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Uttarakhand Economic Survey 2025-26 : मातृ-शिशु मृत्यु दर रोकने के लिए लागू होगा ‘केरल मॉडल’

उत्तराखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश कर दिया है। रिपोर्ट में मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए 'केरल मॉडल' अपनाने और अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए 'ज्ञान' (गरीब, युवा, अन्नदाता, नारी) फॉर्मूले पर जोर दिया गया है। सर्वेक्षण के अनुसार राज्य में पर्यटन और औषधीय खेती में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि डेयरी क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता बताई गई है। नियोजन विभाग ने बुनियादी ढांचे पर 10 हजार करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की सिफारिश की है।

Uttarakhand Economic Survey 2025-26 : मातृ-शिशु मृत्यु दर रोकने के लिए लागू होगा 'केरल मॉडल'

HIGHLIGHTS

  • स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए गर्भवती महिलाओं की Digital Tracking और विशेष पोषण कार्यक्रम शुरू होगा।
  • पिछले 5 वर्षों में होम स्टे की संख्या 3955 से बढ़कर 6161 हुई, जबकि पर्यटकों का आंकड़ा 6.01 करोड़ पहुंचा।
  • औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती का रकबा 900 हेक्टेयर से बढ़कर 10,000 हेक्टेयर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।

Uttarakhand Economic Survey 2025-26 : उत्तराखंड के ताजा आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में स्वास्थ्य सेवाओं के कायाकल्प का खाका खींचा गया है। प्रमुख सचिव नियोजन आर. मीनाक्षीसुंदरम (R Meenakshi Sundaram) ने राज्य में मातृ-शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए ‘केरल मॉडल’ अपनाने का सुझाव दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार टिहरी (Tehri) के पिलखी (Pilkhi) जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन और पोषण की भारी कमी पाई गई है। इसे रोकने के लिए सरकार अब प्रत्येक गर्भवती महिला की Digital Tracking करेगी।

‘ज्ञान’ फॉर्मूले से आर्थिक विकास को मिलेगी रफ्तार

राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सर्वेक्षण में ‘ज्ञान’ (GYAN) फॉर्मूले का प्रस्ताव दिया गया है। इसका तात्पर्य गरीब (Gareeb), युवा (Yuva), अन्नदाता (Annadata) और नारी (Nari) शक्ति के एकीकृत विकास से है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि यदि सरकार इन चार स्तंभों और Infrastructure पर 10,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश करती है, तो विकास दर में बड़ा उछाल आएगा। इसके अतिरिक्त महिलाओं को पैतृक संपत्ति में सह-अंशधारी बनाने की सिफारिश भी की गई है।

पर्यटन और होम स्टे क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति

उत्तराखंड में पर्यटन क्षेत्र रोजगार का प्राथमिक स्रोत बनकर उभरा है। राज्य गठन के समय मौजूद 4,803 होटलों की संख्या अब बढ़कर 10,509 हो गई है। होम स्टे (Home Stay) के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिनकी संख्या अब 6,161 तक पहुंच गई है। घरेलू पर्यटकों की संख्या में छह गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जो 1.05 करोड़ से बढ़कर 6.01 करोड़ हो गई है। चारधाम यात्रा (Char Dham Yatra) में भी 56 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने उपस्थिति दर्ज कराई है।

औषधीय खेती और मत्स्य पालन के नए आंकड़े

खेती के क्षेत्र में पारंपरिक फसलों के स्थान पर नकदी फसलों और औषधीय पौधों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। पिछले चार वर्षों में औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती का रकबा 11 गुना बढ़कर 10,000 हेक्टेयर हो गया है। मत्स्य पालन में भी उत्पादन 7,325 टन से बढ़कर 10,487 टन पहुंच गया है। हालांकि, डेयरी (Dairy) सेक्टर की रफ्तार धीमी रही है। वर्ष 2022 में 50.92 लाख लीटर प्रतिदिन होने वाला दुग्ध उत्पादन 2025 में मात्र 54.59 लाख लीटर तक ही पहुंच सका है।

क्षेत्र (Sector) पूर्व स्थिति वर्तमान स्थिति (2025-26)
होम स्टे (Home Stay) 3,955 6,161
घरेलू पर्यटक 1.05 करोड़ 6.01 करोड़
औषधीय खेती (हेक्टेयर) 900 10,000
मत्स्य उत्पादन (टन) 7,325 10,487
दुग्ध उत्पादन (लाख ली./दिन) 50.92 54.59

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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