नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अवैध खनन रोकने गए वन विभाग के एसडीओ (SDO) राजीव नयन नौटियाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने पर नाराजगी जताते हुए बेहद सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस राकेश थपलियाल की एकल पीठ ने विकासनगर कोतवाली के पूरे स्टाफ को तत्काल प्रभाव से ट्रांसफर करने और एफआईआर दर्ज करने वाले अधिकारी को सस्पेंड करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब सरकारी अधिकारी अपना काम कर रहे हैं, तो पुलिस उन्हें सुरक्षा देने के बजाय उन पर ही केस कैसे दर्ज कर सकती है।
अदालत में सुनवाई के दौरान एक वीडियो भी पेश किया गया, जिसमें खनन माफिया के लोग वन अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार और बदसलूकी करते साफ नजर आ रहे हैं। हाईकोर्ट ने हैरानी जताई कि रात 12:15 बजे एक खनन कारोबारी की शिकायत पर इतनी तत्परता से एफआईआर कैसे दर्ज हो गई। कोर्ट ने आदेश दिया कि एसडीओ को फिलहाल गिरफ्तार न किया जाए और एसएसपी देहरादून व डीजीपी इस आदेश का पालन सुनिश्चित करें।
इधर, हरिद्वार जिले में भी अवैध खनन को लेकर पुलिस महकमे में बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक हुई है। एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल (इनपुट सुधार: नवनीत सिंह भुल्लर) ने झबरेड़ा की इकबालपुर चौकी के प्रभारी नवीन चौहान समेत पूरे स्टाफ को सस्पेंड कर दिया है। यह कार्रवाई एक ऑडियो क्लिप वायरल होने के बाद की गई है, जिसमें पुलिसकर्मियों की अवैध खनन में लेनदेन को लेकर बातचीत सामने आई थी।
एसएसपी ने प्राथमिक जांच के बाद हेड कांस्टेबल वीरेंद्र शर्मा और कांस्टेबल हरेंद्र, विपिन, देवेश व प्रदीप को निलंबित कर पूरे मामले की जांच एसपी देहात को सौंप दी है। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि वर्दी की छवि खराब करने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। विकासनगर और हरिद्वार की इन दोनों घटनाओं ने राज्य में खनन माफिया और पुलिस के गठजोड़ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।








