। ऐसे में हेली सेवा का विस्तार राज्य की समावेशी स्वास्थ्य नीति का एक बड़ा प्रमाण बनकर उभरा है। आने वाले दिनों में चमोली और उत्तरकाशी जैसे जिलों में भी इसी तर्ज पर सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की तैयारी है।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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