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Operation Midnight Hammer के बाद अलर्ट पर ईरान, इस्फहान की सुरंगों को कंक्रीट से ढका

अमेरिकी हवाई हमलों की आशंका के बीच ईरान ने अपने प्रमुख परमाणु और सैन्य ठिकानों की किलेबंदी तेज कर दी है। हालिया सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार, ईरान ने परचिन, इस्फहान और नतान्ज स्थित अपनी अंडरग्राउंड सुरंगों को कंक्रीट और मिट्टी की मोटी परतों से ढक दिया है। जून 2025 में हुए अमेरिकी हमले के बाद ईरान की यह रणनीति परमाणु संयंत्रों को बंकर-बस्टर बमों से बचाने के लिए अपनाई गई है।

Published On: February 20, 2026 6:18 PM
Operation Midnight Hammer के बाद अलर्ट पर ईरान, इस्फहान की सुरंगों को कंक्रीट से ढका

HIGHLIGHTS

  1. ईरान ने परचिन और इस्फहान के परमाणु ठिकानों के प्रवेश द्वारों को कंक्रीट और भारी मिट्टी से पूरी तरह दफन कर दिया है।
  2. अक्टूबर 2024 में इजरायली हमले में तबाह हुए 'तालेघान 2' ढांचे के ऊपर एक नया कंक्रीट का रक्षा कवच बनाया गया है।
  3. जून 2025 में अमेरिका ने इस्फहान परमाणु ठिकाने पर हमला किया था, जिसके बाद ईरान अलर्ट मोड में है।
  4. नतान्ज और शिराज के सैन्य अड्डों की अंडरग्राउंड सुरंगों को भी 'मिट्टी के ताबूत' में तब्दील कर दिया गया है।

तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक बड़ी रणनीतिक खबर सामने आई है। संभावित अमेरिकी हवाई हमलों की चेतावनी को देखते हुए ईरान ने अपने प्रमुख परमाणु ठिकानों को अभेद्य किलों में तब्दील करना शुरू कर दिया है। हालिया सैटेलाइट तस्वीरों से इस बात का पुख्ता खुलासा हुआ है कि ईरानी सेना अपने संवेदनशील परमाणु संयंत्रों को कंक्रीट और मिट्टी की भारी परतों से ढक रही है।

जून 2025 में अमेरिकी वायुसेना द्वारा किए गए ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के बाद ईरान की यह सबसे बड़ी जवाबी सुरक्षा रणनीति मानी जा रही है। तेहरान, इस्फहान और नतान्ज के पास स्थित इन अंडरग्राउंड सुरंगों को इजरायली और अमेरिकी बमबारी से बचाने के लिए बंकरों में बदल दिया गया है।

परचिन सैन्य बेस पर कंक्रीट और मिट्टी का सुरक्षा कवच

तेहरान से लगभग 30 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित परचिन कैंपस ईरान का सबसे संवेदनशील सैन्य स्थल माना जाता है। अक्टूबर 2024 में इजरायली वायुसेना ने इसी कैंपस पर घातक हवाई हमला किया था। इस हमले में परमाणु हथियारों के विकास से जुड़ी ‘तालेघान 2’ इमारत को भारी नुकसान पहुंचा था।

अब विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थान (ISIS) की नई सैटेलाइट तस्वीरों में इस नष्ट हुई इमारत के ऊपर एक विशाल ढांचा नजर आ रहा है। ईरानी इंजीनियरों ने इस पूरे ढांचे को कंक्रीट की मजबूत ढाल से ढककर उसके ऊपर मिट्टी की कई फीट मोटी परत बिछा दी है। इसे एक तरह का कंक्रीट का ताबूत बना दिया गया है।

‘मिट्टी के ताबूत’ में दफन हुई इस्फहान की सुरंगें

ईरान ने अपनी अंडरग्राउंड सुरंगों को 36 मीटर लंबे और 12 मीटर चौड़े कंक्रीट के ढांचों से पूरी तरह कवर कर दिया है। मिली जानकारी के अनुसार, जून 2025 में अमेरिकी सेना ने इस्फहान परमाणु ठिकाने पर सीधे बम गिराए थे। इसी ठिकाने के अंदर ईरान का सबसे बड़ा यूरेनियम भंडार सुरक्षित रखा गया है।

लगातार हमलों के खतरे को देखते हुए ईरान ने इस अंडरग्राउंड ठिकाने तक पहुंचने वाली तीनों प्रमुख सुरंगों को मिट्टी से पूरी तरह भर दिया है। 10 फरवरी 2026 को ली गई सैटेलाइट तस्वीरों में ये तीनों प्रवेश द्वार मिट्टी के नीचे पूरी तरह दबे हुए दिखाई दे रहे हैं।

नतान्ज और शिराज के सैन्य ठिकानों की किलेबंदी

इस्फहान की तरह ही नतान्ज परमाणु ठिकाने को भी हवाई हमलों से बचाने के लिए किलेबंद किया गया है। नतान्ज से लगभग 2 किलोमीटर दूर पहाड़ के नीचे बनी सुरंग के अंदर ईरान के दो प्रमुख यूरेनियम संवर्धन प्लांट काम कर रहे हैं। इन सुरंगों के प्रवेश द्वारों पर भी भारी ट्रकों की मदद से कंक्रीट और मिट्टी डाली गई है।

इजरायली खुफिया संगठन अल्मा रिसर्च एंड एजुकेशन सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण ईरान के शिराज से 10 किलोमीटर दूर स्थित सैन्य अड्डे को भी इसी तरह सुरक्षित किया जा रहा है। यह सैन्य अड्डा मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागने में सक्षम ईरान के 25 प्रमुख ठिकानों में से एक है।

अमेरिकी सेना के लिए जमीनी हमले की नई चुनौती

ईरान द्वारा अपनाई गई इस नई रणनीति ने अमेरिकी और इजरायली सेना की रणनीतिक चिंताओं को बढ़ा दिया है। ठिकानों को मिट्टी और कंक्रीट से ढकने के कारण अब सैटेलाइट से यह पहचानना बेहद मुश्किल हो गया है कि कौन सी इमारत सामान्य बंकर है और कौन सी इमारत मुख्य परमाणु ठिकाना।

सुरंगों के मुहाने पर हजारों टन मिट्टी भरी होने के कारण हवाई हमलों और बंकर-बस्टर बमों का असर काफी कम हो जाएगा। इसके अलावा, किसी भी सैन्य अभियान के दौरान जमीनी स्तर पर इन ठिकानों के अंदर घुसपैठ करना अमेरिकी कमांडोज के लिए अब एक बड़ी और जटिल चुनौती साबित होगा।


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Ansh Goyal

अंश गोयल 'दून हॉराइज़न' में अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ (International Desk) की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वैश्विक राजनीति, युद्ध के हालात, कूटनीति (Diplomacy) और ग्लोबल इकॉनमी पर उनकी गहरी पकड़ है। अंश का मुख्य फोकस अमेरिका, रूस, मध्य पूर्व और पड़ोसी देशों की हलचल का भारतीय दृष्टिकोण से सटीक विश्लेषण करना है। विदेशी मंचों पर भारत के बढ़ते दबदबे और वैश्विक नीतियों का आम आदमी पर पड़ने वाले प्रभाव को वे बेहद सरल हिंदी में समझाते हैं। उनकी डीप-रिसर्च वाली रिपोर्टिंग पाठकों को दुनिया भर की विश्वसनीय खबरें प्रदान करती है।

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