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फ्लाईदुबई विमान में चाकू लगने के बाद भी बचाई 174 जानें, पीएम मोदी ने पायलट स्मित को बताया हीरो

फ्लाईदुबई विमान में सह-पायलट के चाकू हमले के बाद भी भारतीय कैप्टन स्मित मछार ने 174 यात्रियों की जान बचाई। पीएम मोदी, ट्रंप और नेतन्याहू ने इस अदम्य साहस को सलाम किया।

Captain Smit Machhar

HIGHLIGHTS

  • घायल अवस्था में भारतीय कैप्टन स्मित मछार ने कॉकपिट का दरवाजा खोला।
  • दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट FZ1073 में 174 यात्री सवार थे।
  • इजराइल ने तत्काल सुरक्षा के लिए दो फाइटर जेट आसमान में भेजे।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैप्टन के माता-पिता और पत्नी से सीधे फोन पर बात की।

दून हॉराइज़न, नई दिल्ली (01 अक्टूबर) : मिड-एयर कॉकपिट में जानलेवा हमले के बावजूद 174 लोगों की जिंदगी बचाने वाले भारतीय एविएटर कैप्टन स्मित मछार (Captain Smit Machhar) के अदम्य साहस पर पूरे देश को गर्व है। दुबई से इजराइल के तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान संख्या FZ1073 में जब सह-पायलट ने अचानक उन पर चाकू से हमला कर दिया, तब लहुलुहान हालत में भी उन्होंने विमान पर नियंत्रण नहीं खोया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर इस जांबाजी की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए उन्हें सच्चा ‘हीरो’ करार दिया है। इसके तुरंत बाद प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से पायलट की पत्नी और माता-पिता से फोन पर संपर्क साधा और ढांढस बंधाया।

पीएमओ से मिली जानकारी के अनुसार, बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि विदेश में मौजूद भारतीय दूतावास पायलट और उनके परिवार को हर स्तर पर सर्वोत्तम चिकित्सा व राजनयिक सहायता उपलब्ध करा रहा है।

जब कॉकपिट में गूंज उठी खतरे की चेतावनी

हजारों फीट की ऊंचाई पर सफर सामान्य गति से चल रहा था, तभी अचानक कॉकपिट के भीतर हिंसक झड़प शुरू हो गई। हमलावर को-पायलट ने कैप्टन मछार पर एकाएक धारदार हथियार से ताबड़तोड़ वार कर दिए। गंभीर घाव और अत्यधिक रक्तस्राव के बाद भी कैप्टन ने अपनी सुध-बुध नहीं गंवाई। विमान का रुख तेजी से नीचे की ओर होने लगा था। ऐसी भयावह स्थिति में कैप्टन मछार ने किसी तरह इलेक्ट्रॉनिक कॉकपिट डोर को अनलॉक किया और केबिन क्रू व यात्रियों को संकट का इशारा दिया। दरवाजा खुलते ही उन्होंने चिल्लाकर मदद मांगी।

इसी दौरान विमान से अंतरराष्ट्रीय एविएशन प्रोटोकॉल के तहत हाईजैक सिग्नल (Squawk 7500) प्रसारित हुआ। इस कोड के एक्टिव होते ही सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए। इजराइल की वायुसेना ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए अपने दो इंटरसेप्टर लड़ाकू विमान हवा में रवाना कर दिए, ताकि किसी भी संभावित 9/11 जैसी अनहोनी को हवा में ही निष्प्रभावी किया जा सके।

ऑफ-ड्यूटी पायलटों और यात्रियों का संयुक्त मोर्चा

अनलॉक दरवाजा खुलते ही कुछ साहसी यात्री और केबिन क्रू सदस्य तुरंत कॉकपिट में घुस गए। उन्होंने हमलावर को-पायलट को दबोचकर काबू में किया। खुशकिस्मती यह रही कि उसी फ्लाइट में दो अन्य ऑफ-ड्यूटी पायलट भी सामान्य यात्री के रूप में सफर कर रहे थे। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उन दोनों ने तुरंत आगे बढ़कर कॉकपिट की कमान अपने हाथों में ले ली। विमान अनियंत्रित होकर नीचे गिर रहा था, जिसे बेहद सूझबूझ के साथ स्थिर किया गया और पास के सुरक्षित रनवे पर आपात लैंडिंग (Emergency Landing) कराई गई। विमान में सवार सभी 174 मुसाफिर और चालक दल के सदस्य पूरी तरह सुरक्षित जमीन पर उतर आए।

नेतन्याहू और ट्रंप ने भी बांधे तारीफों के पुल

इस अकल्पनीय साहस की गूंज वैश्विक कूटनीति के गलियारों तक सुनाई दी। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से कैप्टन मछार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके संघर्ष ने इजराइली नागरिकों समेत सैकड़ों बेगुनाहों का जीवन सुरक्षित किया।

वहीं पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कैप्टन के त्वरित निर्णय की सराहना की। ट्रंप के मुताबिक, जिस स्थिति में कैप्टन ने पीछे गिरते हुए दरवाजा खोलने का संयम दिखाया, उसने एक बहुत बड़े विमानन नरसंहार को टाल दिया। फिलहाल कैप्टन स्मित मछार अस्पताल में गहन चिकित्सा निगरानी में हैं और उनकी स्थिति पर विदेश मंत्रालय लगातार नजर बनाए हुए है।

Shailendra Pokhriyal

शैलेन्द्र पोखरियाल 'दून हॉराइज़न' में वरिष्ठ राष्ट्रीय संवाददाता के तौर पर देश की सियासत और प्रमुख राष्ट्रीय घटनाओं को कवर करते हैं। केंद्र सरकार की नीतियों, संसद के सत्रों और बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर उनकी गहरी पकड़ है। शैलेन्द्र का उद्देश्य राजनीतिक बयानों और सरकारी फैसलों के पीछे की असली सच्चाई को निष्पक्ष रूप से पाठकों के सामने रखना है। उनका लंबा पत्रकारीय अनुभव उन्हें जटिल राष्ट्रीय मुद्दों का आसान हिंदी में विश्लेषण करने में मदद करता है। वे पूरी तरह से शोध-आधारित (Fact-checked) और जनहित से जुड़ी बेबाक पत्रकारिता करने के लिए जाने जाते हैं।

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