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सावन में शिव-पार्वती का गठबंधन क्यों कराया जाता है? जानें पूरी विधि और महत्व

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Ganga Updated Wed, 12 Aug 2026 10:34 AM IST

सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव और माता पार्वती का गठबंधन कराने की परंपरा बेहद खास मानी जाती है। सही विधि और नियमों के साथ गठबंधन करने से वैवाहिक जीवन में मिठास आती है और विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।

Sawan Shiv Parvati Gathbandhan

Sawan Shiv Parvati Gathbandhan : सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।

इस दौरान मंदिरों में भक्त शिव-शक्ति के दर्शन के साथ ही उनका गठबंधन भी कराते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह गठबंधन प्रेम, समर्पण और अखंड सौभाग्य का प्रतीक है।

अगर आपके वैवाहिक जीवन में तनाव चल रहा है या विवाह में लगातार देरी हो रही है, तो सावन के दौरान शिव-पार्वती गठबंधन का यह उपाय बेहद फलदायी साबित होता है।

कुंवारी कन्याएं भी सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए यह पूजन कर सकती हैं।

गठबंधन के लिए आवश्यक सामग्री

पूजा शुरू करने से पहले इन सामग्रियों को एकत्र कर लें:

  • भगवान शिव और माता पार्वती की धातु या मिट्टी की मूर्ति/विग्रह
  • कच्चा सूत या लाल मौली (कलावा)
  • तांबे का लोटा, गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
  • चंदन, रोली, अक्षत, धूप, दीप, कपूर
  • बेलपत्र, धतूरा, ताजे फूल और फल
  • माता पार्वती के लिए सुहाग की सामग्री (सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी आदि) और मिठाई

गठबंधन करने की सही विधि

अभिषेक और पूजन: सबसे पहले मंदिर या पूजा स्थान की सफाई करें। भगवान शिव का पंचामृत और गंगाजल से जलाभिषेक करें। इसके बाद माता पार्वती और शिव जी को चंदन, रोली, अक्षत, पुष्प और बेलपत्र अर्पित करें।

सुहाग सामग्री अर्पित करें: माता पार्वती को सुहाग का सामान चढ़ाएं और शिव जी को धतूरा व फल अर्पित करें। दोनों के समक्ष धूप-दीप जलाएं।

गठबंधन की शुरुआत: गठबंधन हमेशा भगवान शिव की ओर से शुरू किया जाता है। मौली या कच्चे सूत का एक सिरा शिवलिंग के पास रखकर प्रक्रिया शुरू करें।

सात फेरे लगाएं: ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का निरंतर जाप करते हुए शिवलिंग और माता पार्वती के विग्रह के चारों ओर मौली लपेटते हुए 7 बार घुमाएं।

प्रार्थना करें: गठबंधन पूरा होने के बाद दोनों गांठों को सम्मानपूर्वक जोड़ें और अपने सुखी जीवन या मनचाहे वर की प्रार्थना करें।

गठबंधन के समय ध्यान रखने योग्य जरूरी नियम

विग्रह का ही करें प्रयोग: गठबंधन हमेशा शिवलिंग और माता पार्वती की मूर्ति या विग्रह के साथ ही किया जाता है। कागज की फोटो पर गठबंधन नहीं बांधा जाता। अगर मूर्ति न हो तो आप मिट्टी से शिव-पार्वती बनाकर पूजन कर सकते हैं।

नागदेव को अलग रखें: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर लिपटे शेषनाग भगवान विष्णु का रूप माने जाते हैं। इसलिए गठबंधन का धागा बांधते समय ध्यान रखें कि शेषनाग उसमें न बंधें।

धागे की अखंडता: गठबंधन के लिए इस्तेमाल होने वाला कलावा या सूत कहीं से कटा-फटा नहीं होना चाहिए और न ही फेरे लेते समय धागा बीच में छोटा पड़ना चाहिए।

भाव और नियम: पूरी प्रक्रिया के दौरान मन में श्रद्धा रखें और किसी भी प्रकार की जल्दबाजी से बचें। पूजन के बाद चढ़ाया गया सुहाग का सामान किसी जरूरतमंद महिला को दान कर सकते हैं।

Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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