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उत्तराखंड में जाम छलकाना हुआ महंगा, 1 अप्रैल से बदल गए शराब के रेट

उत्तराखंड में नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही शराब की कीमतों में 10 प्रतिशत तक का इजाफा हो गया है। इस बीच सांसद अजय भट्ट ने कैंची धाम और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में नई शराब की दुकानें खोलने का कड़ा विरोध करते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।

उत्तराखंड में जाम छलकाना हुआ महंगा, 1 अप्रैल से बदल गए शराब के रेट

HIGHLIGHTS

  • 1 अप्रैल से शराब की प्रति बोतल पर ₹5 से ₹20 तक की वृद्धि लागू।
  • आबकारी विभाग ने साल 2028 तक के लिए तय की नई त्रि-वर्षीय नीति।
  • नैनीताल जिले के तीन ग्रामीण क्षेत्रों में प्रस्तावित दुकानों को निरस्त करने की मांग।

देहरादून, 01 अप्रैल (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले दिन से ही शौकीनों की जेब पर बोझ बढ़ गया है। आबकारी विभाग ने शराब की कीमतों में 10 फीसदी तक की बढ़ोतरी के आदेश जारी कर दिए हैं। दिसंबर में एक्साइज ड्यूटी में किए गए बदलावों और कैबिनेट की मुहर के बाद अब प्रति बोतल ₹5 से लेकर ₹20 तक के दाम बढ़ा दिए गए हैं।

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आबकारी आयुक्त अनुराधा पाल ने स्पष्ट किया कि यह एक वार्षिक प्रक्रिया है, जिसे राजस्व लक्ष्यों को ध्यान में रखकर लागू किया गया है। विभाग ने इस बार तीन साल के लिए दीर्घकालिक आबकारी नीति तैयार की है, जो साल 2028 तक प्रभावी रहेगी। पिछले वर्ष भी कीमतों में 5 प्रतिशत का इजाफा देखा गया था, लेकिन इस बार का उछाल उससे दोगुना है।

दूसरी ओर, शराब के दामों में वृद्धि के बीच नई दुकानों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री और सांसद अजय भट्ट ने नैनीताल जिले के रातीघाट, मंगोली और बजून में प्रस्तावित शराब की दुकानों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बात कर इन ठेकों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग रखी है।

अजय भट्ट का तर्क है कि विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम के निकट शराब की दुकान खोलना जनभावनाओं का अपमान है। इन क्षेत्रों में शहीद संजय बिष्ट राजकीय इंटर कॉलेज और कई प्राथमिक विद्यालय स्थित हैं। स्थानीय महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा का हवाला देते हुए सांसद ने चेताया है कि शिक्षण संस्थानों के पास मदिरा की बिक्री से छात्रों के मानसिक विकास पर बेहद नकारात्मक असर पड़ेगा।

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राज्य सरकार के डेटा के अनुसार, उत्तराखंड के राजस्व में आबकारी विभाग की हिस्सेदारी लगभग 15-18% रहती है, जो पर्यटन के बाद दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। हालांकि, रातीघाट जैसे ग्रामीण बाजारों में स्थानीय निवासियों के भारी विरोध ने सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है। अब गेंद मुख्यमंत्री के पाले में है कि वे राजस्व और जनभावनाओं के बीच कैसे संतुलन बिठाते हैं।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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