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8th Pay Commission : बेसिक पे के अलावा कर्मचारियों ने रखीं 9 बड़ी मांगें, जानें क्या है खास

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Parul Sharma Updated Wed, 07 Oct 2026 11:13 AM IST

8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर कर्मचारी संगठनों ने वेतन बढ़ोतरी के साथ-साथ पुरानी पेंशन, कैशलेस स्वास्थ्य सेवा और भत्तों से जुड़ी 9 प्रमुख मांगें रखी हैं। इन प्रस्तावों का सीधा असर करीब 45 लाख कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ेगा, हालांकि अभी सरकार की अंतिम मंजूरी बाकी है।

8th Pay Commission

मुख्य बातें

  • न्यूनतम वेतन तय करने हेतु फैमिली कंजम्पशन यूनिट 3 से बढ़ाकर 3.6 करने की मांग।
  • 45 लाख से अधिक कार्यरत कर्मियों और 68 लाख पेंशनरों के भविष्य पर पड़ेगा सीधा असर।
  • 2004 के बाद नियुक्त कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन योजना की पूर्ण बहाली प्रमुख एजेंडा।
  • रेलवे और रक्षा सिविलियन तकनीकी कर्मचारियों के लिए विशेष जोखिम भत्ते व बीमा का प्रस्ताव।
  • ग्रामीण डाक सेवक और पैरामिलिट्री बलों को आयोग के दायरे में शामिल करने की सिफारिश।

8th Pay Commission : केंद्रीय महकमों के दफ्तरों में इन दिनों काम से ज्यादा चर्चा 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की फाइलों को लेकर है। कर्मचारी संगठन अब केवल बेसिक-पे या सालाना इंक्रीमेंट के साधारण जोड़-घटाव तक सीमित नहीं रहना चाहते।

नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) के जरिए जो 9 सूत्रीय मांग पत्र तैयार हुआ है, उसने सीधे तौर पर सरकारी खजाने और कर्मचारियों के रहन-सहन के बीच संतुलन साधने की चुनौती खड़ी कर दी है।

देश के करीब 45 लाख सेवारत कर्मचारी और 68 लाख बुजुर्ग पेंशनभोगी इस वक्त केंद्र सरकार के अगले कदम की राह देख रहे हैं।

हालात यह हैं कि हर 10 साल में बनने वाले वेतन आयोग की परंपरा के तहत अगला ढांचा लागू होने का वक्त नजदीक आ रहा है, लेकिन आधिकारिक तौर पर टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है।

न्यूनतम वेतन की गणना और 3.6 कंजम्पशन यूनिट का गणित

कर्मचारियों की तरफ से सबसे तकनीकी और वित्तीय रूप से वजनदार मांग न्यूनतम वेतन के फॉर्मूले को बदलने की है। 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन (ILC) के ऐतिहासिक मानदंडों के तहत अब तक वेतन तय करने के लिए 3 कंजम्पशन यूनिट यानी पति, पत्नी और दो बच्चों (एक यूनिट) का आधार माना जाता रहा है।

कर्मचारी यूनियनों का तर्क है कि आज के सामाजिक और आर्थिक परिवेश में बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल का खर्च भी कर्मचारी के ही जिम्मे होता है। इसीलिए इसे बढ़ाकर 3.6 यूनिट किया जाना चाहिए।

यदि इस सिफारिश पर सहमति बनती है, तो लेवल-1 का मौजूदा न्यूनतम वेतन, जो 7वें वेतन आयोग में 18,000 रुपये तय हुआ था, वह बढ़कर सीधे 34,000 से 35,000 रुपये के दायरे में पहुंच सकता है।

पुरानी पेंशन, ग्रेच्युटी बहाली और कैशलेस स्वास्थ्य सुरक्षा

साल 2004 के बाद सेवा में आए कर्मचारियों के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) हमेशा से एक संवेदनशील राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा रहा है। यूनियनों ने साफ कर दिया है कि वे अनिश्चित शेयर बाजार आधारित रिटर्न की जगह 50 फीसदी अंतिम आहरित वेतन वाली पुरानी पेंशन योजना (OPS) की गारंटी चाहते हैं।

इसके साथ ही स्वास्थ्य के मोर्चे पर सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) के पैनल वाले अस्पतालों में ओपीडी और भर्ती के दौरान वास्तविक कैशलेस इलाज की मांग की गई है, ताकि बुजुर्ग पेंशनरों को मेडिकल बिलों के रीइंबर्समेंट के लिए महीनों दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

डेथ कम रिटायरमेंट ग्रेच्युटी (DCRG) के नियमों को सरल बनाने और 15 साल के भीतर कम्युटेड पेंशन को अनिवार्य रूप से रिस्टोर करने की समय-सीमा घटाने की बात भी ज्ञापन में दर्ज है।

कैरियर प्रमोशन, रेलवे-डिफेंस के जोखिम और आयोग का दायरा

मैदानी स्तर पर काम करने वाले रेल कर्मियों—खासकर ट्रैकमैन, लोको पायलट और तकनीकी स्टाफ—के लिए विशेष ‘रिस्क एंड हार्डशिप अलाउंस’ की पैरवी की गई है। यही मांग ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों और रक्षा प्रतिष्ठानों में काम करने वाले सिविलियन कर्मचारियों के लिए भी है, जो गोला-बारूद के बीच काम करते हैं।

मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACP) में 10, 20 और 30 साल की सेवा पर मिलने वाले वित्तीय अपग्रेडेशन में आ रही पे-लेवल की विसंगतियों को दूर करने पर जोर दिया गया है।

लेकिन सबसे अहम बात यह है कि संगठनों ने ग्रामीण डाक सेवकों (GDS) और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CRPF, BSF, ITBP) के जवानों को भी 8वें वेतन आयोग के मुख्य दायरे में शामिल करने की मांग की है।

तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि यह पूरा मसौदा फिलहाल केवल एक मांग पत्र है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग और कैबिनेट की हरी झंडी के बिना इनमें से कोई भी सिफारिश अंतिम नहीं मानी जा सकती।

आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार राजकोषीय घाटे को संभाले रखते हुए कर्मचारियों की इन 9 मांगों पर कितनी दरियादिली दिखाती है।

Parul Sharma

पारुल शर्मा 'दून हॉराइज़न' के बिज़नेस सेक्शन की एक अनुभवी आर्थिक एवं व्यापार संवाददाता हैं। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, बैंकिंग सेक्टर और पर्सनल फाइनेंस उनकी मुख्य बीट (Beat) है। पारुल को मार्केट के उतार-चढ़ाव और कंज्यूमर ट्रेंड्स का सटीक विश्लेषण करने में खास महारत हासिल है। वह अपनी रिपोर्टिंग में हमेशा प्रामाणिक सरकारी आंकड़ों और विश्वसनीय स्रोतों का ही इस्तेमाल करती हैं। पारुल का मुख्य उद्देश्य बजट, टैक्स नियमों और निवेश से जुड़ी अहम खबरों को बिना किसी लाग-लपेट के सीधे पाठकों तक पहुंचाना है, जिससे आम आदमी का वित्तीय ज्ञान और अधिक मजबूत हो सके।

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