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देहरादून के SGRR मेडिकल कॉलेज में सनसनी, पीजी डॉक्टर ने कार के भीतर दी जान

देहरादून के एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज की एमएस तृतीय वर्ष की छात्रा डॉ. तन्वी ने जहरीला इंजेक्शन लगाकर आत्महत्या कर ली है। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने विभाग की एचओडी डॉ. प्रियंका गुप्ता के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

देहरादून के SGRR मेडिकल कॉलेज में सनसनी, पीजी डॉक्टर ने कार के भीतर दी जान

HIGHLIGHTS

  • डॉ. तन्वी ने खुद को कैनुला लगाकर नसों में घातक जहर इंजेक्ट किया।
  • मृतका के पिता ने कार का शीशा तोड़कर अचेत बेटी को बाहर निकाला था।
  • कॉलेज प्रशासन का दावा है कि छात्रा पहले से ही मानसिक अवसाद का शिकार थी।

देहरादून। श्री गुरु राम राय (SGRR) मेडिकल कॉलेज की एक होनहार पीजी डॉक्टर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया है। नेत्र रोग विभाग (Ophthalmology) में एमएस तृतीय वर्ष की छात्रा डॉ. तन्वी ने अपनी ही कार के भीतर खुद को जहरीला इंजेक्शन लगाकर जीवन लीला समाप्त कर ली। पुलिस को तन्वी का शव श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के पास खड़ा उनकी कार में अचेत अवस्था में मिला।

अंबाला निवासी डॉ. तन्वी वर्तमान में अपनी मां के साथ देहराखास इलाके में किराए के मकान में रह रही थीं। मंगलवार की रात उनकी नाइट ड्यूटी थी, जिसके लिए वह घर से निकली थीं। रात करीब 11:30 बजे उन्होंने अपनी मां को संदेश भेजा कि वह साढ़े 12 बजे तक वापस आ जाएंगी, लेकिन जब काफी देर तक उनका संपर्क नहीं हुआ, तो परिजनों में हड़कंप मच गया।

संयोगवश उसी शाम अंबाला से उनके पिता डॉ. ललित मोहन भी देहरादून पहुंचे हुए थे। बेटी का फोन न उठने पर वह उसे ढूंढते हुए अस्पताल परिसर के पास पहुंचे, जहां कार के भीतर तन्वी को बेसुध पाया। पिता ने आनन-फानन में पत्थर से कार की खिड़की का शीशा तोड़ा और बेटी को अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

घटनास्थल का मंजर देख फॉरेंसिक एक्सपर्ट भी दंग रह गए। मेडिकल की छात्रा होने के नाते तन्वी को दवाओं और मानव शरीर की सटीक जानकारी थी। उन्होंने पहले अपने हाथ में कैनुला लगाया और फिर सीधे नसों में ऐसी दवा इंजेक्ट की, जिसने कुछ ही सेकंड में उनके नर्वस सिस्टम और हृदय की गति को रोक दिया। पुलिस को कार की तलाशी के दौरान दवाओं की तीन खाली शीशियां बरामद हुई हैं।

तन्वी की मौत के बाद उनके परिजनों ने नेत्र रोग विभाग की एचओडी डॉ. प्रियंका गुप्ता पर उत्पीड़न के सीधे आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि तन्वी अक्सर फोन पर रोते हुए बताती थी कि एचओडी उसे मानसिक रूप से टॉर्चर कर रही हैं। सीओ सदर अंकित कंडारी के मुताबिक, परिजनों की तहरीर पर आरोपी एचओडी के खिलाफ आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने की धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है।

दूसरी ओर, मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि डॉ. तन्वी लंबे समय से डिप्रेशन में थीं और उनका इलाज चल रहा था। मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी भूपेंद्र रतूड़ी का दावा है कि छात्रा ने दो साल पहले भी जान देने की कोशिश की थी, जिसकी लिखित जानकारी परिजनों ने एमएस कार्यालय को दी थी। पुलिस अब कार्यस्थल पर प्रताड़ना और छात्रा की मेडिकल हिस्ट्री, दोनों पहलुओं को जोड़कर तफ्तीश को आगे बढ़ा रही है।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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