टोक्यो। पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग (Iran Israel War 2026) ने वैश्विक ऊर्जा संकट को गहरा दिया है, जिसके जवाब में जापान ने अपनी कच्चे तेल की सप्लाई (Crude Oil Supply) सुनिश्चित करने के लिए ‘ब्रह्मास्त्र’ निकाल लिया है। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने बुधवार को घोषणा की कि देश अपने रणनीतिक तेल भंडार का एक बड़ा हिस्सा बाजार में जारी करेगा।
इस कड़े फैसले के साथ जापान दुनिया के सबसे अमीर देशों के समूह (G7) में पहला ऐसा देश बन गया है, जिसने वर्तमान संकट के बीच अपने आपातकालीन सुरक्षित भंडार का इस्तेमाल शुरू किया है।
प्रधानमंत्री ताकाइची ने टोक्यो में पत्रकारों से बात करते हुए साफ किया कि 16 मार्च से जापान अपने निजी क्षेत्र के भंडार से 15 दिनों की खपत और सरकारी भंडार से 30 दिनों की खपत के बराबर तेल जारी करेगा। सरकार का यह कदम अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के किसी सामूहिक फैसले का इंतजार किए बिना उठाया गया है।
जापान अपनी तेल जरूरतों का करीब 95% हिस्सा मध्य पूर्व के देशों से आयात करता है, इसलिए खाड़ी में तनाव का सीधा असर उसकी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी बनी बड़ी वजह
जापान के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी तनाव है। युद्ध के कारण इस समुद्री मार्ग से होने वाली तेल की आवाजाही लगभग ठप हो गई है, जहां से दुनिया के कुल तेल व्यापार का पांचवां हिस्सा गुजरता है। जापानी सरकार को आशंका है कि इस महीने के अंत तक कच्चे तेल की आवक में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे देश में ईंधन की किल्लत पैदा हो सकती है।
घरेलू कीमतों को काबू में रखने की चुनौती
जापान में पेट्रोल की कीमतें 200 येन प्रति लीटर के पार जाने का खतरा मंडरा रहा है। प्रधानमंत्री ताकाइची ने स्पष्ट किया है कि सरकार सरकारी फंड और रिजर्व ऑयल के जरिए कीमतों को 170 येन (लगभग $1.07) के आसपास स्थिर रखने की कोशिश करेगी। भारत जैसे अन्य प्रमुख आयातक देश फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन जापान के इस साहसिक कदम ने अन्य G7 देशों पर भी दबाव बढ़ा दिया है कि वे भी अपने भंडार खोलें।










