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उत्तराखंड के 10 पहाड़ी जिलों में 63 नई पार्किंग शुरू, 4200 से अधिक वाहनों की जगह तैयार

उत्तराखंड के 10 पर्वतीय जिलों में आवास विभाग ने 63 पार्किंग परियोजनाएं पूरी कर ली हैं। अल्मोड़ा, नैनीताल और कैंची धाम सहित प्रमुख पर्यटन केंद्रों पर 4200 से अधिक वाहनों के लिए बनी नई जगह।

Published On: September 12, 2026 2:31 PM
uttarakhand parking projects

HIGHLIGHTS

  • 10 पर्वतीय जनपदों में 4202 वाहन क्षमता वाले 63 पार्किंग प्रोजेक्ट्स का निर्माण कार्य पूरा।
  • अल्मोड़ा 1087 वाहन क्षमता के साथ टॉप पर, नैनीताल में 679 वाहनों की व्यवस्था।
  • कैंची धाम में 500 और नैनीताल के मेट्रोपोल परिसर में 700 वाहनों की मल्टीलेवल पार्किंग निर्माणाधीन।
  • आवास विभाग ने जगह की उपलब्धता के हिसाब से सरफेस, मल्टीलेवल और ऑटोमेटेड मॉडल अपनाए।

दून हॉराइज़न, देहरादून (12 सितंबर): चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन के दौरान संकरी पहाड़ी सड़कों पर घंटों रेंगते वाहनों की तस्वीर अब धीरे-धीरे बदलने लगी है। राज्य सरकार ने पर्वतीय जनपदों में ट्रैफिक बॉटलनेक को खत्म करने के लिए पिछले चार वर्षों में आवास विभाग के जरिए 63 अलग-अलग पार्किंग परियोजनाओं (Parking Projects) को धरातल पर उतारा है। इन योजनाओं के जरिए 10 पर्वतीय जिलों में कुल 4,202 चारपहिया वाहनों को सुरक्षित खड़ा करने की पुख्ता जगह तैयार कर दी गई है।

पहाड़ का भूगोल हमेशा से निर्माण कार्यों के लिए पेचीदा रहा है। कहीं सीधी ढलान तो कहीं संकरा दायरा। इसी चुनौती को देखते हुए आवास विभाग ने एक ही ढर्रे पर काम करने के बजाय तीन अलग-अलग इंजीनियरिंग मॉडल्स पर फोकस किया— जहां पर्याप्त चौड़ाई मिली वहां सरफेस पार्किंग, भीड़भाड़ वाले बाजार क्षेत्रों में मल्टीलेवल पार्किंग (Multilevel Parking) और बेहद तंग जगहों पर आधुनिक ऑटोमेटेड वर्टिकल रैक सिस्टम।

अल्मोड़ा और नैनीताल बने सबसे बड़े केंद्र

आवास विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से साफ है कि सबसे अधिक दबाव वाले टूरिस्ट और ट्रांजिट हब्स को प्राथमिकता दी गई है। अल्मोड़ा जनपद 1,087 वाहनों की क्षमता के साथ इस सूची में सबसे आगे है। इसके बाद सरोवर नगरी नैनीताल में 679 और चंपावत में 600 गाड़ियों की क्षमता जोड़ी गई है। चारधाम यात्रा के प्रमुख प्रवेश व पड़ाव केंद्रों में उत्तरकाशी में 477, रुद्रप्रयाग में 304 और चमोली में 201 गाड़ियों के लिए आधिकारिक पार्किंग स्लॉट चालू हो चुके हैं। इसके अलावा पिथौरागढ़ (309), पौड़ी (256), टिहरी (163) और बागेश्वर (126) में भी स्थानीय जरूरतों के मुताबिक व्यवस्था बनाई गई है।

सरोवर नगरी और कैंची धाम: 1200 अतिरिक्त वाहनों की तैयारी

सैलानियों की भारी आमद झेलने वाले नैनीताल और भवाली क्षेत्र के लिए विभाग दो बड़े प्रोजेक्ट्स पर अलग से काम कर रहा है। नैनीताल के मेट्रोपोल होटल परिसर क्षेत्र में लगभग 700 वाहनों की क्षमता वाली अत्याधुनिक पार्किंग का निर्माण तेज गति से जारी है, जिससे मालरोड और तल्लीताल पर लगने वाले जाम पर लगाम लगेगी। वहीं, देश-विदेश से उमड़ने वाले भक्तों के चलते जाम का केंद्र बने कैंची धाम में 500 से अधिक वाहनों की क्षमता वाली मल्टीलेवल पार्किंग बनाई जा रही है।

आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग के सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार के मुताबिक, पर्वतीय जिलों में इन 63 प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से स्थानीय बाजारों और तीर्थ रूटों पर अव्यवस्थित पार्किंग में भारी कमी आई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बुनियादी बदलाव को राज्य की आर्थिकी से जोड़ते हुए स्पष्ट किया कि उत्तराखंड अब सालभर का पर्यटन केंद्र बन चुका है, जहां पिछले वर्ष छह करोड़ से अधिक श्रद्धालु और सैलानी पहुंचे। ऐसे में जब तक पार्किंग और आंतरिक ट्रैफिक सुगम नहीं होगा, तब तक पर्यटन का सुखद अनुभव अधूरा रहेगा। सरकार का अगला लक्ष्य इन पार्किंग स्थलों को डिजिटल डिस्प्ले और रियल-टाइम स्लॉट ट्रैकिंग से जोड़ना है, ताकि यात्रियों को पहाड़ी मोड़ों पर पहुंचने से पहले ही खाली जगह की सही जानकारी मिल सके।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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