नई दिल्ली (3 अक्टूबर) : दुर्गा पूजा, दशहरा और दिवाली के ठीक मुहाने पर खड़े देश के आम उपभोक्ता के लिए यह खबर जेब को सीधी राहत देने वाली है। केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय (Ministry of Consumer Affairs) ने बाजार में कृत्रिम किल्लत और सट्टेबाजी रोकने के लिए चीनी डीलरों पर शिकंजा कस दिया है।
नए आदेश के तहत देश भर में चीनी की स्टॉक लिमिट (Sugar Stock Limit) को घटाकर अब सीधे 1,000 क्विंटल कर दिया गया है। इतना ही नहीं, कोई भी व्यापारी अब किसी लॉट को 15 दिनों से अधिक समय तक होल्ड नहीं कर सकेगा। यह नियम 15 अक्टूबर से प्रभावी होकर 30 नवंबर तक लागू रहेगा।
तीन महीनों में तीन बार घटी सीमा, सट्टेबाजों पर चोट

अगस्त से अब तक के रुख को देखें तो सरकार ने जमाखोरों के सारे रास्ते बंद कर दिए हैं। अगस्त में जहां यह सीमा 4,000 क्विंटल और होल्डिंग अवधि 30 दिन थी, वहीं 15 सितंबर को इसे घटाकर 2,000 क्विंटल किया गया था। अब त्योहारों के पीक सीजन को देखते हुए इसे आधा कर 1,000 क्विंटल कर दिया गया है।
आपूर्ति चक्र को तेज रखने के लिए होल्डिंग अवधि को 30 से घटाकर 15 दिन करना सबसे असरदार कदम माना जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि व्यापारी अब गोदामों में माल दबाकर त्योहारी तेजी का इंतजार नहीं कर पाएंगे; उन्हें हर पखवाड़े माल बाजार में घुमाना ही होगा। अगर कोई व्यापारी पोर्टल पर घोषित स्टॉक से ज्यादा माल दबाए मिला, तो उस पर आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के कड़े प्रावधानों के तहत जब्ती और लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई हो सकती है।
कोलकाता और असम को विशेष छूट क्यों?

पूरे देश में 1,000 क्विंटल का कड़ा डंडा चलाने के बावजूद सरकार ने कोलकाता महानगरीय क्षेत्र और असम राज्य को राहत दी है। इन दोनों क्षेत्रों के व्यापारी 2,000 क्विंटल तक चीनी रख सकेंगे।
भौगोलिक हकीकत यही मांग करती है। कोलकाता दरअसल पूरे पूर्वी भारत और नॉर्थ-ईस्ट के लिए चीनी का प्रमुख ट्रांजिट हब है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश की मिलों से रैक के जरिए आने वाली चीनी पहले कोलकाता के गोदामों में उतरती है, जहां से यह छोटे ट्रकों के जरिए पड़ोसी राज्यों में भेजी जाती है। वहीं असम में पहाड़ी रास्तों, नदी पुलों और लॉजिस्टिक्स की अनिश्चितता को देखते हुए 1,000 क्विंटल की सीमा से आपूर्ति बाधित होने का खतरा था।
मिलों में 28% तक टूटे दाम, जनता तक मुनाफा पहुंचाने का फरमान
खाद्य मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में जब कीमतें अपने चरम पर थीं, उसके मुकाबले खुदरा बाजार में औसतन 15 प्रतिशत की नरमी आ चुकी है।
कारोबारी मोर्चे पर असली खेल एक्स-मिल कीमतों (Ex-mill Prices) में हुआ है, जहां भाव में 28 फीसदी तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। मिलों से थोक मंडी तक चीनी काफी सस्ती पहुंच रही है। यही वजह है कि मंत्रालय ने थोक और खुदरा व्यापारियों को सख्त हिदायत दी है कि मिलों से मिली 28% की छूट को अपनी जेब में रखने के बजाय सीधे उपभोक्ताओं तक पास-ऑन किया जाए। यदि खुदरा काउंटर पर कीमतें नहीं घटाई गईं, तो स्थानीय प्रशासन को औचक निरीक्षण के निर्देश दिए जा सकते हैं।








