रामनगर। पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बाद अब इसका सीधा असर देवभूमि की रसोई और पर्यटन उद्योग पर दिखने लगा है। विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट नगरी रामनगर में पिछले पांच दिनों से रसोई गैस किल्लत (LPG Shortage) के चलते हाहाकार मचा हुआ है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने एलपीजी के वैश्विक आयात नेटवर्क को बाधित कर दिया है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 62 प्रतिशत एलपीजी इन्हीं खाड़ी देशों से आयात करता है। युद्ध की स्थिति के कारण सप्लाई चेन टूटने से उत्तराखंड के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में सिलेंडरों की किल्लत बढ़ गई है। रामनगर की गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं और होटल संचालकों की भारी भीड़ जमा हो रही है।
पर्यटन कारोबार पर संकट के बादल

रामनगर के मुख्य आर्थिक आधार यानी पर्यटन उद्योग के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। कॉर्बेट नेशनल पार्क में इस समय पर्यटकों की भारी आवाजाही है। लेकिन कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई ठप होने से रिसॉर्ट्स और रेस्टोरेंट संचालकों के पास स्टॉक खत्म होने की कगार पर है।
होटल मालिकों का कहना है कि यदि अगले दो-तीन दिनों में स्थिति सामान्य नहीं हुई, तो उन्हें मेन्यू में कटौती करनी पड़ेगी। कई छोटे ढाबों और रेस्टोरेंट में तो खाना बनाने के लिए वैकल्पिक संसाधनों की तलाश शुरू हो गई है। पर्यटकों को समय पर गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।
बुकिंग का बढ़ा बैकलॉग
स्थानीय गैस एजेंसी के अधिकारी गौरव पांडे ने पुष्टि की है कि मुख्य प्लांट से ही गैस की सप्लाई में भारी कटौती की गई है। मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर इतना बढ़ गया है कि बुकिंग का बैकलॉग हर बीतते दिन के साथ गहराता जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, केवल कमर्शियल ही नहीं बल्कि घरेलू गैस की आपूर्ति पर भी दबाव बढ़ गया है।
आम उपभोक्ताओं को सिलेंडर के लिए हफ्तों का इंतजार करना पड़ रहा है। गैस एजेंसियों का कहना है कि वे स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जब तक ऊपर से सप्लाई सुचारू नहीं होती, तब तक राहत मिलना मुश्किल है। फिलहाल, रामनगर के लोग और व्यापारी इस वैश्विक तनाव के जल्द खत्म होने की दुआ कर रहे हैं।









