EPFO : उच्च शिक्षा, पारिवारिक जिम्मेदारियों, बीमारी या फिर नौकरी जाने के कारण 1 से 2 साल का करियर ब्रेक लेने वाले नौकरीपेशा लोगों के लिए पीएफ खाते को लेकर स्पष्ट नियम लागू हैं। काम बंद होने या नया योगदान रुकने के बाद भी ईपीएफओ खाते में पड़ी पुरानी रकम पूरी तरह सुरक्षित रहती है।
अक्सर कर्मचारियों के मन में यह आशंका रहती है कि नौकरी छोड़ते ही पीएफ खाता बंद हो जाता है या उस पर ब्याज मिलना रुक जाता है। ईपीएफओ के आधिकारिक डेटा के अनुसार खाता कभी अपने आप बंद नहीं होता और पुरानी जमा पूंजी पर तय सरकारी दर से लाभ मिलता रहता है।
वर्तमान वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि पर 8.25 प्रतिशत की दर से सालाना ब्याज दिया जा रहा है। अगर कोई व्यक्ति 1 या 2 साल के लिए काम से ब्रेक लेता है, तो उसकी जमा राशि पर यह 8.25 फीसदी की दर जुड़ती रहेगी।
उम्र के हिसाब से ब्याज मिलने की समय-सीमा तय की गई है। 58 साल की उम्र तक खाते में कोई नया योगदान न आने पर भी ब्याज जुड़ता रहता है। 55 साल की उम्र में या उसके बाद नौकरी छोड़ने की स्थिति में केवल 3 साल तक ही ब्याज का लाभ दिया जाता है, जिसके बाद खाता निष्क्रिय हो जाता है।
निकासी नियमों में बदलाव के बाद अब नौकरी छूटते ही कर्मचारी अपने कुल ईपीएफ बैलेंस का 75 फीसदी हिस्सा तुरंत निकाल सकते हैं। इसमें कर्मचारी का योगदान, कंपनी का हिस्सा और उस पर बना पूरा ब्याज शामिल होता है।
बाकी बचा हुआ 25 प्रतिशत हिस्सा निकालने के लिए लगातार 12 महीने तक बेरोजगार रहने का प्रमाण देना अनिवार्य है। यदि 12 महीने तक नई नौकरी नहीं मिलती, तो पूरा 100 फीसदी फंड निकालने की अनुमति मिलती है।
करियर ब्रेक के दौरान पीएफ का पैसा निकालने से पहले नौकरी की अवधि देखना बेहद जरूरी है। लगातार 5 साल की सेवा पूरी किए बिना पैसा निकालने पर जमा रकम पर टैक्स देनदारी बनती है।
यदि आपकी कुल नौकरी 5 साल या उससे अधिक की हो चुकी है, तो इस्तीफा देने, मेडिकल इमरजेंसी या कंपनी बंद होने की स्थिति में पूरी निकासी पूरी तरह टैक्स फ्री होती है। 5 साल से कम की सर्विस में काटे गए पीएफ पर आयकर नियमों के तहत टैक्स लिया जाता है।
पासबुक में ब्याज अपडेट होने में कई बार तकनीकी कारणों से कुछ हफ्तों का समय लग जाता है। ऑनलाइन क्लेम जमा करने के बाद सामान्य तौर पर 7 से 10 कार्य दिवसों के भीतर पैसा बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
अगर केवाईसी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद 20 दिनों तक क्लेम का निपटारा नहीं होता, तो सदस्य सीधे ईपीएफआईजीएमएस (EPFiGMS) पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। तय समय में बिना वाजिब वजह के क्लेम रोकने वाले अधिकारियों पर 12 फीसदी सालाना दर से penal interest लगाने का प्रावधान है।














