तेहरान, 04 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। मध्य पूर्व में बारूद की गंध और गहरी हो गई है क्योंकि ईरान ने अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 48 घंटे के युद्धविराम को सिरे से खारिज कर दिया है।
पाकिस्तान की जमीन पर होने वाली संभावित बातचीत पर पानी फेरते हुए ईरान ने कड़ा रुख अपनाया और अमेरिकी अधिकारियों से मिलने तक से इनकार कर दिया। यह टकराव केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ईरान ने अमेरिकी वायुसेना को सैन्य मोर्चे पर भी सीधी चुनौती दी है।
ईरान ने अपने हवाई क्षेत्र में घुसपैठ कर रहे अमेरिकी लड़ाकू विमानों पर हमला बोलकर युद्ध को और आक्रामक मोड़ दे दिया है। जानकारी के मुताबिक, ईरान ने पहले अमेरिकी वायुसेना के शक्तिशाली F-15 स्ट्राइक ईगल को मार गिराया और उसके तुरंत बाद होर्मुज स्ट्रेट के पास ‘टैंक किलर’ कहे जाने वाले A-10 थंडरबोल्ट को भी ढेर कर दिया। इन हमलों के जरिए तेहरान ने वाशिंगटन को स्पष्ट संदेश दिया है कि वह किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है।
शांति की उम्मीद लगाए बैठे मध्यस्थ देशों को भी करारा झटका लगा है। पाकिस्तान, कतर और तुर्की की त्रिकोणीय कोशिशें ईरान के अडिग रवैये के आगे नाकाम रहीं। अमेरिका ने 2 अप्रैल को एक मध्यस्थ के जरिए सीजफायर का 15 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा था, जिसे ईरान ने अपमानजनक करार देते हुए ठुकरा दिया। अब कतर और तुर्की ने दोहा या इस्तांबुल में नई वार्ता का विकल्प खुला रखा है, लेकिन मौजूदा हालातों को देखते हुए इसकी संभावना क्षीण नजर आ रही है।
युद्ध की शर्तों पर दोनों देश धुर विरोधी बने हुए हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु ठिकाने स्थायी रूप से बंद करे, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को सीमित करे और तेल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोल दे।
इसके बदले में ट्रंप प्रशासन ने प्रतिबंधों में ढील देने का लालच दिया था। वहीं, ईरान की अपनी 5 कड़ी शर्तें हैं, जिनमें मध्य पूर्व से अमेरिकी सैन्य ठिकानों की पूर्ण वापसी, युद्ध के नुकसान का मुआवजा और भविष्य में हमले न करने की लिखित गारंटी शामिल है।
इस 36 दिवसीय युद्ध का मानवीय और आर्थिक परिणाम बेहद भयावह रहा है। 28 फरवरी से शुरू हुई इस भीषण जंग में ईरान के 1900 से अधिक सैनिक शहीद हो चुके हैं, जबकि अमेरिका के 13 और इजराइल के 19 सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है। लेबनान में हिजबुल्लाह पर हुए हमलों ने 1300 से अधिक लोगों की जान ली है और 10 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं।
शुक्रवार रात ईरान ने कुवैत की बड़ी तेल रिफाइनरी और वाटर प्लांट को निशाना बनाकर यह जता दिया कि वह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को भी ठप करने की ताकत रखता है।










