नई दिल्ली (3 अक्टूबर) : त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें केंद्र सरकार के महंगाई भत्ते (DA Hike) संबंधी अगले फैसले पर टिकी हैं। फिलहाल कर्मचारी जुलाई 2026 किश्त के आधिकारिक ऐलान की राह देख रहे हैं।
इस बीच कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (CPI-IW) के ताजा आंकड़ों ने एक नया अनुमान पेश कर दिया है। यदि आर्थिक सूचकांकों की मौजूदा चाल आगे भी कायम रहती है, तो जनवरी 2027 तक कर्मचारियों का महंगाई भत्ता मौजूदा 60 फीसदी से बढ़कर 67 प्रतिशत के आंकड़े को छू सकता है।
अगस्त के आंकड़ों ने बदला पूरा समीकरण

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन काम करने वाले लेबर ब्यूरो (Labour Bureau) द्वारा जारी औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में बीते अगस्त महीने में 1.2 अंकों की तेजी दर्ज की गई। इस बढ़ोतरी के बाद यह सूचकांक 154.40 के स्तर पर पहुंच गया है।
सांख्यिकीय फॉर्मूले के आधार पर देखें तो जुलाई चक्र के लिए डीए का सैद्धांतिक स्तर 65.03 फीसदी के करीब बैठता है। हालांकि, केंद्रीय कैबिनेट ने अभी तक जुलाई देय किश्त पर औपचारिक मुहर नहीं लगाई है। परंपरा के अनुसार सरकार अमूमन सितंबर के आखिर या अक्टूबर की शुरुआत में इसका ऐलान करती है, जिसका एरियर कर्मचारियों को दिया जाता है।
67 फीसदी तक पहुंचने का क्या है गणित?

वेतन विशेषज्ञों और कर्मचारी मंचों का आकलन बताता है कि अगर सूचकांक आने वाले महीनों में भी अपनी यह रफ्तार बरकरार रखता है, तो नवंबर तक डीए और महंगाई राहत (DR) का वास्तविक आंकड़ा 66.91 प्रतिशत तक जा सकता है।
नियमों के मुताबिक दशमलव के बाद 0.50 या उससे अधिक अंक होने पर उसे अगले पूर्णांक में गिना जाता है। ऐसे में जनवरी 2027 चक्र के लागू होने तक महंगाई भत्ते की दर 67 प्रतिशत दर्ज हो सकती है। लेकिन इस अंतिम आंकड़े के लिए सितंबर, अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर 2026 के सीपीआई आंकड़े बेहद निर्णायक साबित होंगे।
पिछले तीन सालों में किस रफ्तार से बढ़ा डीए?
साल 2024 की शुरुआत में जब डीए 50 फीसदी के पार पहुंचा था, तब से इसकी बढ़ोतरी की रफ्तार पर लगातार नजर रखी जा रही है।
- जुलाई 2023: 46 प्रतिशत
- जनवरी 2024: 50 प्रतिशत
- जुलाई 2024: 55 प्रतिशत
- जुलाई 2025: 58 प्रतिशत
जनवरी चक्र: 2 प्रतिशत बढ़कर 60 प्रतिशत
कर्मचारी संगठनों ने केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजकर मांग रखी है कि दुर्गा पूजा और दशहरा से पहले जुलाई की बकाया किश्त जारी कर दी जाए, ताकि त्योहारी खर्चों के बीच कर्मचारियों को नकद राहत मिल सके।









