इस्लामाबाद। पाकिस्तान की सियासत में जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। शहबाज शरीफ सरकार के वरिष्ठ मंत्री और सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने एक टेलीविजन साक्षात्कार में बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया कि इमरान खान को राजनीतिक समाधान के तहत दो बार ‘सीक्रेट डील’ का प्रस्ताव दिया गया था। इस बयान के बाद पाकिस्तान के सियासी गलियारों में भारी हलचल मच गई है।
समझौते की दो बड़ी कोशिशें
राणा सनाउल्लाह के मुताबिक सरकार देश का राजनीतिक तनाव कम करना चाहती थी। इसी मकसद से नवंबर 2024 से पहले इमरान खान से संपर्क किया गया था। पहली बार कुछ सरकारी अधिकारियों और नेताओं ने इस मामले में मध्यस्थता की थी। दूसरी बार हाल ही में विदेशी मध्यस्थों के जरिए भी बातचीत का रास्ता खोलने का प्रयास किया गया था। शुरुआत में इमरान खान ने इन प्रस्तावों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी। हालांकि, बाद में उन्होंने किसी भी तरह के समझौते से साफ इनकार कर दिया।
सत्ता में वापसी की महत्वाकांक्षा
सनाउल्लाह ने पूर्व प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे मौजूदा शहबाज सरकार को अस्थिर करना चाहते हैं। उनका मुख्य लक्ष्य किसी भी तरह दोबारा सत्ता हासिल करना है। सरकार चाहती थी कि देश के हालात सामान्य हों, लेकिन इमरान खान की जिद के कारण बात नहीं बन पाई। दूसरी तरफ, इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पीटीआई लगातार मौजूदा सरकार पर राजनीतिक द्वेष के चलते कार्रवाई करने का आरोप लगा रही है।
शहबाज सरकार के भीतर मतभेद
राणा सनाउल्लाह के इस खुलासे के बाद खुद पाकिस्तान सरकार के भीतर बगावती सुर सुनाई देने लगे हैं। इस बयान पर विवाद बढ़ता देख सूचना मंत्री को सफाई देनी पड़ी। सूचना मंत्री ने स्पष्ट किया है कि इमरान खान को सरकार की तरफ से कोई डील या विशेष छूट नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि देश का कानून अपना काम कर रहा है और पूर्व प्रधानमंत्री को अदालत के आदेशानुसार ही सजा मिल रही है।
बिगड़ती सेहत पर परिवार की चिंता
इन राजनीतिक उठापटक के बीच इमरान खान के परिवार ने उनके स्वास्थ्य पर गंभीर चिंता जाहिर की है। पीटीआई का दावा है कि जेल के भीतर उनकी तबीयत लगातार खराब हो रही है। उनकी आंखों की रोशनी पर भी बुरा असर पड़ा है। इमरान खान के परिजनों ने सरकार से मांग की है कि उनका तत्काल निजी डॉक्टरों की निगरानी में इलाज कराया जाए।











