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Iran Israel War 2026 : जापान ने खोला अपना ‘खजाना’, 45 दिनों का तेल भंडार बाजार में उतारा।

ईरान-इजरायल युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई (Crude Oil Supply) बाधित होने के खतरे को देखते हुए जापान ने अपने रणनीतिक तेल भंडार से 45 दिनों का रिजर्व जारी करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। जापान ऐसा करने वाला G7 देशों का पहला सदस्य बन गया है, जिसका उद्देश्य ईंधन की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना और ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाना है।

Published On: March 11, 2026 10:53 PM
Iran Israel War 2026 : जापान ने खोला अपना 'खजाना', 45 दिनों का तेल भंडार बाजार में उतारा।

HIGHLIGHTS

  • जापान 16 मार्च से अपने निजी और सरकारी तेल भंडार से कुल 45 दिनों का स्टॉक जारी करेगा।
  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी नाकाबंदी के कारण जापान को सप्लाई कटने का डर है।
  • प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने घरेलू बाजार में पेट्रोल की कीमत 170 येन के करीब बनाए रखने का लक्ष्य रखा है।

टोक्यो। पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग (Iran Israel War 2026) ने वैश्विक ऊर्जा संकट को गहरा दिया है, जिसके जवाब में जापान ने अपनी कच्चे तेल की सप्लाई (Crude Oil Supply) सुनिश्चित करने के लिए ‘ब्रह्मास्त्र’ निकाल लिया है। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने बुधवार को घोषणा की कि देश अपने रणनीतिक तेल भंडार का एक बड़ा हिस्सा बाजार में जारी करेगा।

इस कड़े फैसले के साथ जापान दुनिया के सबसे अमीर देशों के समूह (G7) में पहला ऐसा देश बन गया है, जिसने वर्तमान संकट के बीच अपने आपातकालीन सुरक्षित भंडार का इस्तेमाल शुरू किया है।

प्रधानमंत्री ताकाइची ने टोक्यो में पत्रकारों से बात करते हुए साफ किया कि 16 मार्च से जापान अपने निजी क्षेत्र के भंडार से 15 दिनों की खपत और सरकारी भंडार से 30 दिनों की खपत के बराबर तेल जारी करेगा। सरकार का यह कदम अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के किसी सामूहिक फैसले का इंतजार किए बिना उठाया गया है।

जापान अपनी तेल जरूरतों का करीब 95% हिस्सा मध्य पूर्व के देशों से आयात करता है, इसलिए खाड़ी में तनाव का सीधा असर उसकी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी बनी बड़ी वजह

जापान के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी तनाव है। युद्ध के कारण इस समुद्री मार्ग से होने वाली तेल की आवाजाही लगभग ठप हो गई है, जहां से दुनिया के कुल तेल व्यापार का पांचवां हिस्सा गुजरता है। जापानी सरकार को आशंका है कि इस महीने के अंत तक कच्चे तेल की आवक में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे देश में ईंधन की किल्लत पैदा हो सकती है।

घरेलू कीमतों को काबू में रखने की चुनौती

जापान में पेट्रोल की कीमतें 200 येन प्रति लीटर के पार जाने का खतरा मंडरा रहा है। प्रधानमंत्री ताकाइची ने स्पष्ट किया है कि सरकार सरकारी फंड और रिजर्व ऑयल के जरिए कीमतों को 170 येन (लगभग $1.07) के आसपास स्थिर रखने की कोशिश करेगी। भारत जैसे अन्य प्रमुख आयातक देश फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन जापान के इस साहसिक कदम ने अन्य G7 देशों पर भी दबाव बढ़ा दिया है कि वे भी अपने भंडार खोलें।


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Ansh Goyal

अंश गोयल 'दून हॉराइज़न' में अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ (International Desk) की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वैश्विक राजनीति, युद्ध के हालात, कूटनीति (Diplomacy) और ग्लोबल इकॉनमी पर उनकी गहरी पकड़ है। अंश का मुख्य फोकस अमेरिका, रूस, मध्य पूर्व और पड़ोसी देशों की हलचल का भारतीय दृष्टिकोण से सटीक विश्लेषण करना है। विदेशी मंचों पर भारत के बढ़ते दबदबे और वैश्विक नीतियों का आम आदमी पर पड़ने वाले प्रभाव को वे बेहद सरल हिंदी में समझाते हैं। उनकी डीप-रिसर्च वाली रिपोर्टिंग पाठकों को दुनिया भर की विश्वसनीय खबरें प्रदान करती है।

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